February 24, 2026

मांझी ने की राज्यसभा सीट की मांग, कहा- हमें वादा किया गया था, चुनाव को लेकर बढ़ी हलचल

पटना। बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने समीकरण मजबूत करने में जुट गए हैं। इसी बीच केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री और हम पार्टी के प्रमुख जीतन राम मांझी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन नेतृत्व को पुराने वादे की याद दिलाते हुए राज्यसभा की एक सीट पर अपनी दावेदारी जताई है। मांझी के इस बयान के बाद गठबंधन की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है। मीडिया से बातचीत करते हुए जीतन राम मांझी ने कहा कि गठबंधन के घटक दल के रूप में उन्हें पहले ही दो लोकसभा सीट और एक राज्यसभा सीट देने का आश्वासन दिया गया था। उन्होंने कहा कि वे फिलहाल अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं और उन्हें विश्वास है कि गठबंधन नेतृत्व अपने वादे का सम्मान करेगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी ओर से औपचारिक रूप से कोई मांग प्रस्तुत नहीं की गई है। उनके इस बयान को राज्यसभा चुनाव से पहले दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इन सीटों पर वर्तमान में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के तीन और महागठबंधन के दो सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। जिन सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें रामनाथ ठाकुर, हरिवंश नारायण सिंह, उपेंद्र कुशवाहा, प्रेमचंद्र गुप्ता और अमरेंद्रधारी सिंह शामिल हैं। इन सीटों पर नए उम्मीदवारों के चयन को लेकर राजनीतिक दलों के भीतर गहन विचार-विमर्श जारी है। विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के अनुसार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पास 202 विधायक हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों का समर्थन आवश्यक होता है। इस आधार पर पांचों सीटें जीतने के लिए 205 विधायकों का समर्थन जरूरी है। हालांकि गठबंधन को पूर्ण बहुमत से थोड़ा कम समर्थन प्राप्त है, जिससे सहयोगी दलों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर एक प्रारंभिक फार्मूले पर चर्चा चल रही है, जिसमें दो सीटें भारतीय जनता पार्टी, दो सीटें जनता दल यूनाइटेड और एक सीट सहयोगी दलों को दिए जाने की संभावना है। सहयोगी दलों में हम पार्टी के अलावा लोक जनशक्ति पार्टी और अन्य दल भी अपनी दावेदारी प्रस्तुत कर रहे हैं। उपेंद्र कुशवाहा को भी राज्यसभा के संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी ओर महागठबंधन भी अपने स्तर पर रणनीति बनाने में जुटा हुआ है। महागठबंधन के पास फिलहाल 35 विधायक हैं। यदि उन्हें एआईएमआईएम के पांच और बहुजन समाज पार्टी के एक विधायक का समर्थन मिलता है, तो विपक्ष एक सीट जीतने की स्थिति में आ सकता है। इस दिशा में राष्ट्रीय जनता दल और उसके सहयोगी दल सक्रिय रूप से प्रयास कर रहे हैं। हालांकि एआईएमआईएम ने समर्थन के लिए कुछ शर्तें रखी हैं, जिससे विपक्ष की रणनीति पर भी सबकी नजर बनी हुई है। इस बीच जीतन राम मांझी ने राज्य की शराबबंदी नीति पर भी टिप्पणी करते हुए इसके क्रियान्वयन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि शराबबंदी कानून अपने आप में सही है, लेकिन इसका प्रभावी ढंग से पालन नहीं हो पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमीर लोग महंगी शराब का सेवन कर रहे हैं, जबकि गरीब लोग सस्ती और जहरीली शराब का शिकार हो रहे हैं। मांझी ने यह भी कहा कि कानूनी कार्रवाई में अधिकतर गरीब ही फंसते हैं, जबकि शराब तस्कर अवैध कारोबार से लाभ कमा रहे हैं। उन्होंने इस कानून की समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। राज्यसभा चुनाव से पहले बिहार की राजनीति में बढ़ती गतिविधियों से यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों के बीच बातचीत और रणनीतिक बैठकों का दौर तेज होगा। सीटों के बंटवारे और उम्मीदवारों के चयन को लेकर अंतिम निर्णय राष्ट्रीय और राज्य स्तर के नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा। फिलहाल सभी दल अपने-अपने हितों को ध्यान में रखते हुए रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं और राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है।

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