‘दूसरे के घरों को रौशन करने वाले की जिंदगी में छाया है अंधेरा’
दुलहिन बाजार (वेद प्रकाश)। दीपों के त्योहार कहे जाने वाले दीपावली पर्व पर लाखों घरों को रोशनी से जगमग करने वाले कुम्हारों की जिंदगी में अंधेरा छाई हुई है। आधुनिकता की चकाचौंध ने कुम्हारों के सामने जीवन यापन का संकट खड़ा कर दिया है। अपने मेहनत और अपनी कला के कारण मिट्टी के दीये व बर्तन बनाने वाले को आज दो वक्त की रोटी के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कभी दीपावली के त्योहार आने के पूर्व से ही कुम्हार लोग मिट्टी के दीये एवं बर्तन बनाने में मशगुल हो जाते थे। वहीं अब मिट्टी के दीये एवं अन्य बर्तन बनाकर अपने निकटतम बाजारों में बेचने जाते हैं, ताकि उनके द्वारा बनाए गए दीये एवं मिट्टी के बर्तन बाजार में बिक जाए। लेकिन अफसोस आज इस आधुनिकता के युग में उनके खरीदार भी नहीं दिखाई देते हैं।
बाजार में बिक रहे रंग-बिरंगे बिजली की झालर ने दीये के स्थान ले लिए हैं, वहीं बिजली से संचालित फ्रिज के आगे उनके द्वारा बनाए गए मिट्टी के घड़े को लोगों ने नापसंद कर दिया। ऐसी स्थिति में मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हारों के सामने काफी समस्या खड़ा हो चुका है। दीये एवं मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए वे जिस जगहों से मिट्टी निकालते थे, उस पर भी लोगों ने आपत्ति जताना शुरू कर दिया है। मिट्टी के बर्तन बनाकर आजीविका चलाने वाले तमाम कुम्हार मिट्टी के घरों में रहने को विवश हैं।


