विधानसभा में तेजस्वी ने माफी मांगी, कहा- यह अंतिम सत्र, अगर कुछ गलती हुई तो माफ कीजिए, एसआईआर चर्चा हो

पटना। बिहार विधानसभा का मानसून सत्र इस बार राजनीतिक गर्मी और तीखी बहसों से भर गया है। सत्र के चौथे दिन नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपनी ओर से एक बेहद संवेदनशील और आत्मविश्लेषण से भरा वक्तव्य दिया, जिसमें उन्होंने बीते पांच वर्षों के दौरान हुई किसी भी त्रुटि के लिए माफी मांगी और सदन को विश्वास दिलाने की कोशिश की कि उनका उद्देश्य केवल राज्य का विकास है। इसके साथ ही उन्होंने एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर गहरी चिंता जताई, जो इन दिनों बिहार की राजनीति का केंद्र बन चुका है।
तेजस्वी का भावनात्मक वक्तव्य
तेजस्वी यादव ने विधानसभा में अपने संबोधन की शुरुआत आत्मचिंतन के स्वर में की। उन्होंने कहा कि यदि बीते पांच वर्षों में उनसे या उनकी पार्टी से कोई गलती हुई हो या किसी को ठेस पहुंची हो, तो वे माफी मांगते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह माफी दोनों ओर से होनी चाहिए क्योंकि सभी का उद्देश्य बिहार के विकास में भागीदार बनना है।
एसआईआर प्रक्रिया पर जताई गंभीर आपत्ति
तेजस्वी यादव ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में जो रिपोर्ट दी है, उसमें कहीं भी ‘विदेशी’ शब्द का उल्लेख नहीं है। अगर वास्तव में कोई विदेशी घुसपैठिया बिहार में है, तो यह केंद्र सरकार की विफलता है। इस संदर्भ में उन्होंने यह भी पूछा कि जब पिछले बार वोटर वेरिफिकेशन में आठ से दस महीने लगे थे, तो अब सिर्फ पच्चीस दिन में कैसे करोड़ों मतदाताओं का सत्यापन किया जा सकता है।
गरीब और दलितों के अधिकार पर खतरा
तेजस्वी यादव ने मतदाता सूची से नाम कटने को गरीबों और दलितों के संवैधानिक अधिकार पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि हमारे देश में गरीबों और दलितों के पास एकमात्र अधिकार है – मतदान का अधिकार। यदि इसी अधिकार को छीन लिया गया, तो लोकतंत्र की आत्मा पर चोट होगी। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अपील की कि वे सदन में यह आश्वासन दें कि किसी भी वास्तविक बिहारी नागरिक का नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाया जाएगा।
चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
तेजस्वी ने चुनाव आयोग की मंशा पर भी सवाल उठाए और कहा कि यदि आज के आयोग द्वारा मतदाताओं को फर्जी बताया जा रहा है, तो इसका अर्थ है कि 2003 के बाद हुए सभी चुनावों की वैधता संदिग्ध है। उन्होंने आधार कार्ड की विश्वसनीयता को लेकर भी तर्क दिया कि जब आधार के जरिए अन्य सरकारी योजनाओं में लाभ मिल रहा है, तो फिर यही आधार चुनाव आयोग के लिए मान्य क्यों नहीं है?
विपक्ष का विरोध और कार्यस्थगन प्रस्ताव
तेजस्वी यादव के नेतृत्व में विपक्ष ने एसआईआर के मुद्दे पर सदन में कार्यस्थगन प्रस्ताव रखा और एक घंटे की विशेष चर्चा की मांग की। उनका कहना था कि जब तक इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा नहीं होती, वे सदन की सामान्य कार्यवाही नहीं चलने देंगे। विपक्ष ने विधानसभा के मुख्य द्वार पर भी विरोध प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री को सदन में प्रवेश से रोकने का प्रयास किया। तेजस्वी यादव द्वारा सदन में व्यक्त की गई चिंताएं न केवल विपक्ष की राजनीति का हिस्सा हैं, बल्कि जनता की भावनाओं को भी उजागर करती हैं। मतदाता सूची से नाम कटने की आशंका, खासकर प्रवासी मजदूरों और गरीब वर्ग के बीच, एक बड़ी चिंता का विषय बन चुकी है। विधानसभा में इस विषय पर सकारात्मक चर्चा और पारदर्शी समाधान की आवश्यकता है, ताकि लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत हो सकें।

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