भोजपुर-बक्सर विधान परिषद उपचुनाव में राजद की जीत, सोनू राय ने जदयू उम्मीदवार को हराया

  • नई सरकार बनने के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को पहली चुनावी हार
  • कार्यकर्ताओं की नाराजगी और बागी उम्मीदवार बने जनता दल यूनाइटेड की हार की बड़ी वजह

पटना। बिहार विधान परिषद की भोजपुर-सह-बक्सर स्थानीय प्राधिकार निर्वाचन क्षेत्र सीट पर हुए उपचुनाव में राष्ट्रीय जनता दल ने महत्वपूर्ण जीत दर्ज की है। राजद उम्मीदवार सोनू राय ने जनता दल यूनाइटेड के उम्मीदवार कन्हैया प्रसाद को हराकर यह सीट अपने नाम कर ली। नई सरकार के गठन के बाद यह पहला चुनाव था, जिसमें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को हार का सामना करना पड़ा है। इस जीत को राजद के लिए राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह सीट पहले जनता दल यूनाइटेड के पास थी। विधान पार्षद राधाचरण साह के संदेश विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने जाने के बाद उन्होंने विधान परिषद सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके कारण यह सीट खाली हुई थी। उपचुनाव में जनता दल यूनाइटेड ने राधाचरण साह के पुत्र कन्हैया प्रसाद को उम्मीदवार बनाया था, जबकि राष्ट्रीय जनता दल ने सोनू राय को मैदान में उतारा। मंगलवार को हुए मतदान में मतदाताओं ने भारी उत्साह दिखाया और लगभग 97.96 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। स्थानीय प्राधिकार निर्वाचन क्षेत्र होने के कारण इस चुनाव में जनप्रतिनिधि मतदान करते हैं। राजनीतिक दलों ने इसे प्रतिष्ठा का चुनाव माना था और दोनों पक्षों ने पूरी ताकत झोंक दी थी। मतगणना के बाद जैसे ही परिणाम सामने आया, राजद कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। पार्टी कार्यालयों में समर्थकों ने मिठाइयां बांटी और जीत का जश्न मनाया। दूसरी ओर जनता दल यूनाइटेड खेमे में मायूसी दिखाई दी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस चुनाव में जनता दल यूनाइटेड के भीतर नाराजगी हार की बड़ी वजह बनी। पार्टी के बागी नेता मनोज उपाध्याय ने चुनाव को त्रिकोणीय बना दिया। वे भी इस सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन पार्टी ने कन्हैया प्रसाद को उम्मीदवार बनाया। इसके बाद उन्होंने खुलकर पार्टी नेतृत्व के फैसले का विरोध किया और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का मुद्दा उठाया। मनोज उपाध्याय लगातार यह कहते रहे कि यदि कन्हैया प्रसाद चुनाव जीत जाते, तो यह सीट एक परिवार की “पुश्तैनी सीट” बन जाती। चुनाव परिणाम आने के बाद भी उन्होंने कहा कि यह कार्यकर्ताओं की जीत है और वे यही चाहते थे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी के भीतर असंतोष और बागी उम्मीदवार की सक्रियता ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के वोटों को नुकसान पहुंचाया। कन्हैया प्रसाद पहले भी विवादों में रह चुके हैं। अवैध बालू खनन और धन शोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें सितंबर 2023 में गिरफ्तार किया था। वे करीब नौ महीने तक जेल में रहे थे। चुनाव के दौरान विपक्ष ने इस मुद्दे को भी जोर-शोर से उठाया। वहीं विजयी उम्मीदवार सोनू राय का राजनीतिक परिवार से पुराना संबंध रहा है। उनके पिता लालदास राय भी इसी सीट से विधान परिषद सदस्य रह चुके हैं। राजनीतिक क्षेत्र में उनकी पकड़ और स्थानीय समीकरणों का फायदा भी उन्हें मिला। इस जीत के साथ सोनू राय अप्रैल 2028 तक विधान परिषद सदस्य बने रहेंगे। यह जीत राष्ट्रीय जनता दल के लिए इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि हाल के विधानसभा चुनाव और राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन को लगातार हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में इस उपचुनाव की जीत ने पार्टी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरने का काम किया है। उधर बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों में विधान परिषद की अन्य सीटों को लेकर भी हलचल तेज होने वाली है। जून महीने में नौ विधान पार्षदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जबकि एक सीट नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के कारण खाली हुई है। इन सीटों को लेकर सभी दलों में रणनीति और जोड़-तोड़ शुरू हो गई है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि निशांत कुमार और दीपक प्रकाश का विधान परिषद पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है। बाकी सीटों के लिए विभिन्न दलों और नेताओं के बीच जोरदार लॉबिंग चल रही है। आने वाले समय में बिहार की राजनीति में यह चुनावी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

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