August 29, 2025

सहरसा में घर में घुसा अनियंत्रित स्कॉर्पियो, दंपति को कुचला, दोनों की दर्दनाक मौत

सहरसा। बिहार के सहरसा जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। नवहट्टा थाना क्षेत्र के बराही चौक पर देर रात एक अनियंत्रित स्कॉर्पियो ने घर में घुसकर सो रहे दंपति की जान ले ली। इस हादसे ने पूरे गांव को गहरे शोक और आक्रोश में डाल दिया है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बराही गांव निवासी लक्ष्मी पासवान और उनकी पत्नी तारा देवी अपने घर में सो रहे थे। इसी दौरान कोशी बांध से बराही चौक की ओर उतर रही तेज रफ्तार स्कॉर्पियो अचानक नियंत्रण खो बैठी। गाड़ी सीधे उनके घर में जा घुसी और दोनों को बुरी तरह कुचल डाला। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। ग्रामीणों ने किसी तरह स्कॉर्पियो को तोड़कर शवों को बाहर निकाला और पुलिस को सूचना दी। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद नवहट्टा पुलिस लगभग दो घंटे की देरी से मौके पर पहुंची। इस देरी को लेकर लोगों में भारी नाराजगी है। हादसे के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण बराही चौक पर इकट्ठा हो गए। उन्होंने प्रशासन और अज्ञात स्कॉर्पियो चालक के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। ग्रामीणों का कहना है कि यदि चौक पर नियमित पुलिस गश्ती होती और प्रशासन सतर्क रहता तो यह दुखद घटना नहीं घटती। लोगों का आरोप है कि पुलिस की लापरवाही और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था की कमी के कारण इस प्रकार के हादसे बढ़ते जा रहे हैं। ग्रामीणों ने मृतक परिवार को उचित मुआवजा देने और चौक पर नियमित पुलिस पेट्रोलिंग की मांग की। उनका कहना है कि प्रशासन को जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाएं न हों। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और बाद में परिजनों को सौंप दिया। हालांकि पुलिस की देर से पहुंचने की वजह से जनता का आक्रोश शांत नहीं हो सका। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए और पीड़ित परिवार को मदद दिलाने का आश्वासन दिया। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। लक्ष्मी पासवान और तारा देवी की अचानक मौत से परिवार पूरी तरह टूट चुका है। गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। दूसरी ओर, लोगों में प्रशासनिक उदासीनता और लापरवाही को लेकर गुस्सा भी है। यह घटना केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं है, बल्कि पुलिस व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक प्रशासन सजग नहीं होगा और सख्त कदम नहीं उठाएगा, तब तक ऐसे हादसे थमने वाले नहीं हैं। कुल मिलाकर, सहरसा की यह घटना न सिर्फ एक परिवार को तबाह कर गई, बल्कि प्रशासनिक ढिलाई और सुरक्षा व्यवस्था की पोल भी खोल गई। अब देखना होगा कि पीड़ित परिवार को न्याय और मुआवजा कब और कैसे मिलता है, तथा क्या प्रशासन भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाता है या नहीं।

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