बिहार का 114वां स्थापना दिवस: गांधी मैदान में आज भव्य समापन, पापोन की प्रस्तुति से सजेगी अंतिम शाम

  • राज्यपाल करेंगे समापन, सूफियाना गायकी से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे पापोन
  • श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में भरतनाट्यम की विशेष प्रस्तुति, दूसरे दिन शान ने बांधा समां

पटना। बिहार के 114वें स्थापना दिवस समारोह का आज तीसरा और अंतिम दिन है। राजधानी के गांधी मैदान में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम का समापन आज राज्यपाल द्वारा किया जाएगा। तीन दिनों तक चले इस उत्सव में सांस्कृतिक, कलात्मक और सामाजिक गतिविधियों की विविध छटा देखने को मिली, जिसने हजारों दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया। अंतिम दिन भी बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना जताई जा रही है। समापन समारोह को खास बनाने के लिए प्रसिद्ध गायक पापोन अपनी प्रस्तुति देंगे। अपनी सूफियाना शैली और भावपूर्ण गायकी के लिए पहचाने जाने वाले पापोन के गीतों का जादू दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर देता है। उनके मंच पर आते ही माहौल संगीत और भावनाओं से सराबोर हो जाएगा। आयोजकों का मानना है कि उनकी प्रस्तुति इस समारोह को यादगार बना देगी। गांधी मैदान में चल रहे कार्यक्रम के दौरान पहले दो दिनों में भी भारी भीड़ उमड़ी। दूसरे दिन प्रसिद्ध फिल्मी गायक शान ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने अपने कार्यक्रम की शुरुआत चर्चित फिल्म डॉन के गीत ‘मैं हूं डॉन’ से की, जिसके बाद उन्होंने फिल्म फना का लोकप्रिय गीत ‘चांद सिफारिश’ गाकर वातावरण को सुरमय बना दिया। शान के हर गीत पर दर्शक झूमते और तालियां बजाते नजर आए। इस आयोजन में केवल संगीत ही नहीं, बल्कि शास्त्रीय कला का भी विशेष ध्यान रखा गया है। श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में शास्त्रीय नृत्य प्रेमियों के लिए एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया है। यहां डॉ. एन. विजायलक्ष्मी द्वारा भरतनाट्यम की विशेष प्रस्तुति दी जा रही है। यह प्रस्तुति दक्षिण भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैली भरतनाट्यम की समृद्ध परंपरा, भाव-भंगिमा और अभिव्यक्ति को मंच पर जीवंत करती है। कला प्रेमियों के लिए यह कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। समारोह के दौरान बिहार सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉल भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। इन स्टॉलों में राज्य सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों को विस्तार से प्रदर्शित किया गया है। यहां आने वाले लोग इन योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं और राज्य में हो रहे विकास कार्यों को समझने का अवसर पा रहे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार भी गांधी मैदान पहुंचे और विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने आपदा प्रबंधन से जुड़े स्टॉल का विशेष रूप से निरीक्षण किया और सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की। निशांत कुमार ने कहा कि उनके पिता ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में काफी काम किया है और इन स्टॉलों को आम जनता को जरूर देखना चाहिए, ताकि लोगों को सरकार के कार्यों की सही जानकारी मिल सके। गांधी मैदान में चल रहे इस आयोजन ने बिहार की सांस्कृतिक विविधता और विकास की झलक एक साथ प्रस्तुत की है। एक ओर जहां आधुनिक संगीत और लोकप्रिय कलाकारों की प्रस्तुति लोगों को आकर्षित कर रही है, वहीं दूसरी ओर शास्त्रीय नृत्य और पारंपरिक कलाएं भी अपनी अलग छाप छोड़ रही हैं। तीसरे और अंतिम दिन के कार्यक्रम को लेकर प्रशासन ने भी व्यापक तैयारियां की हैं, ताकि बड़ी संख्या में आने वाले दर्शकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। बिहार दिवस का यह तीन दिवसीय समारोह राज्य की समृद्ध संस्कृति, कला और विकास यात्रा का प्रतीक बनकर सामने आया है। समापन के साथ ही यह आयोजन एक यादगार अनुभव छोड़ जाएगा, जिसे लंबे समय तक लोग याद रखेंगे।

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