February 22, 2026

PATNA : गायघाट शेल्टर होम की घटना के खिलाफ महिला संगठनों ने निकाला प्रतिवाद मार्च, कहा- नीतीश सरकार में महिलाएं असुरक्षित

पटना। पटना के गायघाट शेल्टर होम में लड़कियों के साथ यौन हिंसा, बलात्कार, मारपीट एवं अमानवीय व्यवहार के खिलाफ महिला संगठनों की ओर से राजधानी के बुद्ध स्मृति पार्क से महिलाओं का आक्रोषपूर्ण प्रतिवाद मार्च निकाला गया। प्रतिवाद मार्च का नेतृत्व एडवा के रामपरी, नीलम देवी, सुनीता, ऐपवा की मीना तिवारी, शशि यादव, बिहार महिला समाज की निवेदिता, राजश्री किरण, एडब्ल्यूएसएफ की आसमां खान, आल इंडिया महिला सांस्कृतिक संगठन की अनामिका, महिला मौलिक अधिकार मंच के अख्तरी बेगम, सुष्मिता, महिला विकास मंच से अरूणिमा कुमारी, स्त्री मुक्ति संगठन के आकांक्षा, कोरस के समता राय आदि शामिल हुईं।
महिला संगठनों की है ये मांगें
महिला संगठनों की सरकार से मांग है कि समाज कल्याण विभाग की तरफ से महिला के चरित्र का मूल्यांकन और परिचय उजागर करने वाला बयान अखबारों में आया है, यह गलत है और इस पर कार्रवाई की जाए। गायघाट रिमांड होम मामले में संपूर्ण मामले की जांच पटना हाईकोर्ट के सिटिंग जज की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाकर की जाए। रिमांड होम में लड़कियों को जेल की तरह बंद रखने के बजाए सुधार गृह के रूप में लाने के लिए कदम उठाना जरूरी है। सुधार गृह में जांच-पड़ताल और संवासिनों से समय पर बातचीत करने के लिए महिला संगठनों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की टीम नियमित समय के अंतराल में भेजी जाए। महिला संगठनों ,मानवाधिकार संगठनों को अधिकार हो कि वे जब चाहें,सुधार गृह में जा सकें, इसकी अनुमति देने की प्रक्रिया सरल बनाई जाए।
मुख्य दोषी अभी तक गिरफ्तार नहीं
महिला संगठनों ने आगे कहा कि इस घटना ने फिर से एक बार बिहार का सिर शर्म से झुका दिया है। 2018 में टीस द्वारा उजागर मुजफ्फरपुर बालिका सुधार गृह कांड के खिलाफ महिला संगठनों के आंदोलन के बदौलत दोषियों को सजा दिलाई गई। वहीं गायघाट शेल्टर होम की घटना के इतने दिन बीत जाने के बावजूद मुख्य दोषी वंदना गुप्ता अभी तक गिरफ्तार नहीं हुई है, बल्कि समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों द्वारा बिना पीड़िता से मिले फर्जी जांच रिपोर्ट के आधार पर पीड़िता को ही बदचलन कहकर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। संगठनों ने कहा कि इस मामले में पटना हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है और अपने स्तर से जांच करने की बात कही है, जो स्वागत योग्य कदम है। महिलाओं ने कहा कि इस सरकार में महिलाएं असुरक्षित है। इसके खिलाफ समाज के सभी वर्गों को आगे आना होगा।

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