ईरान-अमेरिका तनाव का असर आम जीवन पर, पटना में गैस किल्लत और महंगाई से बढ़ी परेशानी

  • रोजमर्रा की वस्तुओं से लेकर चाय-नाश्ता तक महंगा, छोटे उद्योग और व्यापार प्रभावित

पटना। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सीधे तौर पर आम लोगों की जिंदगी पर दिखाई देने लगा है। पेट्रोलियम उत्पादों और रसोई गैस की आपूर्ति में कमी के कारण बाजार में महंगाई तेजी से बढ़ रही है, जिससे रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि खाने-पीने की चीजों से लेकर प्लास्टिक, रसायन और निर्माण सामग्री तक सब कुछ महंगा हो गया है।
गैस की किल्लत से बढ़ी मुश्किलें
सबसे ज्यादा असर रसोई गैस की कमी का देखने को मिल रहा है। पहले जहां गैस सिलेंडर तीन से पांच दिनों में मिल जाता था, वहीं अब लोगों को सात से दस दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। इस कमी का सीधा असर छोटे दुकानदारों और खाद्य व्यवसाय से जुड़े लोगों पर पड़ा है। चाय, नाश्ता और मिठाइयों की कीमतों में अचानक वृद्धि दर्ज की गई है। चाय दुकानदारों के अनुसार, पहले जो चाय दस रुपये में मिलती थी, अब वह बारह रुपये में बिक रही है। दुकानदारों का कहना है कि गैस महंगी होने और समय पर उपलब्ध न होने के कारण उन्हें दाम बढ़ाने पड़े हैं। हालांकि कई ग्राहक इसे अनावश्यक बढ़ोतरी मानते हैं, जिससे बाजार में ग्राहकों और दुकानदारों के बीच बहस की स्थिति भी देखने को मिल रही है।
प्लास्टिक और छोटे उद्योगों पर असर
पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर प्लास्टिक उद्योग पर भी पड़ा है। प्लास्टिक दाने की कीमत एक सप्ताह में 125 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर करीब 200 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। इसके कारण प्लास्टिक से बनने वाले सामान जैसे कुर्सी, बाल्टी, मग और थैले की लागत बढ़ गई है। छोटे उद्योगों के संचालकों का कहना है कि कच्चे माल की कीमतों में इस तरह की तेजी से उनके लिए उत्पादन जारी रखना मुश्किल हो रहा है। कई छोटे उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं, जिससे रोजगार पर भी असर पड़ सकता है।
स्टील और निर्माण क्षेत्र में बढ़ोतरी
वैश्विक अस्थिरता का असर निर्माण क्षेत्र पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। स्टील और उससे जुड़ी सामग्री के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। हाल के दिनों में स्टील की कीमत प्रति मीट्रिक टन लगभग 100 रुपये तक बढ़ चुकी है। इसके अलावा स्क्रैप और लोहे की कीमतों में भी रोजाना बदलाव हो रहा है, जिससे निर्माण कार्यों की लागत बढ़ती जा रही है।
सूखे मेवे और मसालों के दाम में उछाल
विदेशों से आयात होने वाले सूखे मेवे और मसालों की कीमतों में भी भारी वृद्धि हुई है। इनकी कीमतों में 200 से 250 रुपये प्रति किलोग्राम तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके साथ ही इनकी आपूर्ति भी समय पर नहीं हो पा रही है, जिससे व्यापारियों और ग्राहकों दोनों को परेशानी हो रही है। गैस की कमी का असर मिठाई और नाश्ते की दुकानों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पहले जो समोसा 10 से 12 रुपये में मिलता था, अब उसकी कीमत बढ़कर 15 रुपये प्रति पीस हो गई है। इसी तरह रसगुल्ला और गुलाबजामुन जैसे मिठाइयों की कीमतें भी 20 रुपये प्रति पीस तक पहुंच गई हैं। दुकानदारों का कहना है कि उत्पादन लागत बढ़ने के कारण कीमत बढ़ाना उनकी मजबूरी है।
रसायन उत्पाद भी हुए महंगे
पेट्रोलियम आधारित रसायनों की कीमतों में भी भारी वृद्धि हुई है। ग्लिसरीन की कीमत में लगभग 100 प्रतिशत तक का उछाल आया है। पहले जो ग्लिसरीन 90 रुपये प्रति लीटर मिलती थी, अब वह 180 रुपये प्रति लीटर हो गई है। इसके अलावा पेट्रोलियम जेली, फिनाइल तेल और अन्य रसायनों की कीमतों में भी 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर आगे चलकर साबुन, क्रीम और दवाइयों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
रेस्टोरेंट और होटल व्यवसाय प्रभावित
पटना में गैस की कमी का सबसे ज्यादा असर रेस्टोरेंट और होटलों पर पड़ा है। कई रेस्टोरेंट संचालकों को अपने मेन्यू में करीब 70 प्रतिशत तक कटौती करनी पड़ी है, क्योंकि गैस की कमी के कारण सभी व्यंजन बनाना संभव नहीं हो पा रहा है। कुछ होटल और ढाबे अब कोयले के चूल्हे का उपयोग कर पारंपरिक तरीके से खाना बनाने को मजबूर हैं। गैस की कालाबाजारी भी बढ़ गई है, जिसके कारण विक्रेता अधिक कीमत मांग रहे हैं। इससे व्यवसायियों की लागत और बढ़ गई है।
छात्रों और आम लोगों की बढ़ी परेशानी
गैस संकट का असर छात्रों और आम लोगों पर भी पड़ा है। हॉस्टल और लॉज में रहने वाले छात्रों को खाना बनाने में दिक्कत हो रही है। कई छात्र बाहर खाने को मजबूर हैं, जिससे उनका खर्च बढ़ गया है। कुछ रेस्टोरेंट कम लागत में भोजन उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि छात्रों को राहत मिल सके। अंतरराष्ट्रीय तनाव का प्रभाव अब स्थानीय बाजार और आम लोगों की दिनचर्या तक पहुंच चुका है। यदि जल्द ही स्थिति सामान्य नहीं होती है, तो महंगाई और आपूर्ति संकट और गहरा सकता है, जिससे आम जनजीवन पर और गंभीर असर पड़ने की आशंका है।

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