ईरान-अमेरिका वार्ता विफल, ट्रंप के कड़े तेवर; होर्मुज पर बढ़ा वैश्विक तनाव
- बातचीत में ठहराव के बाद अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई का ऐलान, ईरान ने जताई आपत्ति
- होर्मुज जलडमरूमध्य पर टकराव की आशंका, वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर असर संभव
नई दिल्ली। पाकिस्तान में हुई वार्ता के विफल होने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और गहरा गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि ईरान बातचीत के लिए आगे नहीं आता है तो अमेरिका को इससे कोई विशेष फर्क नहीं पड़ता। वहीं ईरान ने अमेरिका पर उसके अधिकारों का सम्मान न करने का आरोप लगाया है, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिरोध और बढ़ गया है। मैरीलैंड स्थित संयुक्त सैन्य अड्डा एंड्रयूज पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि वार्ता हो या न हो, अमेरिका अपनी नीति पर कायम रहेगा। उन्होंने कहा कि अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी थी, लेकिन परमाणु कार्यक्रम को लेकर मतभेद बना रहा, जिसके कारण बातचीत सफल नहीं हो सकी। ट्रंप ने यह भी दोहराया कि अमेरिका ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को स्वीकार नहीं करेगा। वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका ने सख्त रुख अपनाते हुए ईरान से जुड़े समुद्री मार्गों पर निगरानी और संभावित कार्रवाई की घोषणा की है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नौसेना को निर्देश दिया गया है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में उन जहाजों को रोका जाए, जो ईरान से निकलने के लिए अवैध शुल्क का भुगतान करते हैं। उनका कहना है कि ऐसे किसी भी जहाज को सुरक्षित मार्ग नहीं दिया जाएगा। इस बीच, ईरान ने अमेरिकी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वह अपने अधिकारों की रक्षा कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन नहीं कर रहा। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने चेतावनी दी है कि किसी भी आक्रामक कदम का कड़ा जवाब दिया जाएगा। संगठन ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका नियंत्रण मजबूत है और किसी भी हस्तक्षेप का सामना किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है। यदि इस मार्ग पर किसी प्रकार की नाकेबंदी या सैन्य टकराव की स्थिति बनती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। तेल की कीमतों में तेजी से वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला में बाधा आने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिका ने यह भी संकेत दिया है कि यदि परिस्थितियां अनुकूल होती हैं तो वह भविष्य में ईरान के खिलाफ कार्रवाई समाप्त करने पर विचार कर सकता है। हालांकि इसके लिए ईरान को अपनी नीतियों में बदलाव करना होगा और विशेष रूप से परमाणु कार्यक्रम पर स्पष्ट रुख अपनाना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस स्थिति में दोनों देशों के बीच संवाद की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि ईरान भविष्य में बातचीत के लिए वापस आ सकता है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में दोनों पक्षों के बीच अविश्वास गहरा गया है, जिससे समाधान की राह कठिन होती नजर आ रही है। इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर देखा जा रहा है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की है। यदि तनाव और बढ़ता है, तो सैन्य कार्रवाई की आशंका से क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है। इससे न केवल ऊर्जा बाजार प्रभावित होगा, बल्कि वैश्विक व्यापार और निवेश पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। साथ ही, अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा और घरेलू राजनीतिक दबाव भी बढ़ने की संभावना है। ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा गतिरोध ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों देश बातचीत की राह पर लौटते हैं या फिर तनाव और गहराता है, जिसका प्रभाव पूरी दुनिया को झेलना पड़ सकता है।


