तेजस्वी को समर्थन नहीं करेगी ओवैसी की पार्टी, कहा- हमारा उम्मीदवार राज्यसभा जाएगा तभी फैसला लेंगे
पटना। बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। संभावित उम्मीदवारों और समर्थन के गणित को लेकर सभी दलों में मंथन का दौर जारी है। इसी बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने महागठबंधन को समर्थन देने के सवाल पर अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। पार्टी ने संकेत दिया है कि समर्थन का फैसला उसके उम्मीदवार को राज्यसभा भेजे जाने की स्थिति में ही लिया जाएगा।
अख्तरुल इमान का स्पष्ट संदेश
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अख्तरुल इमान ने सोमवार को कहा कि इस मुद्दे पर बातचीत जारी है और अभी कुछ भी अंतिम नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि इस विषय पर उनकी बातचीत नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से हो चुकी है। अख्तरुल इमान ने कहा कि उनकी पार्टी की राज्यसभा में कोई सदस्य नहीं है। ऐसे में उन्होंने तेजस्वी यादव से साफ कहा है कि यदि महागठबंधन एआईएमआईएम का समर्थन चाहता है, तो पार्टी का एक प्रतिनिधि राज्यसभा भेजा जाए। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव पर निर्णय लेना तेजस्वी यादव और उनके सहयोगियों पर निर्भर है।
समर्थन पर अभी नहीं बना अंतिम फैसला
अख्तरुल इमान ने स्पष्ट किया कि महागठबंधन को समर्थन देने या न देने को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि बातचीत चल रही है और चर्चा पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई है और आगे की दिशा जल्द तय होगी। उनके इस बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि एआईएमआईएम बिना शर्त समर्थन देने के मूड में नहीं है और वह अपनी राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करना चाहती है।
एनडीए को समर्थन से इनकार
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को समर्थन देने के सवाल पर अख्तरुल इमान ने दो टूक शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी किसी भी परिस्थिति में एनडीए का समर्थन नहीं करेगी। उन्होंने दावा किया कि एनडीए के भीतर ही कई तरह की खींचतान चल रही है और कुछ सीटों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि पांच तारीख तक तस्वीर साफ हो सकती है कि कौन उम्मीदवार होगा और एआईएमआईएम आगे क्या रुख अपनाएगी।
तेजस्वी के नाम की चर्चा
इस बीच राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव के स्वयं राज्यसभा चुनाव लड़ने की चर्चाएं भी तेज हैं। हालांकि उन्होंने अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। रविवार को उन्होंने अपने विधायक दल की बैठक भी बुलाई थी, जिससे अटकलों को और बल मिला है। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है। वर्तमान में राजद के पास 25 विधायक हैं। महागठबंधन में शामिल कांग्रेस के 6, वाम दलों के 3 और एक अन्य सहयोगी दल के 1 विधायक को मिलाकर यह संख्या 35 तक पहुंचती है। ऐसे में बहुमत के लिए एआईएमआईएम के 5 और बहुजन समाज पार्टी के 1 विधायक का समर्थन निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
गणित और रणनीति पर टिकी नजर
राज्यसभा चुनाव में अंकगणित बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में हर दल अपने समर्थन का रणनीतिक इस्तेमाल करना चाहता है। एआईएमआईएम की स्थिति इस समय निर्णायक मानी जा रही है। पार्टी अपने प्रतिनिधित्व की मांग को लेकर स्पष्ट है और बिना ठोस आश्वासन के समर्थन देने के पक्ष में नहीं दिख रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण होंगे। यदि महागठबंधन एआईएमआईएम की शर्त मान लेता है तो समीकरण बदल सकते हैं। वहीं यदि समझौता नहीं होता है तो चुनाव में अप्रत्याशित परिणाम भी सामने आ सकते हैं। फिलहाल बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। सभी दल अंतिम रणनीति तय करने में जुटे हैं और पांच तारीख को संभावित उम्मीदवारों की घोषणा के बाद तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकती है।


