आपदा में अवसर तलाश लेता है साइबर ठग: डीएसपी
पटना। डिजिटल युग में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों के खतरे को देखते हुए पटना में एक वृहद साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।इस कार्यक्रम का आयोजन विश्व युवक केंद्र एवं प्रेम यूथ फाउंडेशन के माध्यम से पटना साइबर थाना द्वारा किया गया, जिसमें पटना साइबर सेल डीएसपी नीतीश चन्द्र धारियां विशेष रूप से उपस्थित रहे । कार्यक्रम में एनजीओ के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और साइबर अपराध जैसे गंभीर व समसामयिक विषय पर गहन संवाद किया गया।कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को यह समझाना था कि साइबर अपराध केवल तकनीक से नहीं, बल्कि डर और लालच जैसी मानवीय कमजोरियों का फायदा उठाकर अंजाम दिए जाते हैं। साइबर सेल की टीम के उन सदस्यों ने, जो प्रतिदिन जमीनी स्तर पर साइबर अपराध से जुड़ी चुनौतियों से जूझते हैं, अपने वास्तविक अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि किस प्रकार आम नागरिक, विशेषकर युवा वर्ग, थोड़ी सी असावधानी के कारण साइबर ठगों के जाल में फँस जाते हैं और किस तरह समय रहते सतर्कता बरतकर बड़े आर्थिक और मानसिक नुकसान से बचा जा सकता है। कार्यक्रम में यह संदेश स्पष्ट रूप से दिया गया कि सतर्कता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। छात्रों को मोबाइल और कंप्यूटर सिस्टम को नियमित रूप से अपडेट रखने, एंटीवायरस के माध्यम से लगातार स्कैन करने, अनजान एपीके फाइल या संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करने, प्राइवेसी और एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स को ऑन रखने तथा सुरक्षित ब्राउज़िंग आदतें अपनाने के लिए जागरूक किया गया। साथ ही यह भी बताया गया कि भले ही वॉच हिस्ट्री बंद कर दी जाए, फिर भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गतिविधियों की निगरानी संभव है, क्योंकि आज के दौर में डेटा ही सबसे बड़ा ईंधन बन चुका है। साइबर विशेषज्ञों ने चेताया कि इसी कारण साइबर अपराध अब एक संगठित पेशा बनता जा रहा है, जिसमें डिजिटल अरेस्ट, डीपफेक, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और यहां तक कि साइबर आतंकवाद जैसी गंभीर चुनौतियाँ सामने आ रही हैं। ऐसे में युवाओं का जागरूक होना समय की सबसे बड़ी जरूरत है ।इस अवसर पर अधिवक्ता रणविजय सिंह ने छात्रों को संबोधित करते हुए साइबर क्राइम से जुड़ी वास्तविक घटनाओं का उल्लेख किया और उनसे बचने के व्यावहारिक उपाय बताए। उन्होंने लोगो से डर और लालच को त्यागने का सलाह दिया है । फाउंडेशन के संस्थापक गांधीवादी प्रेम जी ने ऐसे कार्यक्रमों को समय की आवश्यकता बताते हुए छात्रों से जागरूक, जिम्मेदार और संवेदनशील डिजिटल नागरिक बनने की अपील की।साथ ही छात्रों को यह भी जानकारी दी गई कि किसी भी साइबर अपराध की स्थिति में तुरंत cybercrime.gov.in पर शिकायत करें और साइबर थाना या नजदीकी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराएँ। इसके अलावा बिहार पुलिस के आर्थिक अपराध इकाई के टोल-फ्री नंबर 1930 पर तुरंत कॉल कर वित्तीय नुकसान को रोका जा सकता है। कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण संदेश सामुदायिक पुलिस रहा, जिसमें यह बताया गया कि साइबर अपराध से लड़ाई केवल पुलिस की नहीं, बल्कि हर जागरूक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। जब समाज स्वयं सतर्क होगा और हर नागरिक की भूमिका निभाएगा, तभी साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। मौके पर विश्व युवक केंद्र दिल्ली के प्रोग्राम ऑफिसर, पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता रणविजय सिंह, एनजीओ हेल्पलाइन के निदेशक सीए संजय कुमार झा , केशव कुणाल, प्रियंका शील, पुष्पांजलि, पुष्पलता , स्नेहा , रजनीश, सुधांशु , सुजीत समेत दो सौ से अधिक लोगो ने भाग लिया।


