पटना में गर्मी और धूल का दोहरा हमला, अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ी
- सांस और त्वचा रोगों के मरीजों में 30 प्रतिशत तक वृद्धि, अस्पतालों में बेड कम पड़ने लगे
- लू, जल-अल्पता और एलर्जी का खतरा बढ़ा, स्वास्थ्य विभाग ने सभी केंद्रों को किया सतर्क
पटना। बिहार की राजधानी पटना इस समय भीषण गर्मी और निर्माण कार्यों से उड़ती धूल के दोहरे संकट से जूझ रही है। शहर की हवा में घुले सूक्ष्म धूल कण लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रहे हैं। इसके साथ ही तेज धूप और गर्म हवाएं स्थिति को और अधिक चिंताजनक बना रही हैं। इसका असर अब साफ तौर पर अस्पतालों में देखने को मिल रहा है, जहां मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। राजधानी के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल और नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के बाह्य रोगी विभाग में मरीजों की संख्या में 30 से 35 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। चिकित्सकों के अनुसार, आने वाले मरीजों में हर तीसरा व्यक्ति सिरदर्द, चक्कर, जल-अल्पता, सांस लेने में परेशानी या एलर्जी की शिकायत लेकर पहुंच रहा है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अस्थमा और दीर्घकालिक अवरोधक फेफड़ा रोग से पीड़ित मरीजों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी हुई है। चिकित्सा अधीक्षक के अनुसार, अस्पताल के अधिकांश बेड भर चुके हैं और आपातकालीन सेवाओं पर भी दबाव बढ़ गया है। धूल और पसीने के कारण त्वचा संक्रमण के मामलों में भी तेजी आई है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह मौसम केवल फेफड़ों को ही नहीं बल्कि शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर रहा है। तेज गर्मी के कारण लोग जल-अल्पता और लू की चपेट में आ रहे हैं, जबकि हवा में मौजूद धूल के कण एलर्जी और सांस संबंधी समस्याओं को बढ़ा रहे हैं। यह दोनों कारक मिलकर शरीर में सूजन और संक्रमण की स्थिति पैदा कर रहे हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि किडनी और लीवर के मरीजों के लिए यह समय अत्यंत संवेदनशील है। अत्यधिक गर्मी में लोग अधिक पानी पीते हैं, लेकिन शरीर में संतुलन बिगड़ने पर इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन की समस्या हो सकती है, जो गंभीर स्थितियों जैसे हृदय या फेफड़े की विफलता तक ले जा सकती है। इसलिए पानी का सेवन संतुलित मात्रा में करना जरूरी है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी लू के लक्षण वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी केंद्रों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। अस्पतालों में विशेष लू वार्ड और गहन चिकित्सा इकाई के बेड तैयार किए गए हैं, ताकि गंभीर मरीजों को तुरंत उपचार मिल सके। इसके साथ ही बच्चों में होने वाले चमकी बुखार को लेकर भी विशेष तैयारी की गई है। स्वास्थ्य विभाग ने एम्बुलेंस सेवा को पूरी तरह सक्रिय रखा है और डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि आपात स्थिति में तुरंत इलाज उपलब्ध कराया जा सके। ग्रामीण क्षेत्रों में भी मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था को सक्रिय किया गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इस मौसम में कई बीमारियों का खतरा एक साथ बढ़ जाता है। जहां एक ओर अस्थमा के मरीजों की संख्या में 25 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है, वहीं दूसरी ओर लू, चमकी बुखार और डेंगू जैसी बीमारियों का भी खतरा बना हुआ है। इसी को ध्यान में रखते हुए अस्पतालों में अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की गई है, जिनमें वेंटिलेटर की सुविधा भी शामिल है। डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण वे जल्दी बीमार पड़ते हैं, जबकि बुजुर्गों में पहले से मौजूद बीमारियां इस मौसम में और गंभीर हो जाती हैं। पटना में गर्मी और धूल का यह दोहरा असर लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सावधानी बरतने, धूप से बचने और संतुलित जीवनशैली अपनाने की अपील की है, ताकि इस मौसम में होने वाली बीमारियों से बचा जा सके।


