कैबिनेट की बैठक में 41 एजेंडे को मिली स्वीकृति: राज्य में सफाई कर्मचारी आयोग का होगा गठन, युवा आयोग में छह पदों पर होगी बहाली
पटना। बिहार सरकार की मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में कुल 41 एजेंडों को स्वीकृति प्रदान की गई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, जिनका सीधा संबंध राज्य के विकास और आम जनता के कल्याण से है। यह बैठक विधानसभा सत्र के बाद आयोजित की गई, जिससे इसके महत्व को और बल मिला। विशेष बात यह रही कि इन फैसलों में समाज के विभिन्न वर्गों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं शामिल की गईं।
पत्रकारों की पेंशन राशि में वृद्धि
बैठक में पत्रकारों के लिए पेंशन योजना की राशि को 6,000 रुपए से बढ़ाकर 15,000 रुपए प्रतिमाह कर दिया गया। यह फैसला राज्य में पत्रकारिता से जुड़े लोगों के सामाजिक सुरक्षा और सम्मान को बढ़ावा देने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। पत्रकारों की भूमिका लोकतंत्र में महत्वपूर्ण होती है और यह निर्णय उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारने में सहायक सिद्ध होगा।
सफाई कर्मचारी आयोग का गठन
राज्य सरकार ने बिहार राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के गठन को भी मंजूरी दी है। यह आयोग सफाईकर्मियों को संगठित करने और उनके अधिकारों की रक्षा करने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा। इस आयोग के गठन से इस समुदाय को संरचित रूप में पहचान मिलेगी और उनकी समस्याओं के समाधान में भी गति आएगी।
युवा आयोग में बहाली के लिए पद सृजन
बैठक में बिहार राज्य युवा आयोग के लिए छह पदों के सृजन को मंजूरी दी गई। इससे राज्य के युवाओं को नीति-निर्माण की प्रक्रियाओं में भागीदारी का अवसर मिलेगा। यह निर्णय युवाओं की समस्याओं को सुनने और उन्हें नीतिगत समाधान देने की दिशा में सार्थक साबित होगा।
गन्ना उद्योग और पशु चिकित्सा सेवा नियमावली को मंजूरी
गन्ना उद्योग विभाग के भर्ती सेवा नियमावली को स्वीकृति देने के साथ ही पशु चिकित्सा सेवा नियमावली को भी मंजूरी मिली है। इनसे संबंधित विभागों में पारदर्शी और संगठित तरीके से नियुक्तियों और सेवाओं का संचालन संभव होगा।
प्राथमिक स्कूलों के निर्माण के लिए स्वीकृति
शिक्षा के क्षेत्र में सरकार ने 270 करोड़ रुपए की लागत से प्राथमिक स्कूलों के निर्माण को स्वीकृति दी है। यह निर्णय राज्य में बुनियादी शिक्षा को सशक्त करने की दिशा में एक ठोस प्रयास है। इससे ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में शिक्षा का प्रसार बढ़ेगा और बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलेगा।
ड्यूटी से अनुपस्थित डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई
राज्य सरकार ने चिकित्सा क्षेत्र में अनुशासन को सख्ती से लागू करते हुए ड्यूटी से गैरहाजिर रहने के आरोप में सात डॉक्टरों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह निर्णय स्पष्ट संकेत देता है कि सरकार सेवा में लापरवाही को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेगी।
बिहार राज्य निर्वाचन आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया में संशोधन
कैबिनेट ने बिहार राज्य निर्वाचन आयोग की नियुक्तियों संबंधी प्रस्ताव में संशोधन को मंजूरी दी। इससे नियुक्ति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी हो सकेगी, जिससे चुनावी तंत्र में विश्वास बना रहेगा।
आयु चिकित्सा पर खर्च की भरपाई का प्रावधान
विधानमंडल के सदस्यों, न्यायिक सेवा, राज्य सेवा के अधिकारी तथा कमी आश्रितों को आयु चिकित्सा पद्धति से कराई गई चिकित्सा पर खर्च की भरपाई का भी निर्णय लिया गया है। यह निर्णय सामाजिक कल्याण और कर्मचारियों की सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
पिछली कैबिनेट बैठकों के महत्वपूर्ण फैसले
इससे पहले 15 जुलाई को हुई बैठक में एक करोड़ रोजगार सृजन हेतु 12 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया था। साथ ही, कोसी नहर प्रणाली के सुदृढ़ीकरण और सिंचाई सुविधाओं के लिए लगभग 8,000 करोड़ रुपए के निवेश को मंजूरी दी गई थी। इसी बैठक में बीएलओ और सुपरवाइजरों को प्रोत्साहन के रूप में एकमुश्त 6,000 रुपए मानदेय देने का भी निर्णय लिया गया था।
पटना मेट्रो रेल परियोजना के लिए राशि स्वीकृत
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (DMRC) को पटना मेट्रो रेल परियोजना के प्रायोरिटी कॉरिडोर के रखरखाव हेतु 179.37 करोड़ रुपए की राशि दिए जाने की स्वीकृति भी दी गई थी। यह निर्णय राज्य की आधारभूत संरचना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
18 जुलाई की बैठक में मुफ्त बिजली योजना को स्वीकृति
18 जुलाई को हुई बैठक में आम उपभोक्ताओं के लिए 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने की योजना को मंजूरी दी गई थी। इस योजना पर 19,793 करोड़ रुपए का खर्च अनुमानित है और इसे 1 अगस्त 2025 से लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में राज्य सरकार द्वारा लिए गए ये फैसले विकास और जनकल्याण की दिशा में ठोस कदम प्रतीत होते हैं। चाहे पत्रकारों की पेंशन हो, युवाओं के लिए अवसरों का विस्तार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का सशक्तिकरण हो या आधारभूत ढांचे में सुधार—इन सभी निर्णयों से यह स्पष्ट है कि सरकार आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए आम जनता को केंद्र में रखकर नीतियां बना रही है। यदि इन योजनाओं को सही तरीके से लागू किया जाए, तो यह बिहार की सामाजिक और आर्थिक प्रगति में मील का पत्थर साबित हो सकती हैं।


