वैश्विक दबाव में धड़ाम हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट
- बैंकिंग, वित्तीय और वाहन क्षेत्र में सबसे ज्यादा नुकसान, बाजार में मचा हाहाकार
- कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बाजारों की गिरावट का असर
नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के बीच हड़कंप की स्थिति बन गई। वैश्विक संकेतों के दबाव में बाजार की शुरुआत ही कमजोर रही और दिनभर गिरावट का सिलसिला जारी रहा। कारोबार के दौरान बंबई शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 1700 से अधिक अंकों की गिरावट के साथ 75 हजार के स्तर के नीचे पहुंच गया, जबकि राष्ट्रीय शेयर बाजार का सूचकांक निफ्टी भी 500 अंकों से अधिक टूटकर 23 हजार के करीब आ गया। दिन की शुरुआत में ही बाजार में बिकवाली का दबाव देखने को मिला। सेंसेक्स लगभग 1900 अंकों की गिरावट के साथ खुला, जबकि निफ्टी भी करीब 600 अंकों की गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत करता दिखा। कारोबार के दौरान कुछ सुधार की कोशिश जरूर हुई, लेकिन बाजार पूरे समय दबाव में ही बना रहा। क्षेत्रीय सूचकांकों की बात करें तो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे अधिक गिरावट देखने को मिली। बैंक निफ्टी में करीब 2.70 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि वित्तीय सेवाएं सूचकांक में लगभग 2.86 प्रतिशत का नुकसान हुआ। निजी बैंक और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक दोनों में तेज गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ। वाहन क्षेत्र का सूचकांक भी लगभग 2.65 प्रतिशत तक नीचे आ गया। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में करीब 2.38 प्रतिशत और उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र में लगभग 1.80 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा धातु, औषधि, स्वास्थ्य सेवा और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं के क्षेत्रों में भी गिरावट देखी गई, जिससे बाजार का व्यापक रुख नकारात्मक बना रहा। बाजार में गिरावट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राष्ट्रीय शेयर बाजार में केवल लगभग 400 शेयर ही बढ़त में रहे, जबकि 2300 से अधिक शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स की लगभग सभी कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखे और प्रमुख बैंकिंग कंपनी एचडीएफसी बैंक सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वालों में शामिल रही। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण वैश्विक बाजारों में आई कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जबकि पश्चिम टेक्सास मध्यवर्ती कच्चा तेल भी करीब 99 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजारों की स्थिति भी कमजोर रही। अमेरिका के शेयर बाजार में रातोंरात भारी गिरावट दर्ज की गई। डॉव जोन्स औद्योगिक औसत, एसएंडपी 500 और नैस्डैक जैसे प्रमुख सूचकांक सभी नुकसान के साथ बंद हुए। इसका सीधा असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ा, जहां जापान, दक्षिण कोरिया और हांगकांग के बाजारों में भी गिरावट देखी गई। अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों को यथावत रखने के फैसले ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। उच्च मुद्रास्फीति और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं, जिसके कारण बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ा है। विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा हालात में निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि वैश्विक कारक फिलहाल बाजार की दिशा तय कर रहे हैं। आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक राजनीतिक स्थिति और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर बाजार की नजर बनी रहेगी। गुरुवार का दिन शेयर बाजार के लिए भारी गिरावट वाला रहा, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। यदि वैश्विक परिस्थितियां स्थिर नहीं होती हैं, तो बाजार में उतार-चढ़ाव का यह दौर आगे भी जारी रह सकता है।


