बिहार में नई बिजली दर लागू, दिन में सस्ती और शाम में महंगी हुई बिजली

  • समय आधारित शुल्क प्रणाली लागू, स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को राहत और नई व्यवस्था
  • पीक समय में भी दरों में कमी, 87 लाख से अधिक उपभोक्ताओं पर असर

पटना। बिहार में एक अप्रैल से बिजली आपूर्ति की नई व्यवस्था लागू कर दी गई है, जिसके तहत अब उपभोक्ताओं को दिन के समय सस्ती और शाम के समय अपेक्षाकृत महंगी बिजली मिलेगी। राज्य में पहली बार समय के आधार पर शुल्क प्रणाली लागू की गई है, जिसका उद्देश्य बिजली की मांग को संतुलित करना और उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत देना है। इस नई व्यवस्था का लाभ फिलहाल स्मार्ट प्रीपेड मीटर वाले घरेलू उपभोक्ताओं को मिलेगा, जबकि कृषि उपभोक्ताओं को इससे अलग रखा गया है। सरकार और बिजली कंपनी का मानना है कि इस व्यवस्था से उपभोक्ता अपनी जरूरत के अनुसार बिजली उपयोग का समय तय कर सकेंगे और इससे बिजली की बचत को भी बढ़ावा मिलेगा।
समय आधारित शुल्क प्रणाली क्या है
समय आधारित शुल्क प्रणाली का अर्थ है कि बिजली की दरें पूरे दिन समान नहीं रहेंगी, बल्कि अलग-अलग समय के अनुसार बदलेंगी। जब बिजली की मांग कम रहती है, उस समय दर कम रखी गई है, जबकि जिस समय बिजली की मांग अधिक रहती है, उस समय दर थोड़ी बढ़ा दी गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य लोगों को दिन के समय अधिक बिजली उपयोग करने के लिए प्रेरित करना है ताकि शाम के समय बिजली पर पड़ने वाला दबाव कम किया जा सके।
दिन में सबसे सस्ती बिजली
नई दरों के अनुसार सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक बिजली की कीमत सबसे कम रखी गई है। इस समय उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट केवल 2.30 रुपये देना होगा। सरकार का मानना है कि इस अवधि में लोग कपड़े धोने, पानी मोटर चलाने, मोबाइल और अन्य उपकरण चार्ज करने जैसे काम कर सकते हैं, जिससे उनका बिजली बिल कम आएगा। यह दर सामान्य दर का लगभग 80 प्रतिशत है, यानी यदि पहले 100 रुपये खर्च होते थे तो अब उसी उपयोग के लिए लगभग 80 रुपये ही देने होंगे।
रात में सामान्य दर
रात 11 बजे से सुबह 9 बजे तक बिजली की दर 3.87 रुपये प्रति यूनिट रखी गई है, जो सामान्य दर के बराबर है। इस समय उपयोग करने पर उपभोक्ताओं को कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। इस अवधि में सामान्य घरेलू कार्य जैसे पंखा, लाइट और अन्य आवश्यक उपकरण चलाने पर पहले की तरह ही बिल आएगा।
शाम के समय थोड़ी महंगी बिजली
शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक बिजली की मांग सबसे अधिक रहती है, इसलिए इस समय की दर 4.61 रुपये प्रति यूनिट तय की गई है। हालांकि यह दर पहले की तुलना में कम है। पहले इसी समय के लिए उपभोक्ताओं को 5.27 रुपये प्रति यूनिट देना पड़ता था, लेकिन अब 66 पैसे प्रति यूनिट की कमी की गई है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यह वृद्धि सामान्य दर का लगभग 110 प्रतिशत ही रखी गई है, जिससे उन पर अधिक बोझ न पड़े।
सरकार की ओर से अनुदान जारी
शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 125 यूनिट से अधिक खपत पर प्रति यूनिट 7.17 रुपये की दर निर्धारित की गई है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से 3.30 रुपये प्रति यूनिट का अनुदान दिया जा रहा है। इस अनुदान के बाद उपभोक्ताओं को वास्तविक रूप से 3.87 रुपये प्रति यूनिट ही भुगतान करना होगा। इससे आम लोगों को राहत मिलेगी और बिजली बिल में अधिक वृद्धि नहीं होगी।
87 लाख से अधिक उपभोक्ताओं पर असर
यह नई व्यवस्था राज्य के लगभग 87 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं पर लागू की गई है। इससे पहले समय आधारित शुल्क प्रणाली केवल उद्योग और व्यापार से जुड़े उपभोक्ताओं के लिए लागू थी, लेकिन अब इसे घरेलू उपभोक्ताओं तक भी बढ़ा दिया गया है। बिजली कंपनी ने सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं को इस व्यवस्था में शामिल करने का प्रस्ताव दिया था, जिस पर विचार करने के बाद विद्युत नियामक आयोग ने मंजूरी दे दी।
बिजली उपयोग के तरीके में बदलाव की संभावना
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि इस नई व्यवस्था से लोग बिजली का उपयोग सोच-समझकर करेंगे और कोशिश करेंगे कि ज्यादा से ज्यादा काम दिन के समय करें, जब बिजली सस्ती है। इससे शाम के समय बिजली पर पड़ने वाला दबाव कम होगा और बिजली कटौती की समस्या में भी कमी आ सकती है। साथ ही यह व्यवस्था ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देगी और लोगों को अपने खर्च पर नियंत्रण रखने में मदद करेगी। देखा जाए तो बिहार में लागू की गई यह नई व्यवस्था उपभोक्ताओं को राहत देने के साथ-साथ बिजली आपूर्ति व्यवस्था को संतुलित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। समय के अनुसार बदलती दरों से उपभोक्ताओं को अपने उपयोग की योजना बनाने में सुविधा होगी और लंबे समय में इससे बिजली व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।