पटना में महिला इंस्पेक्टर का भाई लापता, परिजनों ने जताई अपहरण की आशंका, तलाश में जुटी पुलिस
पटना। अगमकुआं थाना क्षेत्र में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां महिला इंस्पेक्टर के छोटे भाई और स्वास्थ्य व शिक्षा विभाग के ठेकेदार आनंद गुप्ता उर्फ मंटू 5 अगस्त की रात से रहस्यमय तरीके से लापता हो गए। परिजनों ने उनके अपहरण की आशंका जताई है और पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है।
शादी से पहले हुई घटना
आनंद गुप्ता की शादी 22 नवंबर को तय थी और जनवरी में उनका सगाई समारोह हो चुका था। बचपन में ही माता-पिता के निधन के बाद उनकी तीनों बहनों ने उन्हें पाल-पोसकर बड़ा किया। बहनें उनके विवाह की तैयारियों में लगी हुई थीं और इस घटना ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया है।
लापता होने की घटना का क्रम
मिली जानकारी के अनुसार, 5 अगस्त की रात करीब 8:30 बजे आनंद अपने आशियाना स्थित घर से अपनी कार और ड्राइवर के साथ बड़ी पहाड़ी इलाके में एक जरूरी काम के सिलसिले में निकले। वहां पहुंचने के बाद वह कार से उतर गए और ड्राइवर गाड़ी में इंतजार करता रहा। लगभग दो घंटे बीत जाने पर भी आनंद वापस नहीं आए। ड्राइवर ने उन्हें फोन करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। देर रात ड्राइवर ने गाड़ी में ही सोने का फैसला किया और सुबह उठकर इस बात की सूचना आनंद के परिवार को दी।
पुलिस जांच और सीसीटीवी फुटेज
थाना प्रभारी नीरज कुमार पांडेय ने बताया कि तकनीकी जांच और सीसीटीवी फुटेज से यह पता चला है कि आनंद 5 अगस्त की रात बड़ी पहाड़ी के पास से गुजरे थे। इसके बाद उनका कोई फुटेज सामने नहीं आया। यह स्थिति पुलिस के लिए भी चिंता का विषय बन गई है।
व्यावसायिक पृष्ठभूमि और निजी जीवन
आनंद गुप्ता स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर सरकारी टेंडर का कार्य करते थे। इसके अलावा, मधुबनी में उनका एक बड़ा पैथोलॉजी लैब भी है, जो उनके एक मित्र के साथ साझेदारी में संचालित होता है। वह तीन बहनों में सबसे छोटे थे। उनके पिता होम्योपैथिक चिकित्सक थे, जिनका निधन 2020 में हो गया था।
परिवार की चिंताएं और आशंकाएं
आनंद की बहन शिल्पी कुमारी, जो पटना के जक्कनपुर में महिला हेल्पलाइन में काउंसलर हैं और फिलहाल जिला प्रशासन कार्यालय में डेपुटेशन पर कार्यरत हैं, ने बताया कि उन्होंने और उनकी बहन कंचन कुमारी, जो पटना में इंस्पेक्टर हैं, ने अपने भाई को बड़े प्रेम से पाला है। अब जब उनकी शादी नजदीक थी, यह घटना उनके लिए गहरा आघात है। परिवार ने आशंका जताई है कि यह मामला अपहरण का हो सकता है, क्योंकि आनंद के पास कई बड़े व्यवसायिक अनुबंध थे।
पार्टनर से पूछताछ
आनंद के व्यावसायिक साझेदार नीतीश कुमार से भी परिवार ने पूछताछ की, लेकिन कोई ठोस जानकारी हाथ नहीं लगी। घटना के तीन दिन बीत जाने के बाद भी आनंद गुप्ता का कोई सुराग नहीं मिला है।
पुलिस की कोशिशें
पुलिस इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तकनीकी विश्लेषण, सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय स्तर पर पूछताछ के आधार पर सुराग ढूंढने का प्रयास कर रही है। हालांकि, अब तक उन्हें कोई निर्णायक सबूत नहीं मिल पाया है।
यह घटना न केवल पटना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी चिंता का कारण है। परिवार और परिचित लोग आनंद की सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थना कर रहे हैं और पुलिस से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं।


