जनगणना 2027 की तैयारी तेज, डिजिटल प्रणाली से होगा डेटा संग्रह
- व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय, किसी भी संस्था या अदालत से साझा नहीं होगी
- पहली बार लिव-इन संबंधों को भी वैवाहिक श्रेणी में शामिल करने की व्यवस्था
नई दिल्ली। आगामी जनगणना 2027 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं और सरकार ने इस बार प्रक्रिया को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने एक प्रेस वार्ता में बताया कि जनगणना अधिनियम की धारा 15 के तहत एकत्र किया गया प्रत्येक व्यक्ति का डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी नागरिक की व्यक्तिगत जानकारी न तो सूचना का अधिकार कानून के तहत साझा की जा सकती है, न ही अदालत में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत की जा सकती है और न ही किसी अन्य संस्था को दी जाएगी। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में जनगणना के पहले चरण, यानी मकान सूचीकरण और आवासीय गणना का फील्ड कार्य कई राज्यों में शुरू होने जा रहा है। जनगणना हमेशा दो चरणों में कराई जाती है और इस बार इसे पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाएगा। इससे डेटा संग्रह की प्रक्रिया न केवल तेज होगी, बल्कि अधिक सटीक और पारदर्शी भी बनेगी। डिजिटल प्रणाली के तहत नागरिक स्वयं भी अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे, जिससे गणनाकर्मियों पर निर्भरता कम होगी। नारायण ने कहा कि इस प्रक्रिया में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। स्थानीय प्रशासन को जमीनी स्तर तक सक्रिय किया जाता है ताकि हर व्यक्ति तक पहुंच सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि पिछली जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी और स्वतंत्रता के बाद यह देश की आठवीं जनगणना होगी। जनगणना से पहले अधिकारियों को सख्त दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। किसी भी प्रकार की लापरवाही, डेटा का दुरुपयोग, जनगणना कार्य में बाधा उत्पन्न करना या नागरिकों से आपत्तिजनक प्रश्न पूछना कानूनन अपराध माना जाएगा। जनगणना अधिनियम 1948 के तहत ऐसे मामलों में जुर्माना और सजा दोनों का प्रावधान है। 17 मार्च को राज्यों को भेजे गए एक पत्र में इन नियमों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। इसमें अपराध की गंभीरता के आधार पर एक हजार रुपये तक का जुर्माना और अधिकतम तीन साल की सजा का प्रावधान रखा गया है। इस बार की जनगणना में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि पहली बार लिव-इन संबंधों में साथ रहने वाले जोड़ों को भी विवाहित श्रेणी में शामिल किया जाएगा, बशर्ते वे अपने संबंध को स्थायी मानते हों। यह स्पष्टीकरण स्व-गणना पोर्टल पर पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में दिया गया है। इससे बदलते सामाजिक ढांचे को ध्यान में रखते हुए आंकड़ों को अधिक वास्तविक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। जनगणना के पहले चरण यानी मकान सूचीकरण में कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे। इसमें घर में रहने वाले विवाहित जोड़ों की संख्या, मकान की स्थिति और अन्य बुनियादी जानकारी शामिल होगी। यह चरण लगभग 45 दिनों तक चलेगा और इसका कार्य 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच पूरा किया जाएगा। हालांकि, अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए समयसीमा अलग-अलग तय की जाएगी। इसके साथ ही, घर के मुखिया का लिंग भी दर्ज किया जाएगा, जिसमें पुरुष, महिला और ट्रांसजेंडर तीनों विकल्प शामिल होंगे। यह कदम सामाजिक समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। जनगणना का दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति से जुड़ी विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। इसमें नाम, आयु, जन्म तिथि, वैवाहिक स्थिति, शिक्षा, व्यवसाय, धर्म, जाति या जनजाति, विकलांगता और प्रवास जैसी जानकारी शामिल होगी। इस प्रक्रिया में बेघर लोगों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि कोई भी व्यक्ति गणना से वंचित न रह जाए। पूरे देश में इस विशाल अभियान को सफल बनाने के लिए लगभग 30 लाख गणनाकर्मी, पर्यवेक्षक और अन्य अधिकारी लगाए जाएंगे। ये सभी एक सुरक्षित मोबाइल अनुप्रयोग के माध्यम से घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे। सरकार का मानना है कि इस बार की जनगणना न केवल तकनीकी रूप से उन्नत होगी, बल्कि इससे प्राप्त आंकड़े भविष्य की नीतियों और योजनाओं के निर्माण में भी अहम भूमिका निभाएंगे।


