मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की राशि अटकी, सत्यापन में देरी से 18 लाख महिलाओं को इंतजार
- ऑनलाइन आवेदनों की जांच और समूह गठन प्रक्रिया अधूरी, 31 मार्च तक भुगतान मुश्किल
- सरकार ने अब तक 1.81 करोड़ महिलाओं को दी सहायता, शहरी लाभुकों के लिए बढ़ी चुनौती
पटना। बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत शहरी क्षेत्रों की करीब 18 लाख महिलाओं को मिलने वाली 10-10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता फिलहाल अटक गई है। इस देरी की मुख्य वजह आवेदनों के सत्यापन कार्य का समय पर पूरा नहीं हो पाना बताया जा रहा है। नगर निकायों के माध्यम से प्राप्त ऑनलाइन आवेदनों की जांच और उसके बाद समूह गठन की प्रक्रिया अभी जारी है, जिसके चलते भुगतान में विलंब हो रहा है। जानकारी के अनुसार, इन आवेदनों के सत्यापन की अंतिम तिथि 15 मार्च 2026 निर्धारित की गई थी, लेकिन अब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। सभी लंबित आवेदन शहरी क्षेत्रों की महिलाओं से संबंधित हैं। ऐसे में जीविका संस्था ने नगर विकास एवं आवास विभाग से सत्यापन कार्य में तेजी लाने और समूह गठन की प्रक्रिया जल्द पूरी करने का आग्रह किया है। योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए महिलाओं का जीविका से जुड़ना अनिवार्य है। इसके लिए 10 से 12 महिलाओं का एक समूह बनाया जाता है। समूह बनने के बाद ही संबंधित महिलाओं को लाभार्थी के रूप में मान्यता दी जाती है और उनके बैंक खातों में सहायता राशि हस्तांतरित की जाती है। फिलहाल जीविका के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अंतिम सूची का इंतजार है, जिसके प्राप्त होते ही भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। हालांकि अधिकारियों ने संकेत दिया है कि चालू वित्तीय वर्ष, जो 31 मार्च 2026 तक समाप्त होगा, उसके भीतर सभी लाभार्थियों को भुगतान कर पाना कठिन प्रतीत हो रहा है। इस कारण बड़ी संख्या में महिलाओं को कुछ और समय तक इंतजार करना पड़ सकता है। सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, अब तक राज्य की कुल 1 करोड़ 81 लाख महिलाओं के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये की राशि भेजी जा चुकी है। इस योजना के तहत लगभग 18 हजार 100 करोड़ रुपये का वितरण किया गया है। फरवरी 2026 में ही करीब 25 लाख महिलाओं को 2500 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी गई थी। इससे पहले 1 करोड़ 50 लाख महिलाओं को 15 हजार 600 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा चुकी है। सरकार का दावा है कि यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके तहत महिलाओं को अपनी पसंद का छोटा व्यवसाय या रोजगार शुरू करने के लिए प्रारंभिक सहायता के रूप में 10 हजार रुपये दिए जाते हैं। इसके अलावा सरकार यह भी सर्वेक्षण कर रही है कि लाभार्थी महिलाओं ने किस प्रकार का रोजगार शुरू किया है और उनकी आर्थिक स्थिति में कितना सुधार हुआ है। योजना के अगले चरण में उन महिलाओं को अतिरिक्त सहायता देने की योजना है, जिनका व्यवसाय सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। ऐसे लाभार्थियों को आगे बढ़ाने के लिए दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता दी जा सकती है, जिससे उन्हें स्थायी आय के अवसर मिल सकें। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को राज्य सरकार के ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम के अंतर्गत लागू किया गया है। वर्ष 2025 से 2030 तक के इस विजन में ‘दोगुना रोजगार-दोगुनी आय’ का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके तहत प्रत्येक परिवार की एक महिला को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का उद्देश्य रखा गया है। गौरतलब है कि 26 सितंबर से 28 नवंबर 2025 के बीच पांच चरणों में 1 करोड़ 58 लाख महिलाओं को इस योजना का लाभ दिया गया था। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों की 1 करोड़ 44 लाख और शहरी क्षेत्रों की 12 लाख महिलाएं शामिल थीं। हालांकि योजना का व्यापक प्रभाव देखने को मिला है, लेकिन वर्तमान में सत्यापन प्रक्रिया में देरी के कारण शहरी क्षेत्रों की लाखों महिलाएं सहायता राशि से वंचित हैं। यदि जल्द ही जांच और समूह गठन का कार्य पूरा नहीं किया गया, तो लाभार्थियों को और अधिक इंतजार करना पड़ सकता है। इस स्थिति ने सरकार और संबंधित विभागों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस प्रक्रिया को कितनी तेजी से पूरा कर पाता है, ताकि लाभुकों को समय पर योजना का लाभ मिल सके और योजना के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सके।


