भोजपुर में बेखौफ अपराधियों का खूनी तांडव..रिटायर्ड कस्टम असिस्टेंट कमिश्नर को बेटे के सामने 7-8 गोलियों से भूना
>>जमीन विवाद में हत्या की आशंका, परिजनों ने राम कल्याण यादव पर लगाया आरोप; पुलिस ने एक संदिग्ध को हिरासत में लिया

आरा।(अमृतवर्षा ब्यूरो,)बिहार के भोजपुर जिले में अपराधियों ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था को चुनौती देते हुए दिनदहाड़े हत्या की सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया। आरा के नवादा थाना क्षेत्र स्थित कनकपुरी मोहल्ले में गुरुवार, 15 अक्टूबर की सुबह कस्टम विभाग के सेवानिवृत्त असिस्टेंट कमिश्नर राम कुमार सिंह (67) की गोली मारकर हत्या कर दी गई। जैन कॉलेज के पास उनके घर के निकट तीन हथियारबंद अपराधियों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं। परिजनों के अनुसार, हमलावरों ने उनके बेटे के सामने ही उन्हें करीब सात से आठ गोलियां मारीं।
इस वारदात ने इलाके में दहशत फैला दी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अपराधियों को कानून का कोई भय नहीं रह गया है, जो वे एक बुजुर्ग व्यक्ति को उसके घर के पास निशाना बनाकर आसानी से फरार होने की हिम्मत कर रहे हैं?
घर के पास घात लगाकर हमला, अस्पताल में तोड़ा दम
जानकारी के मुताबिक, राम कुमार सिंह गुरुवार सुबह अपने घर के पास थे। इसी दौरान तीन हथियारबंद अपराधियों ने उन पर हमला कर दिया। हमलावरों ने बेहद करीब से लगातार गोलियां चलाईं, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े। गोलीबारी के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
घायल राम कुमार सिंह को आनन-फानन में आरा सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की खबर फैलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। स्थानीय लोगों के बीच भी भय और आक्रोश का माहौल बन गया।
जमीन विवाद में हत्या की आशंका, राम कल्याण यादव पर आरोप
मृतक के परिजनों ने इस हत्याकांड के पीछे पुराने जमीन विवाद को वजह बताया है। उनकी पत्नी सुशीला देवी और बेटे राजेश कुमार ने राम कल्याण यादव नामक व्यक्ति पर हत्या में संलिप्तता का आरोप लगाया है।
हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और हत्या के पीछे की वास्तविक वजह का खुलासा पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल जमीन विवाद को हत्या की संभावित वजह के तौर पर देखा जा रहा है। जांच का अहम पहलू यह होगा कि हमलावरों ने किसके इशारे पर वारदात को अंजाम दिया और इस साजिश में अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे।
‘क्षत्रिय संघ बिहार’ के अध्यक्ष भी थे राम कुमार सिंह
राम कुमार सिंह कस्टम विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके अलावा, वह ‘क्षत्रिय संघ बिहार’ के अध्यक्ष भी थे। उनकी हत्या से स्थानीय स्तर पर शोक और आक्रोश का माहौल है।
एक सेवानिवृत्त अधिकारी की इस तरह हत्या किया जाना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब पुलिस के सामने न केवल हत्यारों को गिरफ्तार करने, बल्कि वारदात की पूरी साजिश का पर्दाफाश करने की चुनौती है।
एक संदिग्ध हिरासत में, अन्य आरोपियों की तलाश
घटना के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मामले में एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
पुलिस जांच में घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, हमलावरों के भागने के रास्ते और पुराने जमीन विवाद से जुड़े दस्तावेज अहम साबित हो सकते हैं। हालांकि, इन बिंदुओं पर पुलिस की आधिकारिक पुष्टि सामने आने के बाद ही जांच की प्रगति स्पष्ट होगी।
सबसे बड़ा सवाल: किसके संरक्षण में बेखौफ हैं अपराधी?
आरा में हुई इस हत्या ने एक बार फिर बिहार में अपराध नियंत्रण और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जमीन विवाद ही इस वारदात की वजह है, तो इसकी जांच यह भी स्पष्ट करेगी कि विवाद कितना पुराना था और क्या पहले किसी तरह की धमकी या शिकायत दर्ज कराई गई थी।
फिलहाल, परिजनों के आरोपों को जांच में परखना, संदिग्धों की भूमिका स्पष्ट करना और हत्या में शामिल सभी लोगों को कानून के दायरे में लाना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। राम कुमार सिंह की हत्या का मामला अब केवल एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि इस बात की परीक्षा भी है कि पुलिस कितनी तेजी से साजिश का खुलासा कर पीड़ित परिवार को न्याय दिला पाती है।

