January 30, 2026

आरबीआई ने बेसिक रेपो रेट में की कटौती, बैठक में घोषणा, कम होगी ईएमआई

नई दिल्ली। भारतीय रिज़र्व बैंक ने देश की मौद्रिक नीति पर एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती कर दी है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार सुबह मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक के बाद यह घोषणा की। इसी के साथ रेपो रेट 5.50 प्रतिशत से घटकर 5.25 प्रतिशत पर आ गया है। यह फैसला उन लोगों के लिए राहत लेकर आया है जो होम लोन, कार लोन या अन्य कर्जों पर निर्भर हैं, क्योंकि आने वाले दिनों में उनकी ईएमआई कम हो जाएगी।
आर्थिक परिस्थितियों के बीच लिया गया फैसला
एमपीसी की यह बैठक ऐसे समय में हुई जब देश की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है। महंगाई दर पिछले कई महीनों से लगातार नीचे जा रही है और यह सरकार द्वारा तय की गई सीमा से भी कम स्तर पर है। साथ ही देश की जीडीपी वृद्धि दर उम्मीद से अधिक 8.2 प्रतिशत दर्ज की गई है। हालांकि, इसी दौरान भारतीय रुपये ने डॉलर के मुकाबले 90 रुपये का स्तर छू लिया है, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। इन तमाम परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आरबीआई ने ब्याज दर में कटौती को उचित माना। विशेषज्ञों का भी यही अनुमान था कि खुदरा महंगाई के घटने से ब्याज दर कम करने की गुंजाइश बनी है। कुछ विशेषज्ञों ने दर स्थिर रहने की उम्मीद जताई थी, लेकिन अंततः एमपीसी ने सर्वसम्मति से रेपो रेट घटाने का निर्णय लिया।
रेपो रेट में कटौती का सीधा असर
रेपो रेट वह दर है जिस पर बैंक आरबीआई से कर्ज लेते हैं। जब यह दर घटती है तो बैंकों को कम ब्याज पर धन उपलब्ध होता है और वे अपने ग्राहकों को भी कम ब्याज पर कर्ज दे पाते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को मिलता है जिनके पास होम लोन, वाहन लोन या अन्य लंबे समय के कर्ज हैं। इस कटौती के बाद आने वाले समय में बैंकों द्वारा नई ईएमआई संरचना लागू किए जाने की उम्मीद है, जिससे लाखों ग्राहकों का आर्थिक बोझ कम होगा।
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बदला जीडीपी अनुमान
आरबीआई ने अपनी नीतिगत घोषणा के दौरान देश की आर्थिक वृद्धि को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि अनुमान को पहले के 7.0 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे साफ है कि आरबीआई आने वाले महीनों में अर्थव्यवस्था के और मजबूत होने की संभावना देख रहा है। इसके अलावा वित्त वर्ष 2026 के लिए भी जीडीपी अनुमान को 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया गया है। यह बाजार और निवेशकों के लिए उत्साहजनक संकेत हैं।
मुद्रास्फीति अनुमान में भी सुधार
आरबीआई ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति (सीपीआई) में घटती प्रवृत्ति को देखते हुए अनुमान को 3.1 प्रतिशत से घटाकर 2.6 प्रतिशत कर दिया है। सरकार ने आरबीआई को निर्देश दिया है कि खुदरा मुद्रास्फीति 4 प्रतिशत के लक्ष्य के आसपास रहनी चाहिए और इसमें दो प्रतिशत ऊपर-नीचे की गुंजाइश रहेगी। महंगाई कम होने का सीधा अर्थ है कि लोगों की क्रय शक्ति बढ़ती है और साथ ही ब्याज दरों में कटौती की अधिक संभावना बनती है।
पिछली नीतियों की समीक्षा
इस वर्ष फरवरी से अब तक आरबीआई ने चार बैठकों में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की है। हालांकि, पिछले दो महीनों से रेपो रेट 5.50 प्रतिशत पर स्थिर रखी गई थी। अक्टूबर की बैठक में रेपो रेट और नीति रुख दोनों ही अपरिवर्तित रहे थे। गवर्नर संजय मल्होत्रा पहले ही संकेत दे चुके थे कि ब्याज दरों में और कटौती की गुंजाइश है। इसी क्रम में यह फैसला लिया गया है।
प्रभाव और आगे की राह
आरबीआई का यह कदम न सिर्फ बाजार को सकारात्मक संदेश देता है, बल्कि निवेश और उपभोग दोनों को बढ़ावा देता है। ब्याज दर में कटौती से उपभोक्ता खर्च बढ़ता है, जिससे बाजार में मांग बढ़ती है और आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं। आने वाले महीनों में महंगाई, वैश्विक बाजार, भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर-रुपया स्थिति को देखते हुए आरबीआई अपनी नीतियों में और बदलाव कर सकता है। फिलहाल, इसका सबसे सीधा लाभ आम लोगों को मिलेगा, जो कम ब्याज दरों का फायदा उठाते हुए अपनी ईएमआई का बोझ कम कर सकेंगे।

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