सावन में अचानक पटना में बढ़ी फूलों की डिमांड, सोमवारी को अधिक बिक्री, 2 गुना तक दाम बढ़े
पटना। सावन का पवित्र महीना हिन्दू श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्त्व रखता है। इस दौरान भगवान शिव की पूजा-अर्चना पूरे मनोयोग से की जाती है। खासकर सावन के सोमवार यानी ‘सोमवारी’ को विशेष रूप से व्रत, पूजा और जलाभिषेक का आयोजन किया जाता है। इसी धार्मिक आस्था और परंपरा के चलते पटना में फूलों की मांग अचानक से काफी बढ़ गई है।
सोमवारी को सबसे ज्यादा बिक्री
पटना के फूल मंडियों और बाजारों में देखा जा सकता है कि आम दिनों की तुलना में सोमवारी के दिन फूलों की खरीदारी तीन से चार गुना बढ़ जाती है। स्थानीय फूल व्यापारी चंदन के अनुसार, केवल एक सोमवारी को पटना में लगभग पांच लाख फूलों की बिक्री होती है। इसका मुख्य कारण यह है कि शिवभक्त बेलपत्र, फूल-माला और अन्य पूजन सामग्री लेकर मंदिरों की ओर रुख करते हैं।
फूलों की आपूर्ति बाहर से
स्थानीय मांग को पूरा करने के लिए पटना में फूलों की आपूर्ति कई दूसरे शहरों से की जा रही है। बेंगलुरु से गेंदा, कोलकाता से गुलाब और हैदराबाद से रजनीगंधा जैसे फूल मंगाए जा रहे हैं। इसके अलावा, बिहटा और मनेर जैसे इलाकों से भी फूल लाए जा रहे हैं, जहां स्थानीय स्तर पर फूलों की खेती की जाती है।
बारिश बनी चुनौती, कीमतों में उछाल
इस बार सावन के मौसम में लगातार हो रही बारिश के कारण फूलों की गुणवत्ता पर असर पड़ा है। फूल जल्दी सड़-गल जा रहे हैं, जिससे कारोबारियों को नुकसान हो रहा है। इस वजह से भी बाजार में फूलों की कीमतों में अचानक वृद्धि देखी जा रही है। मांग तो अधिक है ही, लेकिन आपूर्ति में बाधा आने से कीमतें दोगुनी हो गई हैं।
बढ़े हुए फूलों के दाम
सावन के सामान्य दिनों में गेंदा के फूलों की कीमत जहां 8 से 15 रुपए प्रति लड़ी थी, वहीं अब यह 25 से 30 रुपए में बिक रही है। 20 लड़ी की कीमत लगभग 500 रुपए तक पहुंच गई है। गुलाब के 20 पीस 300 रुपए में बिक रहे हैं। कमल का फूल जो आम दिनों में 15 रुपए प्रति पीस मिलता था, सोमवारी को 30 रुपए में बेचा जा रहा है। रजनीगंधा की सैकड़ा (100 फूलों) की कीमत 500 रुपए तक जा पहुंची है। बेली का फूल, जो सामान्यतः 100 रुपए में 20 पीस मिलता था, अब 200 रुपए में बिक रहा है।
मुनाफा, लेकिन सीमित
फूल व्यापारियों का कहना है कि सावन का महीना और त्योहारी सीजन उनके लिए मुनाफे का समय होता है। हालांकि बारिश की वजह से फूलों के जल्दी खराब हो जाने की समस्या इस लाभ को सीमित कर देती है। फूलों को संरक्षित रखना और समय पर बिक्री करना एक बड़ी चुनौती बन चुका है। सावन में फूलों की मांग में आया यह उछाल धार्मिक आस्था की गहराई को दर्शाता है। विशेष रूप से सोमवारी को शिवभक्तों की श्रद्धा चरम पर होती है, और बाजार इसका जीवंत प्रतिबिंब बन जाता है। हालांकि बारिश और आपूर्ति की चुनौतियों के कारण फूल व्यापारियों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है, फिर भी यह समय उनके लिए व्यावसायिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बना रहता है। फूलों की महत्ता सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं, बल्कि यह श्रद्धा और भक्ति का माध्यम भी बन जाती है।


