बिहार में थमा मानसून, बढ़ी उमस और गर्मी की मार: 22 जून के बाद मौसम में बड़े बदलाव की उम्मीद

  • कैमूर बना प्रदेश का सबसे गर्म जिला, पटना समेत सात जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार
  • मौसम विभाग ने 26 जिलों में बारिश और तेज हवा का जारी किया अलर्ट, मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ने से बढ़ी चिंता

पटना। बिहार सहित देश के कई हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार अचानक धीमी पड़ गई है, जिसका असर अब आम जनजीवन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। मानसून के कमजोर पड़ने से बिहार के अधिकांश जिलों में तेज धूप, उमस भरी गर्मी और बढ़ते तापमान ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। राजधानी पटना सहित राज्य के कई हिस्सों में लोगों को जून माह में भीषण गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग ने हालांकि आगामी दिनों में मौसम के बदलने की संभावना जताई है और राज्य के 26 जिलों में बारिश तथा तेज हवा को लेकर चेतावनी जारी की है। मंगलवार को बिहार के कई जिलों में तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया गया। कैमूर जिले का अधिकतम तापमान 42.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जिससे यह राज्य का सबसे गर्म जिला बन गया। इसके अलावा बक्सर में 41.4 डिग्री, शेखपुरा में 40.9 डिग्री, औरंगाबाद में 40.8 डिग्री तथा डेहरी में 40.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। राजधानी पटना का तापमान भी 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे लोगों को दिनभर गर्म हवाओं और उमस का सामना करना पड़ा। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अगले चार से पांच दिनों के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल सकता है। विभाग ने कई जिलों में गरज-चमक, तेज हवा और बारिश की संभावना व्यक्त की है। अनुमान है कि कई क्षेत्रों में हवा की गति 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि 22 जून के बाद मानसूनी गतिविधियों में तेजी आएगी और अधिकांश जिलों में मौसम राहत देने वाला हो सकता है। मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार 17 जून को उत्तर और दक्षिण-पश्चिम बिहार के कई जिलों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। भागलपुर, कटिहार, किशनगंज और पूर्णिया में भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। वहीं 18 जून को उत्तर-मध्य, उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पूर्व बिहार में वर्षा संबंधी गतिविधियां और बढ़ सकती हैं। अररिया, मधुबनी, किशनगंज और सुपौल में भारी बारिश का विशेष अलर्ट जारी किया गया है। 19 जून को उत्तर बिहार के कई हिस्सों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण और सीतामढ़ी में भी भारी वर्षा की संभावना व्यक्त की गई है। इस बीच मौसम विभाग की उपग्रह तस्वीरों ने भी चिंताएं बढ़ा दी हैं। 15 जून को जारी उपग्रह चित्रों में देश के बड़े हिस्से से मानसूनी बादल लगभग गायब दिखाई दिए। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार 4 जून से 15 जून के बीच देश में सामान्य रूप से 53.7 मिलीमीटर वर्षा होनी चाहिए थी, लेकिन इस अवधि में केवल 19.2 मिलीमीटर वर्षा ही दर्ज की गई। यह सामान्य से लगभग 64 प्रतिशत कम है, जो मानसून की कमजोर स्थिति को दर्शाता है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की धीमी गति का कारण समुद्र में नमी की कमी नहीं है, बल्कि ऊपरी वायुमंडल में हवाओं का असामान्य व्यवहार है। इस वर्ष पश्चिमी जेट धारा सामान्य स्थिति से अधिक दक्षिण की ओर खिसक गई है। इसके कारण मानसून को आगे बढ़ाने वाली हवाएं प्रभावित हो रही हैं। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में पर्याप्त नमी मौजूद होने के बावजूद बादलों का पर्याप्त विकास नहीं हो पा रहा है। यही वजह है कि मानसून महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के आसपास ठहराव की स्थिति में पहुंच गया है। मानसून की इस सुस्ती का असर केवल बिहार ही नहीं, बल्कि राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और महाराष्ट्र सहित देश के 16 राज्यों पर भी दिखाई दे रहा है। इन राज्यों में भी लोग बारिश का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि कई स्थानों पर पूर्व-मानसूनी वर्षा जारी है, जिससे कुछ क्षेत्रों में राहत मिली है। समस्तीपुर सहित बिहार के कई जिलों में बुधवार सुबह से तेज धूप का प्रभाव देखा गया। समस्तीपुर में पिछले 24 घंटों के दौरान अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने गर्म हवाओं और लू जैसी परिस्थितियों को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों में मानसून सक्रिय होता है तो किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। धान सहित खरीफ फसलों की बुआई और रोपाई के लिए पर्याप्त नमी उपलब्ध हो सकेगी। फिलहाल बिहार के लोग उमस भरी गर्मी और मानसून की सुस्त चाल के बीच राहत भरी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।

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