बिहार में अब हर महीने होगा बिजली के दामों में बदलाव, कंपनी को मिला अधिकार, यूनिट में वृद्धि जल्द
- मार्च में बिजली के दामों में वृद्धि: लोगों को लगेगा झटका, स्मार्ट मीटर से लोग परेशान
पटना। बिहार के 2.7 करोड़ से अधिक बिजली उपभोक्ताओं को जल्द ही महंगाई की बड़ी मार लगने वाली है। बताया जा रहा है कि बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने बिजली कंपनियों को अपने बिजली की दरों में बदलाव करने का अधिकार दे दिया है जिसके बाद माना जा रहा है कि अब हर महीने गैस के तरह बिजली कंपनियों के दामों में भी बदलाव होगा। इस नई व्यवस्था के तहत, बिजली कंपनियां हर महीने तेल और कोयले की कीमतों का मूल्यांकन करके दरों में कमी या वृद्धि करने का निर्णय लेंगी। यदि दरों में बदलाव होगा तो उपभोक्ताओं को अगले महीने के बिल में इसका उल्लेख करना अनिवार्य होगा। किस महीने उपभोक्ताओं से अधिक या कम बिल वसूला गया है इसका जिक्र करना आवश्यक होगा। ऐसा न करने पर कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। बिहार विद्युत विनियामक आयोग के अनुसार हर साल नवंबर में बिजली कंपनियों से एक प्रस्ताव मांगा जाता है। जिसमें वे पिछले साल की ऑडिट रिपोर्ट इस साल के खर्च और आमदनी का विवरण और अगले साल के खर्च का अनुमान देती हैं। इसके बाद आयोग आम जनता का पक्ष सुनता है और मूल्यांकन करके बिजली दर तय करता है। यह निर्णय एक साल के लिए लागू रहता है। तेल और कोयले की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियां अपनी दरों में बदलाव करती थीं और पहले इसके लिए आयोग से अनुमति लेनी पड़ती थी। अब राज्य के विद्युत विनियामक आयोग ने डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को यह अधिकार दे दिया है कि वे आवश्यकतानुसार दर में वृद्धि या कमी कर सकती हैं। पहले साल में एक ही बार दरों में बदलाव हो पाता था लेकिन अब कंपनियां हर महीने इस बदलाव को लागू कर सकेंगी। यदि कोयले की कीमतों में मार्च महीने में कोई बदलाव होता है तो बिजली उत्पादन कंपनियां अप्रैल में इसका असर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को देंगी और ये कंपनियां मई में उपभोक्ताओं से बढ़ी हुई या घटित दरें वसूल करेंगी। वर्ष के अंत में टैरिफ प्रस्ताव में इसका हिसाब दिया जाएगा, और यदि उपभोक्ताओं से अधिक राशि वसूली गई है तो दरों में कमी की जाएगी। अगर 1 अप्रैल 2024 से 19 दिसंबर 2024 तक बिजली दरों में कोई कमी आती है तो उपभोक्ताओं को नए साल में सस्ती बिजली का बिल मिल सकता है। इस नई व्यवस्था से उपभोक्ताओं को लाभ हो सकता है क्योंकि अब हर महीने तेल और कोयले की कीमतों में बदलाव के आधार पर बिजली दरों में उतार-चढ़ाव होगा और इसकी प्रक्रिया तेज हो जाएगी।


