बिहार में रसोई गैस संकट में राहत, आपूर्ति बढ़ने से स्थिति हो रही सामान्य, कालाबाजारी पर सख्ती
- तेल कंपनियों ने बॉटलिंग संयंत्रों में रिफिलिंग क्षमता बढ़ाई, कई जिलों में सिलिंडर की उपलब्धता सुधरी
- अवैध बिक्री और जमाखोरी करने वालों पर होगी प्राथमिकी
पटना। बिहार में पिछले एक सप्ताह से रसोई गैस को लेकर बनी अफरातफरी की स्थिति अब धीरे-धीरे सामान्य होती दिखाई दे रही है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में रविवार से एलपीजी यानी द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस सिलिंडरों की आपूर्ति में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। सार्वजनिक क्षेत्र की तीनों प्रमुख तेल कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने अपने गैस भराई संयंत्रों में सिलिंडरों की रिफिलिंग क्षमता बढ़ा दी है, जिसके कारण वितरकों और उपभोक्ताओं को काफी राहत मिली है। राज्य में इन तीनों कंपनियों के कुल नौ गैस भराई संयंत्र संचालित हैं। सामान्य परिस्थितियों में इन संयंत्रों से प्रतिदिन छह लाख से अधिक एलपीजी सिलिंडरों की रिफिलिंग और आपूर्ति की जाती है। हालांकि पिछले कुछ दिनों के दौरान अचानक मांग बढ़ने और आपूर्ति में आई बाधाओं के कारण स्थिति गंभीर हो गई थी। इस दौरान तेल कंपनियों ने रिफिलिंग और आपूर्ति में लगभग 25 से 30 प्रतिशत तक कटौती कर दी थी, जिससे राज्य के कई जिलों में गैस सिलिंडरों की उपलब्धता प्रभावित हो गई थी और उपभोक्ताओं को लंबे इंतजार का सामना करना पड़ रहा था। अब तेल कंपनियों द्वारा रिफिलिंग की मात्रा बढ़ाए जाने के बाद स्थिति में सुधार दिखने लगा है। सिलिंडरों की आपूर्ति बढ़ने से कई जिलों में लंबित मांग को धीरे-धीरे पूरा किया जा रहा है। सरकार ने कुल गैस उत्पादन का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा वाणिज्यिक सिलिंडरों के लिए निर्धारित किया है, जिससे व्यापारिक गतिविधियों और संस्थानों की जरूरतें भी पूरी की जा सकें। रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अस्पतालों, रेलवे, शैक्षणिक संस्थानों, भोजन व्यवस्था सेवाओं और आंगनबाड़ी केंद्रों जैसे आवश्यक संस्थानों को भी गैस की आपूर्ति शुरू कर दी गई है। शनिवार देर रात बक्सर, कोइलवर और पटना सहित कई स्थानों पर वाणिज्यिक सिलिंडरों की आपूर्ति की गई, जिससे व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को भी राहत मिली है। इस बीच प्रशासन ने गैस सिलिंडरों की कालाबाजारी और जमाखोरी को लेकर सख्त रुख अपनाया है। पटना के जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसी भी व्यक्ति या वितरक द्वारा सिलिंडरों की अवैध बिक्री या जमाखोरी की शिकायत मिलती है तो उसके खिलाफ सीधे प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई वितरक लापरवाही बरतता है या आपूर्ति में जानबूझकर बाधा उत्पन्न करता है तो उसके खिलाफ आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पटना जिले की स्थिति पर नजर डालें तो यहां 145 गैस वितरकों के माध्यम से करीब 16 लाख 96 हजार सक्रिय उपभोक्ताओं को गैस की आपूर्ति की जिम्मेदारी निभाई जा रही है। इनमें अकेले इंडियन ऑयल के लगभग 9 लाख 88 हजार ग्राहक शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार औसतन प्रत्येक गैस एजेंसी पर 11 से 12 हजार उपभोक्ताओं का दबाव है। ऐसे में आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना प्रशासन और तेल कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। फिलहाल आपूर्ति में सुधार के साथ ही राज्य में रसोई गैस को लेकर बनी चिंता कम होती दिखाई दे रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में स्थिति पूरी तरह सामान्य हो जाएगी।


