बिहार में बिजली दरों में बदलाव, एक अप्रैल से उपभोक्ताओं को मिल सकती बड़ी राहत
- दो स्लैब की जगह एक स्लैब व्यवस्था लागू, शहरी उपभोक्ताओं को डेढ़ रुपये तक प्रति यूनिट फायदा
- अनुदान जारी रहने पर बिल में होगी बड़ी कमी, स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को अतिरिक्त लाभ
पटना। बिहार में घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने बिजली दरों की संरचना में बदलाव करते हुए शहरी उपभोक्ताओं के लिए प्रति यूनिट लगभग डेढ़ रुपये तक की प्रभावी कमी का रास्ता साफ कर दिया है। यह नई व्यवस्था आगामी एक अप्रैल से लागू होगी और 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेगी। हालांकि उपभोक्ताओं को वास्तविक लाभ कितना मिलेगा, यह राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले अनुदान पर निर्भर करेगा। आयोग के अध्यक्ष अमीर सुबहानी ने स्पष्ट किया कि कुल दरों में कोई प्रत्यक्ष वृद्धि या कमी नहीं की गई है, बल्कि दर संरचना में परिवर्तन किया गया है। पहले जहां दो अलग-अलग स्लैब में बिजली दर लागू थी, अब उसे एक समान स्लैब में परिवर्तित कर दिया गया है। इस बदलाव से शहरी घरेलू उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट लगभग 1.53 रुपये, शहरी वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को करीब 1.20 रुपये तथा ग्रामीण वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को लगभग 42 पैसे प्रति यूनिट तक का लाभ मिलने की संभावना है। इस निर्णय से लगभग 27 लाख उपभोक्ता प्रभावित होंगे। आयोग के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही एक स्लैब व्यवस्था लागू थी, इसलिए वहां इस बदलाव का विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा। वहीं शहरी क्षेत्रों में यह परिवर्तन उपभोक्ताओं के लिए लाभकारी साबित हो सकता है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो अधिक बिजली की खपत करते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि कोई उपभोक्ता 525 यूनिट बिजली का उपयोग करता है, तो उसे पहले दो स्लैब के कारण अधिक दर से भुगतान करना पड़ता था। पहले 125 यूनिट बिजली सरकार की ओर से मुफ्त दी जाती है, जबकि शेष 400 यूनिट उच्च दर वाले स्लैब में आते थे। इस पर 8.95 रुपये प्रति यूनिट की दर लागू होती थी, जिसमें सरकार की ओर से 3.43 रुपये प्रति यूनिट का अनुदान मिलने के बाद उपभोक्ता को 5.52 रुपये प्रति यूनिट भुगतान करना पड़ता था। नई व्यवस्था के तहत अब एक समान दर 7.42 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित की गई है। यदि सरकार की ओर से 3.30 रुपये प्रति यूनिट का अनुदान जारी रहता है, तो उपभोक्ताओं को केवल 4.12 रुपये प्रति यूनिट की दर से भुगतान करना होगा। इसके अलावा यदि उपभोक्ता स्मार्ट प्रीपेड मीटर का उपयोग कर रहे हैं, तो उन्हें अतिरिक्त 25 पैसे प्रति यूनिट की छूट मिलेगी। इस प्रकार 400 यूनिट बिजली की खपत पर उपभोक्ता को करीब 660 रुपये तक की बचत हो सकती है। पहले जहां 525 यूनिट बिजली पर लगभग 2208 रुपये का ऊर्जा शुल्क देना पड़ता था, वहीं नई दर लागू होने के बाद यह घटकर लगभग 1548 रुपये रह जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली दर पहले से 7.42 रुपये प्रति यूनिट है, जिस पर राज्य सरकार 4.97 रुपये का अनुदान दे रही है। इसके बाद उपभोक्ताओं को मात्र 2.45 रुपये प्रति यूनिट की दर से भुगतान करना पड़ता है, जो पहले की तरह जारी रहेगा। इसके अलावा आयोग ने अन्य श्रेणियों में भी कुछ बदलाव किए हैं। निम्न दाब औद्योगिक श्रेणी-1 का स्थायी शुल्क 288 रुपये से घटाकर 278 रुपये कर दिया गया है, जबकि निम्न दाब औद्योगिक श्रेणी-2 का स्थायी शुल्क 360 रुपये से घटाकर 350 रुपये किया गया है। मशरूम की खेती को अब कृषि कनेक्शन की श्रेणी में शामिल किया गया है, जिससे किसानों को राहत मिलेगी। साथ ही ऑक्सीजन उपयोगकर्ताओं को औद्योगिक श्रेणी में शामिल किया गया है और 10 किलोवाट से अधिक के उपभोक्ताओं को समय आधारित दर प्रणाली का लाभ मिलेगा, हालांकि इसमें कृषि कनेक्शन शामिल नहीं होंगे। बिहार विद्युत विनियामक आयोग का यह फैसला उपभोक्ताओं को राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि राज्य सरकार अनुदान व्यवस्था को जारी रखती है, तो आने वाले समय में लाखों उपभोक्ताओं के बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी देखने को मिल सकती है।


