खरमास समाप्त, शुभ मुहूर्तों के साथ शुरू होगा शादी-विवाह का मौसम

  • सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ विवाह योग्य काल आरंभ, अप्रैल से जुलाई तक लग्न की भरमार
  • 17 मई से 15 जून तक मलमास में विवाह पर विराम, पंचांगों में अलग-अलग मुहूर्त निर्धारित

पटना। हिंदू पंचांग के अनुसार आज से खरमास की समाप्ति हो रही है, जिसके साथ ही विवाह जैसे मांगलिक कार्यों पर लगी रोक भी समाप्त हो जाएगी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार वैशाख कृष्ण द्वादशी के दिन दोपहर लगभग 11 बजकर 25 मिनट पर सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के इस राशि परिवर्तन के साथ ही खरमास समाप्त माना जाता है और शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है। खरमास के समाप्त होते ही शादी-विवाह का मौसम एक बार फिर जोर पकड़ने वाला है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार अप्रैल से लेकर जुलाई तक विवाह के कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे, जिसके चलते इस अवधि में शादियों की संख्या में तेजी आने की संभावना है। हालांकि, इस बीच 17 मई से 15 जून तक मलमास लगने के कारण लगभग एक महीने के लिए विवाह समारोहों पर विराम रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विवाह जैसे पवित्र बंधन के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि उचित ग्रह-नक्षत्रों और तिथियों में संपन्न विवाह दीर्घकालिक सुख और समृद्धि का कारण बनता है। शास्त्रों में विशेष रूप से बृहस्पति, शुक्र और सूर्य ग्रह की शुभ स्थिति को विवाह के लिए आवश्यक माना गया है। वहीं, सूर्य और बृहस्पति का संयोग विशेष रूप से फलदायी और सिद्धिदायक माना जाता है। पंचांगों के अनुसार इस वर्ष विवाह के लिए पर्याप्त शुभ तिथियां उपलब्ध हैं। मिथिला पंचांग की गणना के अनुसार चातुर्मास शुरू होने से पहले कुल 21 विवाह मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं। इसमें अप्रैल में सात, मई में पांच, जून में छह और जुलाई में छह शुभ तिथियां शामिल हैं। वहीं, काशी के महावीर पंचांग के अनुसार अप्रैल में दस, मई में दस, जून में ग्यारह और जुलाई में सात मुहूर्त उपलब्ध हैं। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि विवाह के लिए वृष, मिथुन, कन्या, तुला, धनु और मीन लग्न को विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इन लग्नों में विवाह करने से वैवाहिक जीवन में स्थिरता और सौभाग्य की वृद्धि होती है। इसके अलावा नक्षत्रों में अश्विनी, रेवती, रोहिणी, मृगशिरा, मूल, मघा, चित्रा, स्वाति, श्रवणा, हस्त, अनुराधा, उत्तरा फाल्गुन, उत्तरा भाद्र और उत्तरा आषाढ़ को विवाह के लिए उपयुक्त माना गया है। विशेष रूप से रोहिणी, मृगशिरा और हस्त नक्षत्र को अत्यंत शुभ माना जाता है। इन नक्षत्रों में संपन्न विवाह को उत्तम फलदायी माना जाता है। इसके साथ ही माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़ और अगहन मास में विवाह को अत्यधिक शुभ बताया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान समय में भी लोग विवाह के लिए शुभ मुहूर्त और ज्योतिषीय गणनाओं का विशेष ध्यान रखते हैं। यही कारण है कि खरमास समाप्त होते ही विवाह समारोहों की तैयारियां तेज हो जाती हैं और बाजारों में भी रौनक बढ़ने लगती है। शादी-विवाह से जुड़े व्यवसायों जैसे कपड़ा, आभूषण, सजावट और खानपान से जुड़े क्षेत्रों में भी इस अवधि में तेजी देखी जाती है। मलमास के दौरान विवाह जैसे मांगलिक कार्यों को टालने की परंपरा है, इसलिए 17 मई से 15 जून तक शादी-विवाह पर विराम रहेगा। इसके बाद पुनः शुभ मुहूर्तों का सिलसिला शुरू होगा। खरमास की समाप्ति के साथ ही विवाह का शुभ समय प्रारंभ हो गया है। आगामी महीनों में बड़ी संख्या में विवाह समारोह आयोजित होने की संभावना है, जिससे सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी आने की उम्मीद है।

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