बुधवार को शोभन योग में होगी देवी के पांचवें रूप में स्कंदमाता की आराधना
पटना। मंगलवार को शारदीय नवरात्र के चौथे दिन माता के उपासक रवियोग में देवी के चौथे रूप में माता कुष्मांडा की पूजा अर्चना किए।
भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद के सदस्य ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा ने बताया कि बुधवार को शोभन योग में भगवती के पांचवे रूप में स्कंद माता की पूजा की जाएगी। सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी की उपासना से आलौकिक तेज की प्राप्ति होती है। देवासुर संग्राम में सेनापति स्कन्द की माता होने के कारण देवी के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता हैं। आज के दिन साधक का मन विशुद्ध चक्र में अवस्थित होता है। इनकी उपासना करने से उपासक को अलौकिक तेज की प्राप्ति होती है। एकाग्र भाव से मन को पवित्र करके मां की स्तुति करने से श्रद्धालु दु:खों से मुक्ति पाकर मोक्ष का मार्ग पाता है। स्कंदमाता की उपासना से भक्त की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। इस देवी की आराधना से संतान सुख का आशीर्वाद मिलता है।


ऐसी है स्कंदमाता का दिव्य स्वरूप
आचार्य झा ने मार्कण्डेय पुराण के हवाले से बताया कि मां का वर्ण पूर्णत: शुभ्र है और कमल के पुष्प पर विराजित रहती हैं। स्कंद मातृस्वरूपिणी देवी की चार भुजाएं हैं। वात्सल्य की देवी मां कमल आसान पर विराजमान होकर अपनी चार भुजाओं में से एक में भगवान स्कन्द को गोद लिए हैं। दूसरी व चौथी भुजा में कमल का फूल, तीसरी भुजा से आशीर्वाद दे रही हैं। इनको इनके पुत्र के नाम से भी पुकारा जाता है। इनका वाहन सिंह है। स्कंदमाता सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी है। यह अलौकिक प्रभामंडल प्रतिक्षण उसके योगक्षेम का निर्वहन करता है।
इच्छित कामना हेतु होगी स्कंदमाता की पूजा
ज्योतिषी राकेश झा ने कहा कि संतान प्राप्ति के लिए लौंग व कर्पूर में अनार के दाने मिलाकर आहुति दें। वैवाहिक जीवन की बाधा से मुक्ति के लिए देवी को कर्पूर, लौंग व पांच हल्दी की गांठें चावल में मिलाकर आहुति दें। अलसी का भोग लगाने से घर सुख, शांति व समृद्धि तथा निरोगता बनी रहती है। नीला रंग पहनें व मां को सुनहरी चुन्नी व चूड़ियां अर्पण करें। मां की आराधना पद्मासन या सिद्धासन में बैठकर करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है।
स्कंदमाता का वैदिक मंत्र
सिंहासना गता नित्यं पद्माश्रि तकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी ।।

