पंचायत व्यवस्था में बड़ा बदलाव, 24 घंटे में मिलेगा मृत्यु प्रमाणपत्र

  • डिजिटल प्रणाली और मोबाइल अनुप्रयोग से प्रक्रिया होगी तेज और पारदर्शी
  • वार्ड सदस्यों की भूमिका बढ़ेगी, श्मशान घाटों को “मोक्षधाम” के रूप में विकसित करने की योजना

पटना। बिहार की पंचायत व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है, जिससे ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अब किसी व्यक्ति की मृत्यु होने के बाद उसके परिजनों को मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पंचायती राज विभाग ने ऐसी नई व्यवस्था तैयार की है, जिसके तहत मात्र 24 घंटे के भीतर मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किया जा सकेगा। इस प्रस्ताव को जल्द ही उच्च स्तर पर मंजूरी मिलने की संभावना है, जिसके बाद इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने इस पहल की जानकारी देते हुए बताया कि विभाग प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का सहारा ले रहा है। इसके तहत एक विशेष मोबाइल अनुप्रयोग विकसित किया जाएगा, जिसके माध्यम से पंचायत स्तर पर ही मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करना संभव हो सकेगा। इस प्रणाली के जरिए पंचायत सचिव और अन्य जिम्मेदार कर्मी मृतक से संबंधित जानकारी तुरंत अपलोड कर सकेंगे और प्रमाणपत्र तत्काल उपलब्ध कराया जा सकेगा। वर्तमान व्यवस्था में ग्रामीण क्षेत्रों में मृत्यु प्रमाणपत्र जारी होने में लगभग 21 दिन तक का समय लग जाता है, जिससे परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार उन्हें बिचौलियों और दलालों के चक्कर में भी पड़ना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन समस्याओं से काफी हद तक निजात मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। नई प्रणाली में वार्ड सदस्यों की भूमिका को भी अहम बनाया गया है। विभाग की योजना के अनुसार, पंचायतों के आसपास स्थित श्मशान घाट या कब्रिस्तान के निकट रहने वाले वार्ड सदस्यों को मृतक की पहचान की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके लिए उन्हें प्रतिमाह 2000 रुपये का मानदेय देने का प्रस्ताव है। साथ ही प्रत्येक मृत्यु की पुष्टि और उससे संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने पर उन्हें अतिरिक्त 100 रुपये दिए जाने की योजना भी बनाई गई है। यदि किसी कारणवश संबंधित वार्ड सदस्य उपलब्ध नहीं होते हैं, तो इस जिम्मेदारी को किसी अन्य कर्मी को सौंपा जाएगा। मृतक की पहचान सुनिश्चित करने के लिए परिवार के सदस्यों, पड़ोसियों और गांव के अन्य लोगों से भी जानकारी ली जाएगी, ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना को न्यूनतम किया जा सके। पंचायती राज विभाग केवल मृत्यु प्रमाणपत्र प्रक्रिया को ही नहीं सुधार रहा है, बल्कि पंचायतों के बुनियादी ढांचे को भी मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसके तहत राज्य के श्मशान घाटों को “मोक्षधाम” के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है। प्रत्येक श्मशान घाट पर लगभग 19 लाख रुपये की लागत से शेड, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे अंतिम  संस्कार के दौरान लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। इसके अलावा पंचायत सरकार भवनों को भी तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की योजना है। यहां कंप्यूटरीकृत प्रणाली के माध्यम से मृत्यु प्रमाणपत्र तैयार किए जाएंगे और उन्हें मोबाइल अनुप्रयोग पर अपलोड किया जाएगा। एक बार डेटा अपलोड होने के बाद यह स्थायी रूप से सुरक्षित रहेगा, जिससे भविष्य में जरूरत पड़ने पर इसे आसानी से प्राप्त किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाएं सरल होंगी, बल्कि आम लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा। इससे सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता आएगी और भ्रष्टाचार की संभावनाओं में कमी आएगी। यह पहल ग्रामीण प्रशासन को आधुनिक और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि इसे प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो इससे लाखों लोगों को राहत मिलेगी और पंचायत स्तर पर सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिलेगा।