आयुष्मान योग में 25 जुलाई से शुरू होगा सावन मास, चार सोमवार का अनूठा संयोग
- शुरूआत व समापन दोनों ही रविवार को, बरसेगी शिव के साथ सूर्य कृपा
पटना। भगवान शिव का प्रिय मास सावन आयुष्मान योग में 25 जुलाई से शुभ और विशेष संयोग के साथ शुरू होकर 22 अगस्त को खत्म होगा। हिन्दू धर्म में सावन महीने का खास महत्व है। इस महीने में भगवान शंकर की पूजा पूरे हर्षोल्लास से की जाती है। ऐसी मान्यता है कि सावन के महीने में सोमवार को व्रत रखने और भगवान शंकर की पूजा करने वाले जातक को मनवांछित जीवनसाथी प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है। विवाहित औरतें श्रावण महीने का सोमवार व्रत रखती हैं तो उन्हें भगवान शंकर सौभाग्य का वरदान देते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार श्रावण माह में भगवान शिव की पूजा, महामृत्युंजय मंत्र जाप व अभिषेक आदि से बाधा, रोग, शोक, कर्ज से मुक्ति मिलती है। शिव पूजा के साथ “ॐ नम: शिवाय” का जाप, शिव पंचाक्षर, रुद्राष्टक, शिव चलीसा, आदि का पाठ करने से मनचाहा वरदान मिलता है।
सावन में महादेव आते है ससुराल
भारतीय ज्योतिष विज्ञानं परिषद के सदस्य ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा ने बताया कि भगवान महादेव सावन मास में भू-लोक पर अवतरित होकर अपनी ससुराल गए थे और वहां उनका स्वागत अर्घ्य और जलाभिषेक से किया गया था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रत्येक वर्ष सावन महीने में भगवान शिव अपनी ससुराल आते हैं। भू-लोक वासियों के लिए शिव कृपा पाने का यह उत्तम समय होता है। पुराणों के अनुसार मां पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए सावन महीने में कठोर तप किया था।
चार सोमवार का बना अनूठा संयोग
ज्योतिषी झा ने कहा कि इस बार सावन में चार सोमवार का अनूठा संयोग बना है, जिसमें दो कृष्ण पक्ष व दो शुक्ल पक्ष में होंगे। सावन के दूसरे दिन ही पहला सोमवार इसके बाद दूसरी सोमवारी 2 अगस्त, तीसरी 9 व चौथी सोमवारी 16 अगस्त को है। जुलाई मास में एक तो अगस्त में तीन सोमवार होंगे। प्रथम सोमवार को सौभाग्य योग तो वहीं दूसरा एवं चौथा सोमवारी को सर्वार्थ सिद्धि योग विद्यमान रहेगा। शुक्ल पक्ष में अष्टमी-नवमी एक दिन होने से इस बार सावन 29 दिनों का होगा। सभी योगों में सर्वार्थ सिद्धि योग सबसे उत्तम माना गया है। मान्यता है कि इस योग शुद्ध अंत:करण से भगवान सदाशिव की आराधना करने से मनचाहा वर मिलता है। सभी कार्य सिद्द हो जाते हैं। इस दिन शिव आराधना से अक्षुण दांपत्य जीवन का आशीष प्राप्त होता है।
मिथिला में नवविवाहिता करेंगी मधुश्रावणी व्रत
सुहागन महिलायें इस पवित्र माह में हरे रंग की साड़ियां एवं चूड़ी धारण करती हैं। भारत कृषि प्रधान देश है, इस मास में बारिश होने से खेतो में नए फसल लहराते रहते हैं, इसीलिए सावन में हरा रंग का विशेष महत्व दिया गया है। मिथिला परंपरा के नवविवाहित स्त्रियां इस मास में पंचमी तिथि से मधुश्रावणी की पूजा आरंभ करती हैं, जो पूरे 15 दिनों तक चलता है।
जलाभिषेक से मिलेगा उत्तमोत्तम फल
