अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर बिहार की थाली पर, पटना में गैस संकट से महंगा हुआ खाना

  • चाय, समोसा और थाली के दाम बढ़े, होटल कारोबारियों ने बदला मेन्यू
  • गैस की कमी से जूझ रहे व्यापारी, तंदूर और कोयले के चूल्हे का सहारा

पटना। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच पिछले 21 दिनों से जारी संघर्ष का असर अब बिहार के आम लोगों की थाली तक पहुंच गया है। हजारों किलोमीटर दूर चल रहे इस युद्ध का सीधा प्रभाव रसोई गैस की आपूर्ति पर पड़ा है, जिसके कारण राज्य में गैस संकट गहराता जा रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे खाद्य कारोबारियों पर देखने को मिल रहा है, जिन्होंने मजबूरी में खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ा दिए हैं। राजधानी पटना समेत राज्य के कई हिस्सों में चाय और नाश्ते की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जो कटिंग चाय पहले 5 रुपए में मिलती थी, अब उसकी कीमत 10 रुपए हो गई है। इसी तरह 10 रुपए में मिलने वाला समोसा अब 15 रुपए में बिक रहा है। वहीं, सामान्य भोजन की थाली, जो पहले 80 रुपए में उपलब्ध थी, अब 100 से 120 रुपए तक पहुंच गई है। इससे आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। गैस संकट का सबसे अधिक असर होटल उद्योग पर पड़ा है। पटना के कई होटलों और भोजनालयों ने अपने मेन्यू में बदलाव करना शुरू कर दिया है। अब ऐसे व्यंजन तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें गैस की खपत कम हो। कई जगहों पर तंदूर, इंडक्शन चूल्हा और कोयले के चूल्हे का उपयोग बढ़ा दिया गया है। इससे गैस पर निर्भरता कम करने की कोशिश की जा रही है। होटल संचालकों का कहना है कि गैस की उपलब्धता में भारी कमी आई है। जहां पहले एक होटल को प्रतिदिन कई गैस सिलेंडर मिल जाते थे, अब केवल एक सिलेंडर ही उपलब्ध हो पा रहा है। इस कारण व्यवसाय संचालन में कठिनाई आ रही है। कई होटलों ने अपने संचालन का समय भी घटा दिया है। जो किचन पहले 24 घंटे चलते थे, अब रात 11 बजे तक ही सीमित कर दिए गए हैं। होटल उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार, कुछ महंगे व्यंजन जैसे मटन आदि बनाना फिलहाल बंद कर दिया गया है, क्योंकि इन्हें तैयार करने में अधिक गैस की आवश्यकता होती है। इसके बजाय ऐसे विकल्प अपनाए जा रहे हैं, जिनमें कम गैस लगे और जल्दी तैयार हो सकें। कई होटल अब सीमित व्यंजन ही परोस रहे हैं। हालांकि जिन प्रतिष्ठानों में पाइप के माध्यम से मिलने वाली रसोई गैस की सुविधा उपलब्ध है, वहां स्थिति अपेक्षाकृत सामान्य बनी हुई है। ऐसे होटल और मिठाई दुकानों ने अभी तक अपने खाद्य पदार्थों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। इससे स्पष्ट होता है कि गैस आपूर्ति का साधन व्यवसाय पर सीधा प्रभाव डाल रहा है। खाद्य कारोबारियों का कहना है कि वे किसी तरह वैकल्पिक साधनों के जरिए अपने व्यवसाय को चलाने की कोशिश कर रहे हैं। कई दुकानदार कोयले के चूल्हे पर खाना बना रहे हैं, जबकि कुछ ने इंडक्शन चूल्हे का सहारा लिया है। बावजूद इसके, लागत बढ़ने के कारण कीमतों में वृद्धि करना उनकी मजबूरी बन गई है। प्रशासन स्तर पर भी स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। पटना जिला प्रशासन ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के साथ बैठक कर गैस आपूर्ति को सुचारू करने का प्रयास किया है। इसके बाद सीमित मात्रा में गैस की आपूर्ति शुरू हुई है, जिससे कुछ हद तक राहत मिली है, लेकिन स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे युद्ध का असर अब स्थानीय स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। बिहार में गैस संकट ने न केवल होटल उद्योग को प्रभावित किया है, बल्कि आम जनता की दिनचर्या और खर्च पर भी असर डाला है। यदि जल्द ही गैस आपूर्ति की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में खाद्य पदार्थों की कीमतों में और वृद्धि देखने को मिल सकती है।