February 23, 2026

पटना में होगी डिजिटल जनगणना, तैयारी तेज, 4461 कर्मियों की हुई तैनाती

पटना। बिहार की राजधानी पटना में आगामी जनगणना को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से कराई जाएगी, जिसके लिए पटना नगर निगम ने अपने सभी अंचलों में कुल 4461 कर्मियों की तैनाती का निर्णय लिया है। नगर निगम प्रशासन ने अंचलवार जनगणना कार्य में लगे प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की विस्तृत सूची तैयार कर ली है। अधिकारियों का दावा है कि तकनीक के उपयोग से इस बार आंकड़ों की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।
अंचलवार तैनाती की पूरी रूपरेखा तैयार
नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न अंचलों में जनगणना कार्य का बोझ अलग-अलग रहेगा। सबसे अधिक कर्मियों की तैनाती पाटलिपुत्र अंचल में की गई है, जहां 1079 प्रगणक और पर्यवेक्षक लगाए जाएंगे। इसके विपरीत पटना सिटी अंचल में सबसे कम 445 कर्मियों की नियुक्ति होगी। अन्य अंचलों की बात करें तो नूतन राजधानी अंचल में 806, कंकड़बाग में 725, बांकीपुर में 652 और अजीमाबाद में 753 कर्मियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन सभी अंचलों में संबंधित कार्यपालक पदाधिकारी को चार्ज अधिकारी बनाया गया है, जो पूरे कार्य की निगरानी करेंगे। प्रशासन का कहना है कि क्षेत्रवार जनसंख्या और भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह वितरण किया गया है।
प्रशिक्षण के लिए 58 फील्ड ट्रेनर नियुक्त
डिजिटल जनगणना को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए 58 फील्ड ट्रेनर नियुक्त किए गए हैं। जिला प्रशासन के निर्देश पर स्कूलों के वरिष्ठ शिक्षकों को यह जिम्मेदारी दी गई है। ये प्रशिक्षक जनगणना कर्मियों और पर्यवेक्षकों को टैबलेट के उपयोग, आंकड़ा प्रविष्टि की प्रक्रिया और क्षेत्र में आने वाली संभावित चुनौतियों से निपटने का प्रशिक्षण देंगे। जिला स्तर पर विशेष कार्यशाला आयोजित करने की भी तैयारी है। इन कार्यशालाओं में डिजिटल प्रणाली की बारीकियों से अवगत कराया जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार की तकनीकी त्रुटि से बचा जा सके। प्रशासन का उद्देश्य है कि जनगणना का कार्य निर्धारित समय सीमा में और बिना किसी गड़बड़ी के पूरा हो।
तकनीक आधारित होगी पूरी प्रक्रिया
इस बार जनगणना पूरी तरह तकनीक आधारित होगी। प्रत्येक कर्मी को एक टैबलेट उपलब्ध कराया जाएगा, जिसमें विशेष कोड और स्थान आधारित लिंक सक्रिय रहेगा। यदि कोई कर्मी निर्धारित क्षेत्र से बाहर जाकर जानकारी दर्ज करने की कोशिश करेगा तो प्रणाली तुरंत चेतावनी देगी।जियो-फेंसिंग तकनीक के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रत्येक जानकारी उसी क्षेत्र से दर्ज हो, जहां कर्मी को नियुक्त किया गया है। इससे आंकड़ों में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या गलत प्रविष्टि की संभावना समाप्त हो जाएगी। प्रशासन का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय बनेगी।
समय की बचत और सटीक आंकड़ों की उम्मीद
डिजिटल प्रणाली के उपयोग से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि आंकड़ों की सटीकता भी बढ़ेगी। पहले कागजी प्रक्रिया में आंकड़ों के संकलन और संकलन के बाद उनके मिलान में काफी समय लगता था। अब सीधे टैबलेट के माध्यम से आंकड़े केंद्रीय प्रणाली में दर्ज हो जाएंगे, जिससे प्रक्रिया तेज होगी। प्रशासन का कहना है कि सटीक और अद्यतन आंकड़े शहर की आधारभूत सुविधाओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, स्वच्छता और यातायात जैसी योजनाओं के लिए विश्वसनीय डेटा उपलब्ध होगा। यही आंकड़े भविष्य की नीतियों और बजट निर्धारण का आधार बनेंगे।
शहरी विकास योजनाओं को मिलेगा बल
पटना तेजी से विस्तार कर रहा है। ऐसे में जनसंख्या, आवासीय ढांचे और संसाधनों की वास्तविक स्थिति का आकलन आवश्यक है। डिजिटल जनगणना से यह स्पष्ट होगा कि किस क्षेत्र में कितनी आबादी है, किन इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है और कहां अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता है। नगर निगम प्रशासन का मानना है कि इस प्रक्रिया से शहरी नियोजन को मजबूती मिलेगी। नए विद्यालय, स्वास्थ्य केंद्र, सड़कें और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं विकसित करने में यह आंकड़े सहायक होंगे। इसके साथ ही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सही पात्रों तक पहुंचाने में भी सुविधा होगी।
पारदर्शिता पर विशेष जोर
इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। डिजिटल माध्यम से आंकड़ा संग्रहण के कारण किसी भी स्तर पर हेरफेर की संभावना न्यूनतम होगी। जियो-फेंसिंग और विशेष कोड प्रणाली से हर प्रविष्टि की निगरानी संभव होगी। अधिकारियों का कहना है कि पटना में पहली बार इतने व्यापक स्तर पर डिजिटल जनगणना की जा रही है। इसे सफल बनाने के लिए प्रशासन और नगर निगम संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं। आने वाले दिनों में प्रशिक्षण और तकनीकी परीक्षण की प्रक्रिया तेज की जाएगी। पटना में डिजिटल जनगणना की यह पहल शहर के प्रशासनिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि यह प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी होती है, तो भविष्य में अन्य नगर निकायों के लिए भी यह मॉडल बन सकती है।

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