सम्राट चौधरी का प्रशासन को सख्त संदेश, 30 दिन में शिकायत नहीं सुलझी तो अधिकारी होंगे निलंबित

  • डुमरी बुजुर्ग में सहयोग शिविर की शुरुआत, मुख्यमंत्री ने जनसमस्याओं के त्वरित समाधान पर दिया जोर
  • सारण के विकास के लिए एयरपोर्ट, नई टाउनशिप और गंगा-अंबिका पथ जैसी बड़ी योजनाओं की घोषणा

छपरा। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को सारण जिले के डुमरी बुजुर्ग में सहयोग शिविर का शुभारंभ करते हुए प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर बड़ा और सख्त संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि यदि जनता की शिकायतों का समाधान 30 दिनों के भीतर नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारी स्वतः निलंबित माने जाएंगे। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है और अधिकारियों के बीच जवाबदेही को लेकर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की नई जनसुनवाई व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य आम लोगों की समस्याओं का त्वरित और पारदर्शी समाधान सुनिश्चित करना है। इसी दिशा में राज्यभर में सहयोग शिविर की शुरुआत की जा रही है, ताकि लोग सीधे अपनी शिकायत दर्ज करा सकें और उसकी निगरानी मुख्यमंत्री कार्यालय स्तर से की जा सके। मुख्यमंत्री ने बताया कि 11 मई को सरकार द्वारा सहयोग पोर्टल और सहायता दूरभाष संख्या 1100 की शुरुआत की गई थी। अब प्रत्येक पंचायत स्तर पर हर महीने दूसरे और चौथे मंगलवार को सहयोग शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में अंचल, प्रखंड, शिक्षा, थाना, राजस्व और अन्य विभागों से जुड़ी शिकायतों का मौके पर समाधान करने का प्रयास किया जाएगा। सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी आवेदन पर कार्रवाई में देरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि आवेदन मिलने के 10 दिनों के भीतर संबंधित अधिकारी को मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से पहला नोटिस भेजा जाएगा। यदि 20 दिनों तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो दूसरा नोटिस जारी होगा और 25वें दिन तीसरी चेतावनी दी जाएगी। इसके बावजूद यदि 30 दिनों के भीतर शिकायत का समाधान नहीं किया गया तो 31वें दिन संबंधित पदाधिकारी स्वतः निलंबित माना जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनना और समय पर समाधान करना प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों से संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख को प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार और जनता के बीच भरोसा मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सारण जिले के विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान इस क्षेत्र को गोद लेने का जो वादा किया गया था, उस पर तेजी से काम हो रहा है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि क्षेत्र में आधुनिक एयरपोर्ट और नई टाउनशिप का निर्माण कराया जाएगा। बाबा हरिहरनाथ के नाम पर विकसित होने वाली इस नई टाउनशिप को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि छपरा में पटना के मरीन ड्राइव की तर्ज पर “गंगा-अंबिका पथ” का निर्माण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त नोएडा की तर्ज पर एक आधुनिक शहर बसाने की योजना पर भी सरकार काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से क्षेत्र में रोजगार, व्यापार और आधारभूत संरचना को नई गति मिलेगी। शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने राज्यभर में 211 नए डिग्री कॉलेज खोलने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा को गांव और छोटे शहरों तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है, ताकि छात्रों को बेहतर शिक्षा के लिए दूर-दराज के शहरों पर निर्भर न रहना पड़े। स्वास्थ्य सेवाओं पर भी मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अनुमंडल अस्पतालों के कई डॉक्टर सामान्य बीमारी में भी मरीजों को बड़े अस्पतालों में भेज देते हैं, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि बिना आवश्यकता मरीजों को रेफर करने वाले डॉक्टरों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि आगामी 15 अगस्त तक जिला और अनुमंडल अस्पतालों में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएंगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि यदि बिना गंभीर बीमारी के किसी मरीज को पटना भेजा गया तो संबंधित सिविल सर्जन के खिलाफ भी कार्रवाई तय होगी। मुख्यमंत्री के इस दौरे और घोषणाओं को प्रशासनिक सख्ती तथा विकास योजनाओं के बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस कार्यक्रम की व्यापक चर्चा हो रही है।

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