September 16, 2026

एनपीआर की मौजूदा शक्ल को बॉयकाट का स्पष्ट ऐलान करे बिहार सरकार, विपक्षी दलों के मुख्य नेता बैठक में हुए शामिल

फुलवारी शरीफ। नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के विरुद्ध विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों की एक साझा सम्मेलन अमीर-ए-शरीयत हजरत मौलाना मोहम्मद वली रहमानी साहब की अध्यक्षता में इमारत शरिया फुलवारी शरीफ के कान्फ्रेंस हॉल में आयोजित हुई। जिसमें उपस्थित सभी प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर सीएए, एनआरसी एवं एनपीआर का विरोध किया एवं कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम भारतीय संविधान की आत्मा एवं उस की बुनियादी धाराओं के विरुद्ध है। वली रहमानी ने कहा कि हम किसी भी हाल में सीएए, एनपीआर एवं एनआरसी को कबूल नहीं करेंगे। आगामी 25 जनवरी को होने वाले मानव श्रृंखला और 29 जनवरी को भारत बंद का सब लोग समर्थन करेंगे। बैठक का संचालन कार्यवाहक नाजिम इमारते शरिया मौलाना शिब्ली कासमी ने की। इस मौके पर हम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा, कांग्रेस नेता सदानंद सिंह, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी, जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, राष्ट्रीय प्रधान महासचिव एजाज अहमद, सीपीआई के सत्य नारायण सिंह, माले के धीरेंद्र सिंह, पूर्व मंत्री नागमणि सहित विभिन्न धार्मिक संगठनों के नेता एवं बामसेफ के पदाधिकारी भी उपस्थित थे। बैठक में सभी दलों के नेताओं ने इस बात का फैसला लिया कि 25 जनवरी को मानव श्रृंखला तथा 29 जनवरी को बामसेफ द्वारा आयोजित भारत बंद को समर्थन दिया जाएगा और खुलकर लोग सड़कों पर उतरेंगे।
बैठक में कहा गया कि नागरिक्ता संशोधन अधिनियम में बिना किसी दस्तावेज के गैर कानूनी तौर पर आने वाले हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी एवं ईसाई समुदाय के लोगों को नागरिकता दी गई है। इस लिस्ट से केवल मुसलमानों को अलग रखा गया है, जो सरासर धर्म के आधार पर विभाजन एवं भेदभाव है। इसलिए केंद्र सरकार से हमारी मांग है कि वह तुरंत इस कानून को वापस ले। दूसरी बात यह है कि सरकार ने इस कानून में धार्मिक आधार पर प्रताड़ना को आधार बनाया है, अगर यह बात सही है और प्रताड़ना ही आधार है तो भारत के पड़ोसी देश केवल पाकिस्तान, बांग्लादेश एवं अफगानिस्तान ही नहीं है बल्कि नेपाल, श्रीलंका, तिब्बत, चीन एवं म्यांमार इत्यादि भी हैं, जहां से धार्मिक आधार पर प्रताड़ित होने वालों ने पलायन किया है। कानून में उन का भी उल्लेख होना चाहिए। श्रीलंका में हजारों की संख्या में तमिल प्रताड़ित हुए हैं, म्यांमार में रोहंगिया मुसलमानों को धर्म के आधार पर प्रताड़ित किया गया। तिब्बत में दलाई लामा एवं उनके अनुयायियों को प्रताड़ित किया गया, जिसकी वजह से वह आज भी भारत में शरण लिए हुए हैं। उनका उल्लेख न करना, यह बतलाता है कि यह कानून बड़े पैमाने पर त्रुटियों एवं धार्मिक पक्षपात से भरा हुआ है एवं संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है। इस बैठक में एनपीआर को लेकर भी चर्चा हुई और इस पर भी चिंता प्रकट करते हुए कहा गया कि केंद्र सरकार ने अप्रैल से एनपीएआर का ऐलान किया है। हम समझते हैं कि यह सरकार का धोखा है और वह एनआरसी के प्रावधानों को एनपीआर में सम्मिलित करके अपनी पॉलिसी लागू करना चाहती है, इसलिए एनपीआर भी देश के लिए सही नहीं है, इसलिए हम एनपीआर का भी विरोध करते हैं और केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि एनपीआर को भी वापस लिया जाए। इसी प्रकार हम बिहार सरकार से भी मांग करते हैं कि वह एनपीआर की मौजूदा शक्ल को बॉयकाट का स्पष्ट ऐलान करे। बैठक में सर्व सहमति से निम्नलिखित प्रस्ताव भी पारित हुए।

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