तृणमूल कांग्रेस में बढ़ी अंदरूनी हलचल, काकोली घोष दस्तीदार के इस्तीफे से ममता सरकार पर उठे सवाल
- जिला पद छोड़ने के बाद सांसद पद से भी इस्तीफे की अटकलें तेज, बेटे ने भ्रष्टाचार के आरोपों को बताया वजह
- चुनावी हार, घोटालों और संगठनात्मक असंतोष के बीच तृणमूल कांग्रेस के लिए बढ़ी राजनीतिक चुनौती
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और बारासात से चार बार की सांसद काकोली घोष दस्तीदार के इस्तीफे की खबरों ने राज्य की सियासत को गर्म कर दिया है। माना जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस की अंदरूनी नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। रविवार को काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी के जिला पदाधिकारी पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद यह अटकलें तेज हो गई हैं कि वह जल्द ही सांसद पद से भी इस्तीफा दे सकती हैं। हालांकि काकोली घोष दस्तीदार ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन उनके बेटे वैद्यनाथ घोष के बयान ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को और तेज कर दिया है। वैद्यनाथ घोष ने दावा किया कि उनकी मां ने तृणमूल कांग्रेस के महिला मोर्चा के पद से भी इस्तीफा दे दिया है और वह सांसद पद छोड़ने पर भी विचार कर रही हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि राज्य सरकार में लगातार सामने आए भ्रष्टाचार और घोटालों ने उनके परिवार की छवि को नुकसान पहुंचाया है। वैद्यनाथ घोष ने कहा कि बारासात लोकसभा क्षेत्र की सात विधानसभा सीटों में से छह सीटों पर पार्टी की हार के बाद उनकी मां ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए यह फैसला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों में पार्टी और सरकार से जुड़े कई विवादों ने जनता के बीच गलत संदेश पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि पार्थ चटर्जी के समय नौकरी घोटाले का मामला सामने आया, जिसमें कथित रूप से नौकरियां बेची गईं और हजारों योग्य युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ। इसके अलावा राशन घोटाले में ज्योतिप्रिय मल्लिक की गिरफ्तारी और आरजी कर अस्पताल से जुड़े घटनाक्रमों ने भी सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया। वैद्यनाथ घोष ने कहा कि उनका परिवार एक शिक्षित और सम्मानित परिवार है और लगातार भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण उन पर भी सवाल उठने लगे थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी मां का यह कदम किसी दूसरी पार्टी में जाने के लिए नहीं है। भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की अटकलों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि काकोली घोष दस्तीदार सिर्फ भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी असहमति दर्ज कराना चाहती हैं। उनके अनुसार, कोई भी व्यक्ति लंबे समय तक ऐसे माहौल को सहन नहीं कर सकता, जहां लगातार घोटालों और विवादों की चर्चा हो रही हो। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। खासकर ऐसे समय में जब पार्टी पहले से ही चुनावी प्रदर्शन को लेकर दबाव में है। हाल ही में लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के मुख्य सचेतक पद से काकोली घोष दस्तीदार को हटाकर वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी को जिम्मेदारी दी गई थी। इसके कुछ दिनों बाद ही उनका इस्तीफा सामने आना कई राजनीतिक संकेत दे रहा है। सूत्रों के अनुसार, काकोली घोष दस्तीदार ने तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को अपना त्यागपत्र भेजा है। पत्र में उन्होंने बारासात और उत्तर 24 परगना क्षेत्र में पार्टी के खराब चुनावी प्रदर्शन की जिम्मेदारी ली है। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मामला सिर्फ चुनावी हार तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और संगठनात्मक संकट की ओर भी इशारा करता है। इधर केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा हाल ही में काकोली घोष दस्तीदार को वाई श्रेणी की सुरक्षा दिए जाने के बाद राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि सुरक्षा बढ़ने और पार्टी में लगातार जिम्मेदारियां बदलने के बीच उनका यह कदम आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है। तृणमूल कांग्रेस लंबे समय से पश्चिम बंगाल की सबसे मजबूत राजनीतिक ताकत रही है, लेकिन हाल के वर्षों में पार्टी को भ्रष्टाचार, घोटालों और संगठनात्मक असंतोष के आरोपों का सामना करना पड़ा है। अब काकोली घोष दस्तीदार जैसे वरिष्ठ नेता की नाराजगी ने विपक्ष को भी सरकार पर हमला करने का नया मौका दे दिया है। फिलहाल सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या काकोली घोष दस्तीदार वास्तव में सांसद पद से इस्तीफा देती हैं या पार्टी नेतृत्व उन्हें मनाने में सफल रहता है। लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम ने तृणमूल कांग्रेस की आंतरिक राजनीति को एक बार फिर सार्वजनिक बहस का विषय बना दिया है।


