शेयर बाजार में भारी गिरावट, कुछ ही मिनटों में निवेशकों के 8 लाख करोड़ रुपये डूबे
- सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट, वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों का असर
- रुपया कमजोर, एशियाई और अमेरिकी बाजारों में भी दिखी गिरावट
मुंबई। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों को कुछ ही मिनटों में करीब 8 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण घटकर 443 लाख करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले सत्र में 451 लाख करोड़ रुपये था। इस तेज गिरावट ने निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी है। कारोबार की शुरुआत में ही प्रमुख सूचकांकों में भारी गिरावट देखी गई। सेंसेक्स 1613 अंकों की गिरावट के साथ 75,937 के स्तर पर खुला, जबकि निफ्टी 50 भी 461 अंक गिरकर 23,589 पर खुला। शुरुआती कारोबार में कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार में नकारात्मक रुझान बना रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे वैश्विक कारण प्रमुख हैं। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए हुई बातचीत के असफल रहने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भी निवेशकों की चिंता को बढ़ाया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चा तेल वायदा 7 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 101.91 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी पश्चिम टेक्सास मध्यवर्ती कच्चा तेल 7.86 प्रतिशत की तेजी के साथ 104.16 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। कच्चे तेल की कीमतों में इस तेजी का सीधा असर ऊर्जा आयात करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर पड़ता है। एशियाई बाजारों में भी सोमवार को गिरावट का माहौल रहा। जापान का निक्केई सूचकांक और टॉपिक्स सूचकांक दोनों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि दक्षिण कोरिया के कोस्पी और कोस्डैक सूचकांक भी कमजोर रहे। हांगकांग के हैंग सेंग वायदा सूचकांक ने भी नकारात्मक शुरुआत के संकेत दिए। अमेरिकी बाजारों के वायदा सूचकांक भी दबाव में दिखाई दिए। डॉव जोन्स औद्योगिक औसत, एसएंडपी 500 और नैस्डैक 100 वायदा सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक स्तर पर निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है। भारतीय मुद्रा पर भी इस गिरावट का असर देखने को मिला। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 93.28 पर खुला, जो पिछले सत्र के बंद भाव 92.73 से 55 पैसे नीचे है। मजबूत अमेरिकी डॉलर और वैश्विक अनिश्चितता के कारण भारतीय मुद्रा पर दबाव बना हुआ है। सोने और चांदी की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब एक सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया। सोने की हाजिर कीमत 1.1 प्रतिशत गिरकर 4,694.30 डॉलर प्रति औंस रही, जबकि अमेरिकी सोना वायदा भी कमजोर हुआ। चांदी की कीमतों में भी लगभग 1.9 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर सूचकांक मजबूत बना हुआ है, जो अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा की मजबूती को दर्शाता है। यूरो और ब्रिटिश पाउंड में गिरावट दर्ज की गई, जबकि जापानी येन के मुकाबले डॉलर मजबूत हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली भारतीय बाजार पर दबाव बनाए रख सकती है। हालांकि, दीर्घकालिक निवेशकों को घबराने के बजाय बाजार के रुझानों पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है। सोमवार को शेयर बाजार में आई इस बड़ी गिरावट ने निवेशकों को झटका दिया है। आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम और आर्थिक संकेतक बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशकों को सतर्क रहकर सोच-समझकर निवेश करने की आवश्यकता है।


