पटना में मुख्यमंत्री ने एआई समिट का किया उद्घाटन, सुस्त अधिकारियों को दी सख्त चेतावनी

  • 30 दिन में काम नहीं करने पर निलंबन की बात कही, सम्राट चौधरी का बड़ा संदेश, “बिहार लौटिए और विकास में भागीदार बनिए
  • अपराध और कानून-व्यवस्था पर सख्त रुख, पुलिस को खुली छूट देते हुए बोले- अपराधी की कोई जाति या धर्म नहीं

पटना। पटना में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को ऊर्जा सभागार में आयोजित कृत्रिम बुद्धिमत्ता सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए बिहार के विकास, प्रशासनिक जवाबदेही और कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ा संदेश दिया। सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने जहां तकनीक आधारित बिहार की नई तस्वीर पेश करने की कोशिश की, वहीं सुस्त अधिकारियों और अपराधियों को लेकर भी कड़ा रुख दिखाया। अपने संबोधन में उन्होंने साफ कहा कि जनता के काम में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को अब किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।
तकनीक आधारित बिहार बनाने पर जोर
सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार केवल इतिहास और संस्कृति की धरती नहीं है, बल्कि अब आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भी नई पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालयों की गौरवशाली परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार ने सदियों पहले दुनिया को ज्ञान दिया था और अब समय आ गया है कि राज्य तकनीकी क्रांति में भी अग्रणी भूमिका निभाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पंचायत स्तर तक तकनीक आधारित सेवाएं पहुंचाने का काम कर रही है। सरकारी योजनाओं, प्रमाण पत्रों और अन्य सेवाओं को डिजिटल माध्यम से लोगों तक पहुंचाने की प्रक्रिया तेज की जा रही है ताकि आम जनता को कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में प्रशासनिक कामकाज में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बड़ी भूमिका होगी और इससे भ्रष्टाचार तथा देरी दोनों पर नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
बिहारियों से लौटने की अपील
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने देश और विदेश में रह रहे बिहार के लोगों से भी भावनात्मक अपील की। उन्होंने कहा कि बिहार तेजी से बदल रहा है और अब राज्य के विकास में हर बिहारी की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि जो लोग बाहर रहकर काम कर रहे हैं, वे भी अपने अनुभव और ज्ञान का उपयोग बिहार के विकास के लिए कर सकते हैं। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार में अब तकनीकी क्षेत्र में नए अवसर तैयार हो रहे हैं। राज्य सरकार नवाचार आधारित उद्योगों, डिजिटल सेवाओं और आधुनिक तकनीक से जुड़े रोजगार को बढ़ावा देने पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि आने वाले वर्षों में बिहार तकनीकी क्षेत्र में नई संभावनाओं का केंद्र बन सकता है।
सुस्त अधिकारियों को सख्त चेतावनी
सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री का सबसे कड़ा संदेश प्रशासनिक अधिकारियों के लिए था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनता के काम को लटकाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने नई समयसीमा व्यवस्था की जानकारी देते हुए कहा कि यदि कोई अधिकारी दस दिनों के भीतर काम पूरा नहीं करेगा तो मुख्यमंत्री कार्यालय से पहला नोटिस भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि बीसवें दिन दूसरा नोटिस और पच्चीसवें दिन तीसरा नोटिस जारी होगा। इसके बावजूद यदि अधिकारी अपने काम में सुधार नहीं करता है तो तीस दिन पूरे होने पर उसे निलंबित कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अब जवाबदेह प्रशासन चाहती है और जनता को समय पर सेवा देना अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने “सहयोग कार्यक्रम” शुरू किया है जिसके तहत प्रशासनिक अधिकारी पंचायत स्तर तक जाकर लोगों की समस्याएं सुन रहे हैं। मुख्यमंत्री का कहना था कि सरकार अब केवल दफ्तरों में बैठकर नहीं, बल्कि गांव-गांव जाकर काम करने की नीति पर आगे बढ़ रही है।
कानून-व्यवस्था पर सख्त रुख
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई में किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को खुली छूट देते हुए कहा कि यदि कोई अपराधी पुलिस को चुनौती देता है तो उसे अड़तालीस घंटे के भीतर जवाब मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपराधी की कोई जाति या धर्म नहीं होता। अपराध करने वाला व्यक्ति केवल अपराधी होता है और उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में सुशासन और बेहतर कानून-व्यवस्था सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। अपने संबोधन में उन्होंने बिना किसी राजनीतिक दल का नाम लिए विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग तकनीक और आधुनिक व्यवस्था का विरोध करते हैं, लेकिन सरकार बिहार को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
एआई आधारित निगरानी व्यवस्था का जिक्र
मुख्यमंत्री ने पटना में लगाए गए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कैमरों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नई तकनीक की मदद से अपराधियों की पहचान करना अब पहले से कहीं आसान हो गया है। यदि किसी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान करने का निर्देश दिया जाए तो तकनीक तुरंत उसकी जानकारी उपलब्ध करा सकती है। उन्होंने कहा कि आधुनिक निगरानी व्यवस्था से अपराध नियंत्रण में मदद मिलेगी और पुलिस की कार्यक्षमता भी बढ़ेगी। मुख्यमंत्री का कहना था कि बिहार में तकनीक का उपयोग केवल विकास के लिए ही नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी किया जा रहा है।
युवाओं की भारी भीड़ से अव्यवस्था
एआई सम्मेलन में युवाओं की भारी भीड़ देखने को मिली। सभागार की क्षमता से अधिक संख्या में छात्र और युवा कार्यक्रम में पहुंच गए जिसके कारण मुख्य प्रवेश द्वार पर अव्यवस्था की स्थिति बन गई। बड़ी संख्या में लोगों को अंदर प्रवेश नहीं मिल सका, जिससे कुछ छात्रों ने नाराजगी जताई और हंगामा शुरू हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। पहली बार बिहार पुलिस के साथ निजी सुरक्षा कर्मियों की भी तैनाती की गई थी। मुख्य प्रवेश द्वार पर जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और अन्य अधिकारी लगातार व्यवस्था संभालते दिखाई दिए।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री के तीखे बयान और प्रशासनिक सख्ती के संदेश के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। एक ओर सरकार इसे विकास, तकनीक और सुशासन की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष सरकार की घोषणाओं और दावों पर सवाल उठा रहा है। हालांकि इतना तय माना जा रहा है कि बिहार सरकार अब विकास और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर अधिक आक्रामक रणनीति अपनाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री के बयान से यह संकेत भी मिला कि आने वाले समय में प्रशासनिक जवाबदेही और अपराध नियंत्रण को लेकर सरकार और सख्त कदम उठा सकती है।

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