जहानाबाद के डीएसपी के पटना समेत 3 ठिकानों पर एसवीयू की छापेमारी, मचा हडकंप, अवैध संपत्ति मामले में एफआईआर

पटना। शुक्रवार को बिहार पुलिस महकमे में उस समय हलचल मच गई, जब स्पेशल विजिलेंस यूनिट (एसवीयू) ने जहानाबाद के डीएसपी संजीव कुमार के तीन ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की। यह कार्रवाई जहानाबाद, पटना और खगड़िया में की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, संजीव कुमार पर भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति के आरोप
एसवीयू की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि डीएसपी संजीव कुमार ने अपनी वैध आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की है। आरोप है कि उन्होंने माफिया तत्वों के साथ मिलकर अवैध तरीके से करोड़ों रुपये की कमाई की। जांच में यह भी पाया गया कि उनकी घोषित आमदनी के मुकाबले लगभग 1.52 करोड़ रुपये की संपत्ति अधिक पाई गई है। यह राशि उनकी वार्षिक वेतन और अन्य वैध आय स्रोतों से कहीं अधिक है, जो गंभीर अनियमितताओं की ओर इशारा करती है।
एफआईआर और कानूनी प्रक्रिया
इस मामले में एसवीयू ने अपने ही निगरानी थाने में केस दर्ज किया है। पुख्ता सबूतों के आधार पर कोर्ट से छापेमारी वारंट लिया गया। इसके बाद तीनों जिलों में अलग-अलग टीमों को भेजा गया। सभी टीमें एक ही समय पर संबंधित ठिकानों पर पहुंचीं और तलाशी अभियान शुरू किया।
कार्रवाई का दायरा और प्रभाव
छापेमारी की कार्रवाई के दौरान डीएसपी के आवास और कार्यालय सहित कई ठिकानों की तलाशी ली जा रही है। अभी यह प्रक्रिया शुरुआती चरण में है, इसलिए जब्ती और बरामदगी से जुड़ी आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि दोपहर बाद तक कुछ ठोस जानकारी मिलने की संभावना है। कार्रवाई की गंभीरता को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि जब्ती की सूची लंबी हो सकती है।
सूत्रों के दावे और जांच एजेंसी की रणनीति
जांच एजेंसी के पास पहले से कई ऐसे दस्तावेज और सबूत मौजूद थे, जिनके आधार पर डीएसपी के खिलाफ यह कार्रवाई की गई। सूत्र बताते हैं कि संजीव कुमार की संदिग्ध गतिविधियों और माफिया नेटवर्क से संबंधों पर लंबे समय से नजर रखी जा रही थी। इनकी संपत्ति और आय के बीच बड़े अंतर को प्रमाणित करने के बाद ही एसवीयू ने अदालत से सर्च वारंट हासिल किया।
बिहार पुलिस महकमे में हलचल
इस छापेमारी ने बिहार पुलिस विभाग में हड़कंप मचा दिया है। एक उच्च पदस्थ पुलिस अधिकारी के खिलाफ इस तरह की सीधी कार्रवाई से विभाग के भीतर भी चर्चा का माहौल है। कई अधिकारी इसे निगरानी तंत्र की सख्ती और पारदर्शिता की दिशा में एक अहम कदम मान रहे हैं।
भविष्य की कार्रवाई और संभावनाएं
छापेमारी पूरी होने के बाद बरामदगी की सूची और आगे की कानूनी कार्रवाई की जानकारी दी जाएगी। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो डीएसपी संजीव कुमार के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं। साथ ही, यह मामला राज्य के अन्य अधिकारियों के लिए भी चेतावनी का संकेत बन सकता है कि भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति मामलों में अब कठोर कार्रवाई से बचना मुश्किल होगा। यह छापेमारी न केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की सख्त नीति को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि कानून के दायरे में आने के बाद कोई भी पदाधिकारी कार्रवाई से बच नहीं सकता।

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