February 22, 2026

गांधी मैदान में कसरत और ट्रेनिंग पर लगा प्रतिबंध, अभ्यर्थियों को बड़ा झटका, उल्लंघन पर कार्रवाई

पटना। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान को लेकर जिला प्रशासन ने एक अहम और सख्त निर्णय लिया है। अब इस मैदान में किसी भी प्रकार की शारीरिक दक्षता परीक्षा की तैयारी पर रोक लगा दी गई है। इसमें दौड़, कसरत, ग्राउंड ट्रेनिंग और अन्य शारीरिक अभ्यास शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और इसके उल्लंघन की स्थिति में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस फैसले के बाद हजारों अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा है, जो लंबे समय से गांधी मैदान को अपनी ट्रेनिंग का प्रमुख केंद्र मानते रहे हैं।
फैसले के पीछे जिला प्रशासन का तर्क
जिला प्रशासन के अनुसार गांधी मैदान केवल एक सामान्य खुला मैदान नहीं है, बल्कि यह पटना ही नहीं बल्कि पूरे बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा स्थल है। यहां राष्ट्रीय पर्वों का आयोजन होता है, बड़े सरकारी और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और यह शहरवासियों के लिए सुकून और भ्रमण का प्रमुख स्थान भी है। प्रशासन का मानना है कि लगातार भारी संख्या में अभ्यर्थियों द्वारा शारीरिक प्रशिक्षण किए जाने से मैदान की मूल संरचना प्रभावित हो रही थी।
मैदान की हरियाली, ट्रैक और पाथवे पर पड़ रहा था असर
प्रशासन की ओर से बताया गया है कि लंबे समय से गांधी मैदान में दौड़ और कठोर शारीरिक अभ्यास के कारण घास और हरियाली को गंभीर नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा ट्रैक, पाथवे और अन्य संरचनाएं भी धीरे-धीरे खराब हो रही थीं। रोजाना सैकड़ों की संख्या में अभ्यर्थियों के दौड़ने और कसरत करने से मिट्टी उखड़ रही थी और मैदान की समतलता भी प्रभावित हो रही थी। इससे भविष्य में यहां बड़े आयोजनों को कराने में कठिनाई हो सकती थी।
आम लोगों को हो रही थी परेशानी
गांधी मैदान का उपयोग केवल अभ्यर्थी ही नहीं करते, बल्कि आम नागरिक, बच्चे, बुजुर्ग और पर्यटक भी यहां सुबह-शाम टहलने आते हैं। जिला प्रशासन का कहना है कि शारीरिक प्रशिक्षण के दौरान कई बार आम लोगों को असुविधा होती थी। तेज दौड़, समूह में ट्रेनिंग और कसरत के कारण टहलने वाले लोगों को रास्ता बदलना पड़ता था। कई बार टकराव की स्थिति भी बन जाती थी, जिससे सुरक्षा का सवाल खड़ा हो रहा था।
गांधी मैदान की भूमिका और उद्देश्य
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गांधी मैदान को उसके मूल उद्देश्य के अनुरूप ही उपयोग में लाया जाएगा। यह मैदान आम जनता के भ्रमण, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों, राष्ट्रीय पर्वों, सरकारी कार्यक्रमों और शांत वातावरण में समय बिताने के लिए खुला रहेगा। यहां बैठने, टहलने और हल्की गतिविधियों की अनुमति रहेगी, लेकिन प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी शारीरिक दक्षता की तैयारी की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अभ्यर्थियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था
जिला प्रशासन ने यह भी कहा है कि अभ्यर्थियों को पूरी तरह से अभ्यास से वंचित नहीं किया जा रहा है। शारीरिक दक्षता परीक्षा की तैयारी के लिए प्रशासन की ओर से अन्य मैदानों और चिन्हित स्थलों का उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे स्थानों की पहचान करें, जहां अभ्यर्थी बिना किसी बाधा के अपनी तैयारी कर सकें। प्रशासन का मानना है कि इससे गांधी मैदान पर दबाव भी कम होगा और अभ्यर्थियों को भी उचित स्थान मिल सकेगा।
नियमों के पालन के लिए सख्त निगरानी
इस आदेश को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए गांधी मैदान परिसर में दंडाधिकारी, पुलिस बल और नगर निगम की टीम को तैनात किया गया है। ये टीमें लगातार निगरानी करेंगी ताकि कोई भी व्यक्ति नियमों का उल्लंघन न कर सके। यदि कोई अभ्यर्थी या समूह आदेश के बावजूद गांधी मैदान में कसरत या दौड़ करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा है कि इस मामले में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
अभ्यर्थियों की प्रतिक्रिया और असंतोष
इस फैसले के बाद कई अभ्यर्थियों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि गांधी मैदान लंबे समय से शारीरिक दक्षता परीक्षा की तैयारी का केंद्र रहा है और यहां सुविधाजनक वातावरण मिलता था। कई अभ्यर्थी दूर-दराज के इलाकों से यहां अभ्यास के लिए आते थे। अब अचानक लगी पाबंदी से उनकी तैयारी प्रभावित हो सकती है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि यह फैसला सार्वजनिक हित और गांधी मैदान की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है।
प्रशासन का संदेश और आगे की दिशा
जिला प्रशासन ने अपील की है कि सभी लोग इस आदेश का सम्मान करें और सहयोग करें। प्रशासन का कहना है कि गांधी मैदान की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गरिमा को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। अभ्यर्थियों के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराए जाएंगे, लेकिन गांधी मैदान को शारीरिक ट्रेनिंग का केंद्र नहीं बनने दिया जाएगा। इस फैसले को शहर की दीर्घकालिक जरूरतों और सार्वजनिक हित से जोड़कर देखा जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए यह मैदान सुरक्षित और संरक्षित रह सके।

You may have missed