अमेरिका-ईरान तनाव के बीच फिर शुरू हो सकती है वार्ता, होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा मुद्दा
- इस्लामाबाद में संभावित बातचीत को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज, परमाणु कार्यक्रम पर मतभेद बरकरार
- तेल बाजार में उथल-पुथल, क्षेत्रीय सुरक्षा और युद्ध की आशंका पर दुनिया की नजर
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को कम करने के प्रयास एक बार फिर तेज होते दिखाई दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अगले सप्ताह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता फिर शुरू हो सकती है। बताया जा रहा है कि दोनों देश मध्यस्थों के जरिए एक प्रारूप समझौते पर काम कर रहे हैं, जिससे आने वाले समय में औपचारिक वार्ता का रास्ता खुल सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका की ओर से 14 बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव कम करने, संवर्धित यूरेनियम भंडार को किसी तीसरे देश भेजने और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था जैसे कई अहम मुद्दे शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि उन्हें ईरान की ओर से जल्द प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि वार्ता सकारात्मक दिशा में बढ़ती है तो युद्धविराम की अवधि को आगे भी बढ़ाया जा सकता है। हालांकि ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम और उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम को लेकर किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा मामला है, इसलिए इस पर किसी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस बीच दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची हाल ही में इस्लामाबाद पहुंचे थे, जहां दूसरे दौर की बातचीत की तैयारी की गई। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जेरेड कुशनर का पाकिस्तान दौरा रद्द कर दिया, जिससे वार्ता प्रक्रिया को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई। होर्मुज जलडमरूमध्य इस समय पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील केंद्र बना हुआ है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का परिवहन होता है। ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि उसने इस क्षेत्र में फिर सैन्य हस्तक्षेप किया, तो व्यापक युद्ध छिड़ सकता है। दूसरी ओर अमेरिकी केंद्रीय कमान ने दावा किया कि उसने 70 से अधिक जहाजों को ईरानी बंदरगाहों तक पहुंचने या वहां से निकलने से रोका। इन जहाजों में अरबों डॉलर मूल्य के तेल की ढुलाई की क्षमता बताई गई है। संयुक्त अरब अमीरात ने भी दावा किया है कि ईरान की ओर से दो बैलिस्टिक मिसाइल और तीन मानवरहित विमान दागे गए, जिन्हें वायु रक्षा प्रणाली ने नष्ट कर दिया। इस घटना में तीन लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत 103 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट तेल की कीमत में भी तेजी दर्ज की गई। निवेश विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में अभी अस्थिरता बनी हुई है, लेकिन निवेशकों को संभावित समझौते की उम्मीद भी दिखाई दे रही है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने संकेत दिया है कि यदि ईरान के साथ समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका “प्रोजेक्ट फ्रीडम प्लस” नामक अभियान शुरू कर सकता है। इसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकालना होगा। दूसरी ओर ईरान की राजनीति में भी हलचल बनी हुई है। नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई इस समय युद्ध और अमेरिका के साथ बातचीत की रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि उनकी सेहत और राजनीतिक पकड़ को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। इसके अलावा अमेरिका ने यह भी घोषणा की है कि इजराइल और लेबनान के बीच शांति और सुरक्षा समझौते पर अगली महत्वपूर्ण वार्ता 14 और 15 मई को होगी। इस वार्ता में अमेरिका मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा। बातचीत में सीमा विवाद, पुनर्निर्माण और स्थायी शांति जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।


