संघर्ष विराम के बीच अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा, होर्मुज संकट से वैश्विक व्यापार प्रभावित
- अमेरिकी बमबारी के बाद ईरान ने दी कड़ी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
- खाड़ी क्षेत्र में 1500 जहाज फंसे, अस्थायी समझौते पर जारी है बातचीत
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गहरा गया है। संघर्षविराम की चर्चाओं के बीच अमेरिकी सेना द्वारा ईरानी ठिकानों और तेल टैंकरों पर की गई कार्रवाई ने हालात को और गंभीर बना दिया है। ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने संघर्षविराम की भावना का उल्लंघन करते हुए ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया। इसके बाद ईरानी सेना ने बिना किसी हिचकिचाहट के जवाब देने की चेतावनी दी है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, खातम अल-अंबिया केंद्रीय मुख्यालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी सेना ने जास्क के पास ईरानी समुद्री क्षेत्र से गुजर रहे एक तेल टैंकर पर हमला किया। ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों और संघर्षविराम के खिलाफ बताते हुए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया था, जिसके जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरानी सैन्य संसाधनों को भारी नुकसान पहुंचाया। राष्ट्रपति ट्रम्प ने सामाजिक मीडिया मंच पर जारी बयान में कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने जवाबी कार्रवाई में ईरानी छोटी नौकाओं को नष्ट कर दिया और कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना अपने सैनिकों और सैन्य उपकरणों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने को तैयार है। अमेरिकी केंद्रीय कमान ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे अमेरिकी युद्धपोतों पर “उकसावे वाले हमले” किए गए थे। इसके बाद अमेरिकी वायुसेना ने मिसाइल प्रक्षेपण स्थलों, ड्रोन नियंत्रण केंद्रों और निगरानी प्रणालियों पर हवाई हमला किया। अमेरिका का कहना है कि वह तनाव बढ़ाना नहीं चाहता, लेकिन अपनी सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। वहीं ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिकी हवाई हमलों में नागरिक क्षेत्रों को भी निशाना बनाया गया। ईरानी सेना के प्रवक्ताओं के अनुसार, होर्मुज क्षेत्र और बंदरगाह इलाकों में कई विस्फोट हुए, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। हालांकि दोनों देशों ने अब तक हताहतों और नुकसान के बारे में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। इस तनाव का असर पूरे खाड़ी क्षेत्र और वैश्विक व्यापार पर दिखाई देने लगा है। संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगेज ने कहा कि होर्मुज संकट के कारण करीब 1500 जहाज और लगभग 20 हजार नाविक खाड़ी क्षेत्र में फंस गए हैं। तेल, गैस और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर इसका असर लगातार बढ़ रहा है। कई देशों में ऊर्जा संकट और खाद्य आपूर्ति प्रभावित होने लगी है। इसी बीच इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच भी तनाव बढ़ गया है। इजराइल ने दावा किया कि उसने बेरूत में किए गए हमले में हिजबुल्लाह की रदवान यूनिट के कमांडर अहमद बलूत समेत कई बड़े कमांडरों को मार गिराया। इसके जवाब में हिजबुल्लाह ने दक्षिणी लेबनान में इजराइली सैन्य ठिकानों और टैंकों पर हमले करने का दावा किया है। अमेरिका ने ईरान से जुड़े कई व्यक्तियों और कंपनियों पर नए प्रतिबंध भी लगाए हैं। इनमें इराक के उप तेल मंत्री अली मारीज अल-बहादली और कुछ निजी कंपनियां शामिल हैं। अमेरिका का आरोप है कि ये लोग तेल कारोबार के माध्यम से ईरान और उससे जुड़े संगठनों की आर्थिक मदद कर रहे थे। इस बीच संयुक्त अरब अमीरात ने भी दावा किया है कि ईरान की ओर से 2800 से अधिक ड्रोन और मिसाइल हमले किए गए हैं। वहां की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और सरकारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है। सरकार ने इन हमलों का रिकॉर्ड तैयार करने के लिए एक राष्ट्रीय समिति गठित करने की घोषणा की है, ताकि भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी कार्रवाई की जा सके। हालांकि तनाव के बीच बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच 30 दिन तक संघर्ष रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य को व्यापारिक जहाजों के लिए खोलने को लेकर बातचीत चल रही है। प्रस्तावित समझौते के तहत दोनों देश अस्थायी रूप से सैन्य कार्रवाई रोक सकते हैं, जबकि स्थायी समझौते पर वार्ता जारी रहेगी। सबसे बड़ा विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम और संवर्धित यूरेनियम के भंडार को लेकर बना हुआ है।


