ईरान पर हमले को लेकर ट्रंप का बचाव, कहा- वैश्विक सुरक्षा के लिए जरूरी था सैन्य अभियान
- परमाणु हथियारों से रोकने के लिए उठाया कदम, अन्य देशों से समुद्री मार्ग सुरक्षित रखने की अपील
- यूरोपीय देशों ने मांगी स्पष्टता, होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा अंतरराष्ट्रीय तनाव
नई दिल्ली। ईरान पर हुए सैन्य हमले को लेकर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सफाई देते हुए कहा है कि यह कार्रवाई वैश्विक सुरक्षा के हित में बेहद आवश्यक थी। उन्होंने दावा किया कि इस अभियान के बाद ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हो गई है और अब वह परमाणु हथियार बनाने के बारे में सोच भी नहीं पाएगा। ट्रंप ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए अनिवार्य था। ट्रंप ने कहा कि उन्हें युद्ध पसंद नहीं है, लेकिन ईरान की सरकार की गतिविधियां अत्यंत गंभीर थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ने हाल ही में हजारों प्रदर्शनकारियों को मौत के घाट उतार दिया, जो मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ईरान के पास परमाणु हथियार होता, तो वह बहुत कम समय में उसका इस्तेमाल कर सकता था, जिससे पूरे मध्य एशिया में भारी तबाही हो सकती थी। अमेरिकी नेतृत्व का मानना है कि इस सैन्य अभियान से न केवल अमेरिका बल्कि पूरे विश्व को लाभ हुआ है। ट्रंप ने कहा कि यह कार्रवाई केवल राष्ट्रीय हित के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए की गई है। उन्होंने अन्य देशों से भी इस दिशा में सहयोग की अपील की है। इस बीच व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि ईरान को निरस्त्र करने के प्रयास से पश्चिमी देशों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा लंबे समय से पश्चिमी देशों के बीच सहमति का विषय रहा है। लीविट ने अन्य देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित और खुला बनाए रखने के लिए अमेरिका के साथ सहयोग करने का आग्रह किया, ताकि ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो सके। ट्रंप ने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसे देशों से अपील की है कि वे इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए अपने युद्धपोत तैनात करें। उनका कहना है कि ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का प्रयास वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए खतरा बन सकता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। हालांकि इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों ने इस मामले पर चर्चा के लिए बैठक की। इस दौरान जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने कहा कि अमेरिका और इजराइल को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनके सैन्य उद्देश्यों को हासिल करने में कितना समय लगेगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में अधिक पारदर्शिता और स्पष्टता की आवश्यकता है। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस मुद्दे पर सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलती है, तो इसका असर उत्तर अटलांटिक संधि संगठन के भविष्य पर भी पड़ सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि सहयोग की कमी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर कर सकती है। इस घटनाक्रम के बाद वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ गया है और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंता गहरा गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति में और तेजी आने की संभावना है।


