January 28, 2026

पटना के एनएमसीएच में महिला की मौत, परिजनों और कर्मचारियों में विवाद, मारपीट का आरोप

पटना। पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एनएमसीएच) में एक महिला मरीज की मौत के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। परिजनों और अस्पताल कर्मियों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला मारपीट तक पहुंच गया। यह घटना न सिर्फ मरीजों की देखभाल को लेकर सवाल खड़े करती है बल्कि अस्पतालों में हो रहे कथित दुर्व्यवहार की ओर भी इशारा करती है।
पैर की चोट के बाद अस्पताल में भर्ती
मृतका मीना देवी (60 वर्ष) पटना सिटी की रहने वाली थीं। जानकारी के अनुसार, उन्हें दो दिन पहले पैर में चोट लगने के बाद एनएमसीएच में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने उनके पैर का ऑपरेशन करने की सलाह दी थी, जो बुधवार को निर्धारित था। परंतु सोमवार की सुबह ही उनकी अचानक मृत्यु हो गई, जिससे परिजनों में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया।
मौत के बाद बढ़ा विवाद
मीना देवी की मौत के बाद उनके बेटे सतीश कुमार अस्पताल से मृत्यु प्रमाण पत्र लेने गए। उनका आरोप है कि डॉक्टर सादे कागज पर प्रमाण पत्र तैयार कर रहे थे, जिस पर उन्होंने आपत्ति जताई। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में बहस शुरू हो गई, जो कुछ ही देर में हाथापाई में बदल गई। सतीश कुमार का आरोप है कि डॉक्टरों और अस्पताल कर्मियों ने उनके साथ और अन्य परिजनों के साथ मारपीट की।
सीसीटीवी फुटेज से सच्चाई सामने आने की उम्मीद
परिजनों का कहना है कि जिस स्थान पर यह घटना हुई, वहां पर सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि फुटेज को खंगालकर सच्चाई सामने लाई जाए। उनका दावा है कि कैमरे में सब कुछ रिकॉर्ड हुआ है, जिससे साफ हो जाएगा कि किसकी गलती थी।
स्थानीय लोगों ने भी लगाए आरोप
इस घटना के बाद अस्पताल में मौजूद अन्य मरीजों के परिजनों और स्थानीय लोगों ने भी आरोप लगाए कि एनएमसीएच में डॉक्टर और कर्मचारी अक्सर मरीजों और उनके परिजनों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं। यह कोई पहली घटना नहीं है जब इस प्रकार की शिकायत सामने आई हो। लोगों का कहना है कि अस्पताल के माहौल में सुधार की सख्त जरूरत है।
पुलिस जांच में जुटी, अस्पताल प्रशासन मौन
घटना की सूचना मिलते ही आलमगंज थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने पीड़ित परिवार को निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है और मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर कार्रवाई करेंगे। वहीं दूसरी ओर, इस घटना को लेकर जब अस्पताल अधीक्षक से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और फोन कॉल्स का जवाब नहीं दिया। इससे नाराज परिजन और स्थानीय लोग अस्पताल प्रशासन के रवैये से भी असंतुष्ट नजर आए।
जरूरत है पारदर्शिता और जवाबदेही की
इस तरह की घटनाएं सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। जहां एक ओर गरीब और मध्यम वर्ग के लोग सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहते हैं, वहीं दूसरी ओर यदि उन्हें वहां अपमान और मारपीट झेलनी पड़े, तो यह व्यवस्था पर गहरा आघात है। सवाल यही है कि क्या एनएमसीएच जैसी संस्थाएं मरीजों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभा रही हैं या फिर लापरवाही और असंवेदनशीलता का अड्डा बनती जा रही हैं।

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