मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना में 31 तक करें आवेदन, महिलाओं को मिलेगी आर्थिक सहायता
पटना। बिहार में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के जरिए राज्य सरकार ने महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में एक अहम पहल की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को शुरुआती आर्थिक सहायता देकर उन्हें छोटे स्तर पर रोजगार शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और परिवार की आय में योगदान दे सकें। सरकार का मानना है कि आर्थिक आत्मनिर्भरता से महिलाओं का सामाजिक आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।
आवेदन की अंतिम तिथि और पात्रता
सरकार ने इस योजना के तहत आवेदन की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 तय की है। साफ तौर पर कहा गया है कि जो महिलाएं इस तारीख तक आवेदन करेंगी, वही योजना का लाभ उठा सकेंगी। शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों की महिलाएं इस योजना के लिए पात्र हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि समयसीमा के बाद किसी तरह का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसलिए पात्र महिलाओं को सलाह दी जा रही है कि वे समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।
शुरुआती सहायता और आगे की योजना
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को शुरुआती तौर पर 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। यह राशि महिलाओं को रोजगार शुरू करने के लिए एक शुरुआती पूंजी के रूप में दी जाती है। इसके साथ ही सरकार की योजना है कि आगे चलकर महिलाओं को दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता भी दी जाए। हालांकि यह पूरी राशि एक साथ नहीं मिलेगी, बल्कि इसे किस्तों में दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि चरणबद्ध सहायता से महिलाओं का रोजगार स्थायी रूप से विकसित हो सकेगा।
निगरानी और मूल्यांकन की व्यवस्था
इस योजना की एक खास बात यह है कि सरकार केवल पैसे बांटकर जिम्मेदारी खत्म नहीं करना चाहती। जीविका के माध्यम से रोजगार की शुरुआत और उसकी प्रगति की निगरानी की जाएगी। जब यह देखा जाएगा कि महिला ने वास्तव में रोजगार शुरू किया है और वह आगे बढ़ रहा है, तभी अगली किस्त जारी की जाएगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी राशि का सही उपयोग हो और योजना केवल कागजों तक सीमित न रह जाए।
प्रशिक्षण और कौशल विकास पर जोर
सरकार इस योजना को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रखना चाहती। महिलाओं को हुनरमंद बनाने के लिए प्रशिक्षण मॉडल भी तैयार किया जा रहा है। अलग-अलग क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाओं को देखते हुए ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि महिलाएं अपने काम को बेहतर ढंग से चला सकें। सिलाई, बुनाई, छोटे व्यवसाय, खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन जैसे क्षेत्रों में महिलाओं को प्रशिक्षण देने की योजना पर काम चल रहा है।
अब तक की उपलब्धियां
आंकड़ों पर नजर डालें तो यह योजना बड़े स्तर पर लागू की जा चुकी है। अब तक राज्य की एक करोड़ 56 लाख महिलाओं को 10-10 हजार रुपये की सहायता दी जा चुकी है। यह संख्या दिखाती है कि योजना का दायरा कितना व्यापक है। जिलावार आंकड़ों के अनुसार पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर और मधुबनी जिलों में सात लाख से अधिक महिलाओं को सहायता मिली है। पश्चिम चंपारण, समस्तीपुर और पटना में छह लाख से ज्यादा महिलाएं लाभान्वित हुई हैं। वहीं गया, कटिहार, सारण और अररिया में पांच-पांच लाख महिलाओं तक यह राशि पहुंच चुकी है। अन्य जिलों में भी तीन से चार लाख महिलाओं को योजना का लाभ मिला है।
आवेदन में आई समस्याएं
हालांकि योजना की सफलता के बीच कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं। आवेदन करने वाली करीब दस लाख महिलाओं को अब तक राशि नहीं मिल सकी है। इसका मुख्य कारण आधार कार्ड या बैंक खाते में पाई गई खामियां बताई जा रही हैं। जीविका का कहना है कि इन मामलों की जांच की जा रही है और जैसे ही त्रुटियों में सुधार होगा, राशि संबंधित खातों में भेज दी जाएगी। सरकार ने महिलाओं से अपील की है कि वे अपने दस्तावेजों की जांच करवा लें, ताकि भुगतान में देरी न हो।
गलत खातों में राशि जाने का मामला
योजना के दौरान एक चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया, जब यह पता चला कि करीब 400 पुरुषों के खातों में भी इस योजना की राशि चली गई। फिलहाल इस राशि की रिकवरी को लेकर कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं होने के कारण कार्रवाई रुकी हुई है। हालांकि संबंधित विभागों से रिपोर्ट तलब की गई है। कुछ मामलों में लोग खुद ही राशि वापस करने लगे हैं। सरकार का कहना है कि आगे ऐसी गलतियों को रोकने के लिए सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा।
राजनीतिक और सामाजिक महत्व
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को सियासी दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। यह योजना न केवल महिलाओं को आर्थिक राहत देती है, बल्कि सरकार की जवाबदेही की भी परीक्षा ले रही है। एक ओर जहां लाखों महिलाओं को लाभ मिला है, वहीं दूसरी ओर पारदर्शिता और निगरानी को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। सरकार का दावा है कि इन कमियों को दूर कर योजना को और प्रभावी बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। 31 दिसंबर 2025 तक आवेदन का मौका देकर सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि समय पर पहल करने वाली महिलाएं ही इसका लाभ उठा पाएंगी। आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और निगरानी के साथ यह योजना अगर सही तरीके से लागू होती है, तो यह लाखों महिलाओं के जीवन में स्थायी बदलाव ला सकती है। अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार इस योजना को कितनी पारदर्शिता और प्रभावशीलता के साथ आगे बढ़ा पाती है।


