सरकारी स्कूलों में 12 मार्च से वार्षिक परीक्षा, पारदर्शिता के लिए बाहरी वीक्षक और सख्त नियम लागू

पटना। बिहार के सरकारी विद्यालयों में कक्षा एक से आठवीं तक के विद्यार्थियों की वार्षिक परीक्षा 12 मार्च से शुरू होने जा रही है। यह परीक्षा 19 मार्च तक चलेगी। परीक्षा को निष्पक्ष, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। शिक्षा विभाग का उद्देश्य है कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता या कदाचार की संभावना न रहे और छात्र-छात्राएं ईमानदारी से परीक्षा दे सकें। परीक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य स्तर से विशेष तैयारी की गई है। इस बार परीक्षा के दौरान निगरानी व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जाएगा। परिषद ने सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि परीक्षा के संचालन में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नई व्यवस्था लागू की जाए। इसके तहत एक विद्यालय के शिक्षक दूसरे विद्यालय में जाकर वीक्षण कार्य करेंगे, ताकि परीक्षा के दौरान किसी प्रकार का पक्षपात या अनुचित सहयोग की स्थिति उत्पन्न न हो।
बाहरी वीक्षक व्यवस्था से बढ़ेगी पारदर्शिता
शिक्षा विभाग ने परीक्षा के दौरान पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। इस बार किसी भी विद्यालय में उसी विद्यालय के शिक्षक परीक्षा कक्ष में वीक्षक के रूप में तैनात नहीं होंगे। इसके स्थान पर प्रखंड स्तर पर एक विद्यालय के शिक्षक को दूसरे विद्यालय में भेजा जाएगा। इसे बाहरी वीक्षक व्यवस्था कहा जा रहा है। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से परीक्षा की विश्वसनीयता बढ़ेगी और छात्रों को निष्पक्ष माहौल मिलेगा। जब किसी विद्यालय के शिक्षक दूसरे विद्यालय में वीक्षण करेंगे तो किसी भी प्रकार की पक्षपातपूर्ण स्थिति की संभावना कम हो जाएगी। इससे छात्र भी अधिक गंभीरता और ईमानदारी के साथ परीक्षा देंगे।
बैठने की व्यवस्था में दूरी अनिवार्य
राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद ने परीक्षा कक्ष की व्यवस्था को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों को बैठाने के लिए विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। निर्देश के अनुसार एक बेंच पर बैठने वाले दो छात्रों के बीच कम से कम दो फीट की दूरी रखना अनिवार्य होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि परीक्षा के दौरान नकल जैसी गतिविधियों को रोका जा सके और परीक्षा का माहौल अनुशासित बना रहे। विद्यालय प्रशासन को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि परीक्षा शुरू होने से पहले ही बैठने की पूरी व्यवस्था तैयार कर ली जाए।
परीक्षा कक्ष में सीमित सामग्री की अनुमति
परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों को केवल आवश्यक सामग्री ही अपने साथ लाने की अनुमति होगी। छात्र पेंसिल, रबर, नुकीला बनाने वाला उपकरण, पेन और ज्यामिति बॉक्स ही अपने साथ ला सकेंगे। इसके अलावा किसी भी प्रकार की अतिरिक्त सामग्री परीक्षा कक्ष में ले जाने की अनुमति नहीं होगी। यदि किसी छात्र को प्रश्न समझने में कठिनाई होती है तो वीक्षक उन्हें प्रश्न का अर्थ समझा सकते हैं, लेकिन किसी भी परिस्थिति में उत्तर बताने की अनुमति नहीं होगी। इसका उद्देश्य यह है कि छात्रों को प्रश्नों को समझने में सहायता मिले, लेकिन परीक्षा की निष्पक्षता भी बनी रहे।
समय संबंधी नियम भी तय
परीक्षा के दौरान अनुशासन बनाए रखने के लिए समय से संबंधित नियम भी तय किए गए हैं। परीक्षा शुरू होने के एक घंटे बाद ही छात्रों को शौचालय जाने की अनुमति दी जाएगी। इससे पहले किसी भी छात्र को परीक्षा कक्ष से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी। इस नियम का उद्देश्य यह है कि परीक्षा के दौरान अनावश्यक आवाजाही को रोका जा सके।
परीक्षा के बीच भी जारी रहेगी मध्याह्न भोजन योजना
विद्यालयों में संचालित मध्याह्न भोजन योजना को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा विभाग ने कहा है कि परीक्षा के दौरान भी यह योजना बंद नहीं की जाएगी। यानी परीक्षा के बावजूद विद्यार्थियों को पहले की तरह भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। इससे बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन विद्यालय के बाहर
परीक्षा समाप्त होने के बाद उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया भी निर्धारित कर दी गई है। कक्षा तीन से आठवीं तक के विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच विद्यालय परिसर में नहीं होगी। इसके बजाय संकुल संसाधन केंद्र पर मूल्यांकन किया जाएगा। यह मूल्यांकन 19 मार्च से 24 मार्च के बीच पूरा किया जाएगा। हालांकि 21 मार्च को ईद-उल-फितर और 22 मार्च को बिहार दिवस के कारण इन दो दिनों में मूल्यांकन कार्य नहीं होगा। परिषद ने निर्देश दिया है कि अधिकतम चार कार्यदिवस के भीतर मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। मूल्यांकन के बाद विद्यार्थियों के परिणाम को मूल्यांकन पंजी में दर्ज किया जाएगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस नई व्यवस्था से परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनेगी।
शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की पहल
शिक्षा विभाग का कहना है कि इन सभी व्यवस्थाओं का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाना है। परीक्षा और मूल्यांकन की पारदर्शी व्यवस्था से न केवल विद्यार्थियों का विश्वास बढ़ेगा बल्कि समय पर परिणाम घोषित करना भी आसान होगा। विभाग को उम्मीद है कि इस बार की परीक्षा प्रक्रिया बेहतर ढंग से संपन्न होगी और विद्यार्थियों को निष्पक्ष वातावरण में अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिलेगा।

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