January 28, 2026

मोतिहारी में तीन बच्चे गंडक में डूबे, पैर फिसलने से हादसा, तलाश जारी

मोतिहारी। बिहार के मोतिहारी में मंगलवार की शाम एक दर्दनाक हादसे ने पूरे रूपनी गांव को गमगीन कर दिया। मधुबन प्रखंड के इस गांव में तीन मासूम बच्चे बूढ़ी गंडक नदी में डूब गए। यह हृदयविदारक घटना तब घटी जब तीनों बच्चे दोपहर के समय नदी में नहाने गए थे। हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने का मौका भी नहीं मिला और देखते ही देखते तीनों बच्चे पानी के तेज बहाव में बह गए।
पानी में डूबे तीन मासूम, गांव में पसरा सन्नाटा
हादसे में डूबे बच्चों में दो सगे भाई-बहन थे और एक उनकी सहेली थी। तीनों की पहचान गांव के ही अंकुश राम के छह वर्षीय बेटे चमचम कुमार, नौ वर्षीय बेटी अंजली कुमारी और पड़ोसी सुरेश राम की दस वर्षीय बेटी राजनंदनी कुमारी के रूप में हुई है। तीनों बच्चे रोज की तरह नदी में नहाने गए थे, लेकिन उस दिन उनकी किस्मत ने साथ नहीं दिया। बताया जा रहा है कि नहाने के दौरान उनका पैर फिसल गया और वे सीधे गहरे पानी में चले गए, जहां तेज बहाव उन्हें बहा ले गया।
स्थानीय लोगों की कोशिशें बेकार, तलाश जारी
घटना के समय कुछ अन्य बच्चे भी पास ही मौजूद थे। जैसे ही उन्होंने अपने साथियों को डूबते देखा, वे जोर-जोर से चिल्लाने लगे। बच्चों की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थानीय स्तर पर बचाव कार्य शुरू किया। लोगों ने नदी में खुद उतरकर बच्चों की तलाश की, लेकिन देर शाम तक कोई सफलता हाथ नहीं लगी। घटना की गंभीरता को देखते हुए तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी गई।
एनडीआरएफ की टीम नहीं पहुंच पाई मौके पर
घटना की जानकारी मिलने पर प्रशासन सक्रिय हुआ, लेकिन अंधेरा हो जाने की वजह से राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की टीम घटनास्थल तक नहीं पहुंच सकी। मधुबन के अंचल अधिकारी ने बताया कि बुधवार सुबह होते ही बचाव दल को मौके पर भेजा जाएगा और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जाएगा। फिलहाल तीनों बच्चों की तलाश लगातार जारी है, लेकिन अब तक उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
गांव में मातम का माहौल, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
इस दुखद घटना के बाद पूरे गांव में मातम छा गया है। तीन मासूमों के एक साथ डूब जाने से हर आंख नम है। बच्चों के माता-पिता सदमे में हैं और बेसुध अवस्था में पड़े हैं। गांव में हर कोई इस हादसे को लेकर व्यथित है और लोग लगातार नदी किनारे बच्चों की सलामती की दुआ कर रहे हैं। गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा है और हर तरफ सिर्फ आंसू और दुख की तस्वीरें हैं। यह हादसा न केवल उन परिवारों के लिए बल्कि पूरे गांव के लिए एक बड़ी त्रासदी बनकर सामने आया है। इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए ग्रामीण इलाकों में और बेहतर उपाय किए जाने की आवश्यकता है, खासकर ऐसे स्थानों के पास जहां प्राकृतिक जल स्रोत हों।

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