चुनावी रुझानों के बीच शेयर बाजार में उछाल, सेंसेक्स 750 अंक चढ़ा

  • पांच राज्यों के चुनावी संकेतों से निवेशकों का भरोसा मजबूत, प्रमुख सूचकांक में तेजी
  • रियल एस्टेट, धातु और सरकारी बैंकिंग शेयरों में खरीदारी, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में दबाव

मुंबई। देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के नतीजों के बीच शेयर बाजार में आज जोरदार तेजी देखने को मिली। 4 मई को शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 750 अंक यानी करीब 0.94 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,700 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। वहीं Nifty 50 भी लगभग 250 अंक यानी 0.92 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,200 के स्तर तक पहुंच गया। विशेषज्ञों के अनुसार, चुनावी रुझानों में स्पष्ट जनादेश की संभावना ने बाजार के मनोभाव को सकारात्मक बनाया है। निवेशकों को यह संकेत मिला है कि राजनीतिक स्थिरता बनी रह सकती है, जिससे आर्थिक नीतियों में निरंतरता की उम्मीद बढ़ी है। यही कारण है कि बाजार में खरीदारी का रुझान मजबूत हुआ है। आज के कारोबार में सबसे ज्यादा तेजी रियल एस्टेट, धातु और सरकारी बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों में देखी गई। इन क्षेत्रों में निवेशकों ने जमकर खरीदारी की, जिससे इन सूचकांकों में उछाल दर्ज किया गया। इसके विपरीत सूचना प्रौद्योगिकी और मीडिया क्षेत्र के शेयरों में बिकवाली का दबाव बना रहा। माना जा रहा है कि वैश्विक संकेतों और क्षेत्रीय कारणों से इन क्षेत्रों में निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। बाजार की इस तेजी के पीछे एशियाई बाजारों का सकारात्मक प्रदर्शन भी एक महत्वपूर्ण कारण रहा। जापान, दक्षिण कोरिया और हांगकांग के शेयर बाजारों में मजबूती देखने को मिली, जिसका असर भारतीय बाजार के रुख पर भी पड़ा। वैश्विक स्तर पर बेहतर संकेत मिलने से घरेलू निवेशकों का भरोसा बढ़ा और उन्होंने बाजार में निवेश बढ़ाया। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी बाजार के लिए राहत भरी खबर साबित हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चा तेल की कीमत घटकर 110 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है और यह करीब 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई के दबाव में कमी आने की उम्मीद रहती है, जिससे अर्थव्यवस्था को सकारात्मक संकेत मिलते हैं। पिछले कारोबारी सत्र की बात करें तो 30 अप्रैल को बाजार में गिरावट दर्ज की गई थी। उस दिन सेंसेक्स 583 अंक यानी 0.75 प्रतिशत गिरकर 76,913 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी में भी 180 अंकों यानी 0.74 प्रतिशत की गिरावट आई थी और यह 23,998 के स्तर पर बंद हुआ था। उस दिन सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में खरीदारी देखने को मिली थी, जबकि धातु और सरकारी बैंकिंग शेयरों में बिकवाली हावी रही थी। विश्लेषकों का कहना है कि बाजार में इस तरह के उतार-चढ़ाव सामान्य हैं, लेकिन चुनावी परिणाम जैसे बड़े घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। यदि चुनाव परिणाम स्थिर सरकार का संकेत देते हैं, तो आने वाले दिनों में बाजार में और मजबूती देखने को मिल सकती है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार की मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संतुलित निवेश रणनीति अपनाएं। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संकेत, कच्चे तेल की कीमतें और घरेलू राजनीतिक स्थिति आने वाले समय में बाजार की दिशा को प्रभावित करती रहेंगी। चुनावी माहौल और वैश्विक संकेतों के बीच शेयर बाजार में आई यह तेजी निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। आने वाले दिनों में चुनाव परिणामों की स्पष्ट तस्वीर सामने आने के बाद बाजार की चाल और अधिक स्पष्ट हो सकेगी।