पंडित झा ने पौराणिक कथाओं का हवाला देते हुए बताया कि इसी सावन मास में समुद्र मंथन किया गया था। समुद्र मंथन के बाद जो हलाहल विष निकला, उसे भगवान शंकर ने अपने कंठ में समाहित कर सृष्टि की रक्षा की, लेकिन विषपान से महादेव का कंठ नीलवर्ण हो गया। इसी से उनका नाम ‘नीलकंठ महादेव’ पड़ा। विष के प्रभाव को कम करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने उन्हें जल अर्पित किया। इसलिए शिवलिंग पर जल चढ़ाने का खास महत्व है। यही वजह है कि श्रावण मास में भोले को जल चढ़ाने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। ‘शिवपुराण’ के अनुसार भगवान शिव स्वयं ही जल हैं। इसलिए जल से उनकी अभिषेक के रूप में अराधना का उत्तमोत्तम फल है।
असाध्य रोगों के मिलेगी मुक्ति
जातक या परिवार में किसी सदस्य को असाध्य बीमारी हो गई हो तो उसे सावन में सोमवार को जल में दूध व काले तिल डालकर शिवलिंग का अभिषेक करें। अभिषेक करते समय ‘ॐ जूं स:’ मंत्र का जाप करते रहें। इसके अलावा 11 हजार, 21 हजार या 1.25 लाख बार महामृत्युंजय का जाप करने या किसी योग्य ब्राह्मण को संकल्प देने से असाध्य बीमारी, रोग, शोक, दु:ख, जरा व मृत्यु के बंधनों से मुक्ति मिलती है।

राशि के अनुसार करे शिव आराधना, पूर्ण होंगे इच्छित कामना
मेष- राशि के जातकों को शिवजी को लाल चंदन व लाल रंग के फूल चढ़ाना चाहिए व ॐ नागेश्वराय नम: का जाप करना शुभ फलदायी होगा।
वृष- राशि के जातकों को चमेली के फूल चढ़ाकर रुद्राष्टाकर का पाठ करने से आशातीत लाभ होगा।
मिथुन- राशि के जातक को शिवजी को धतूरा, भांग चढ़ाकर साथ में पंचाक्षरी मंत्र का जाप करने से लाभ होगा।
कर्क- राशि के जातक शिवलिंग का भांग मिश्रित दूध से अभिषेक करें और रुद्राष्टाध्यायी का पाठ करें, अत्यंत लाभ होगा।
सिंह- राशि के जातक पूरे माह शिवजी को कनेर के लाल रंग फूल अर्पित करें तथा शिव मंदिर में शिव चालीसा का पाठ करें।
कन्या- राशि के जातक शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग आदि का श्रृंगार चढ़ाएं और पंचाक्षरी मंत्र का जाप करें तो लाभ होगा।
तुला- राशि के जातक मिश्री मिले दूध से शिवलिंग का अभिषेक करते हुए शिव के सहस्रनाम का जाप करें।
वृश्चिक- राशि के जातक भोलेनाथ को गुलाब का फूल व बिल्वपत्र की जड़ चढ़ाएं और नित्य रुद्राष्टक का पाठ करें।
धनु- राशि के जातकों को चाहिए कि वे प्रात: शिवजी के चरणों में पीले फूल अर्पित करें, प्रसाद के रूप में खीर का भोग लगाएं और शिवाष्टक का पाठ करें।
मकर- राशि के जातक शांति और समृद्धि के लिए शिवजी को धतूरा, फूल, भांग एवं अष्टगंध चढ़ाकर पार्वतीनाथाय नम: का जाप करें।
कुंभ- राशि के जातक शिवलिंग का गन्ने के रस से अभिषेक करें एवं शिवाष्टक का पाठ करें, आर्थिक लाभ मिलेगा।
मीन- राशि के जातक शिवलिंग पर पंचामृत, दही, दूध व पीले फूल चढ़ाएं एवं चंदन की माला से 108 बार पंचाक्षरी मंत्र का जाप करें, धन-धान्य में वृद्धि होगी।
श्रावण मास एक नजर में
25 जुलाई 2021: श्रावण मास प्रारंभ
26 जुलाई 2021: सावन का पहला सोमवार व्रत
02 अगस्त 2021: सावन का दूसरा सोमवार व्रत
04 अगस्त 2021 : कामदा एकादशी व्रत
08 अगस्त 2021: हरियाली अमावस्या
09 अगस्त 2021 : सावन का तीसरा सोमवार
11 अगस्त 2021: हरियाली तीज
13 अगस्त 2021: नाग पंचमी
16 अगस्त 2021: सावन का चौथा एवं अंतिम सोमवार व्रत
18 अगस्त 2021: पुत्रदा एकादशी
22 अगस्त 2021 : सावन पूर्णिमा व रक्षाबंधन

