रेस्टोरेंट बिल में गैस शुल्क जोड़ना नियमों के खिलाफ, उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की सलाह
- एलपीजी और ईंधन शुल्क के नाम पर बढ़ाई जा रही रकम, ग्राहक अधिकारों का उल्लंघन
- शिकायत के लिए हेल्पलाइन और ऑनलाइन व्यवस्था उपलब्ध, जागरूकता से ही मिलेगी राहत
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संकट और बढ़ती मांग के कारण गैस की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ा है, जिसका प्रभाव अब आम लोगों की दैनिक जिंदगी पर भी दिखाई देने लगा है। विशेष रूप से होटल और रेस्टोरेंट उद्योग में इसका असर साफ तौर पर देखा जा रहा है। कई रेस्टोरेंट अब इस स्थिति का फायदा उठाते हुए ग्राहकों के भोजन बिल में अतिरिक्त शुल्क जोड़ रहे हैं, जिन्हें गैस शुल्क, ईंधन अधिभार या ईंधन शुल्क के नाम से दर्शाया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार का अतिरिक्त शुल्क वसूलना उपभोक्ता अधिकारों के खिलाफ माना जाता है। रेस्टोरेंट के संचालन में आने वाले खर्च जैसे गैस, बिजली, कर्मचारियों का वेतन और अन्य खर्च पहले से ही भोजन की निर्धारित कीमत में शामिल होते हैं। ऐसे में बिल में अलग से गैस या ईंधन शुल्क जोड़ना अनुचित और भ्रामक व्यवहार की श्रेणी में आता है। हाल के दिनों में यह देखा गया है कि कई रेस्टोरेंट बिल में छोटे अक्षरों में इस तरह के अतिरिक्त शुल्क जोड़ देते हैं, जिन पर आमतौर पर ग्राहकों का ध्यान नहीं जाता। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी ग्राहक का बिल 500 रुपये है, तो उसमें 50 रुपये अतिरिक्त जोड़कर कुल राशि 550 रुपये कर दी जाती है। यह तरीका धीरे-धीरे ग्राहकों से अतिरिक्त धन वसूलने का माध्यम बनता जा रहा है। उपभोक्ता मामलों के जानकारों का कहना है कि इस प्रकार की वसूली न केवल अनुचित है, बल्कि यह उपभोक्ता संरक्षण कानून का भी उल्लंघन है। कानून के अनुसार किसी भी ग्राहक से छिपे हुए या अनधिकृत शुल्क नहीं लिया जा सकता। यदि कोई संस्था ऐसा करती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। ऐसी स्थिति में ग्राहकों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना आवश्यक है। यदि किसी रेस्टोरेंट के बिल में गैस या ईंधन शुल्क जैसे अतिरिक्त चार्ज दिखाई देते हैं, तो ग्राहक को तुरंत रेस्टोरेंट प्रबंधन से इसे हटाने का आग्रह करना चाहिए। ग्राहक को केवल वैध और स्पष्ट शुल्क का ही भुगतान करने का अधिकार है। यदि रेस्टोरेंट इस तरह के शुल्क को हटाने से इनकार करता है, तो ग्राहक इसके खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं। सरकार ने इसके लिए कई माध्यम उपलब्ध कराए हैं। उपभोक्ता राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के नंबर 1915 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा मोबाइल अनुप्रयोग के माध्यम से भी शिकायत दर्ज की जा सकती है। ऑनलाइन शिकायत के लिए ई-जागृति पोर्टल का उपयोग किया जा सकता है, जहां उपभोक्ता अपनी समस्या दर्ज कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त जिला प्रशासन या उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण के समक्ष भी शिकायत प्रस्तुत की जा सकती है। इन सभी माध्यमों के जरिए उपभोक्ता अपनी शिकायत को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की घटनाएं उपभोक्ताओं की जागरूकता की कमी का भी परिणाम हैं। यदि ग्राहक बिल की जांच ध्यानपूर्वक करें और किसी भी संदिग्ध शुल्क पर सवाल उठाएं, तो इस तरह की अनियमितताओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। वर्तमान समय में छोटी-छोटी बातों में भी लोगों से अतिरिक्त पैसे वसूले जाने के मामले सामने आ रहे हैं। रेस्टोरेंट बिल में गैस शुल्क जोड़ना भी उसी का एक उदाहरण है। इसलिए जरूरी है कि उपभोक्ता अपने अधिकारों को समझें और किसी भी प्रकार की अनियमितता के खिलाफ आवाज उठाएं। सरकार और संबंधित विभाग लगातार इस दिशा में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन इसके साथ ही उपभोक्ताओं की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। जागरूकता और सतर्कता के माध्यम से ही इस तरह की गलत प्रथाओं को रोका जा सकता है और उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।


