पटना पुलिस का दोहरा चरित्र उजागर : शराब के नशे में धुत्त संपतचक के दो चौकीदारों को कोर्ट से मिल गयी जमानत
चौकीदारों पर 37बी धारा के तहत की गई कार्रवाई, इसलिए कोर्ट से तुरंत मिली जमानत

फुलवारी शरीफ, (अजीत)। राजधानी पटना से सटे संपतचक के दो चौकीदारों मनोज पासवान एवं विनय पासवान को शराब के नशे में गिरफ्तारी और मेडिकल में शराब पीने की पुष्टि होने के बावजूद कोर्ट से जमानत मिल गई। पटना पुलिस का शराबबंदी को लेकर दोहरा चरित्र सामने आया है। इस मामले की जैसे ही लोगों को जानकारी हुई, तरह-तरह के सवाल पुलिस पर उठने लगे।
लोगों का कहना है कि सरकार एक तरफ शराबबंदी अधिनियम को लेकर सख्त रवैया अपनाने का निर्देश देती है। कोई आम लोग जब शराब के नशे में धुत पकड़े जाते हैं तो उन्हें पटना पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज देती है। इतना ही नहीं, शराब के नशे में पकड़े जाने वाले लोग को 10 से 15 दिन से लेकर 1 माह से अधिक तक जेल में गुजारना पड़ता है। वहीं पटना के संपतचक के सोना गोपालपुर के चौकीदार मनोज पासवान एवं बैरिया के चौकीदार विनय पासवान को गोपालपुर थाना पुलिस ने मध निषेध अधिनियम की धारा में रियायत करते हुए कोर्ट से जमानत मिलने में मदद करा दी। आम मामलों में देखा गया है कि जब कोई भी आदमी शराब के नशे में गिरफ्तार होकर थाना पहुंचता है तो पुलिस उसकी मेडिकल कराती है, उसके बाद मध निषेध अधिनियम की धारा 37 सी लगाकर जेल भेज दिया जाता है। संपतचक के शराबी चौकीदारों के मामले में पुलिस ने मध निषेध अधिनियम की धारा 37बी लगाकर कोर्ट में पेश किया, जहां से कोर्ट ने जमानत दे दी।
वहीं गोपालपुर थाना अध्यक्ष अभिषेक रंजन के मुताबिक दोनों चौकीदार मनोज पासवान एवं विनोद पासवान को शराब के नशे में धुत पकड़े जाने के बाद मेडिकल कराया गया। इसके बाद दोनों चौकीदारों को जेल भेजने के लिए न्यायालय में पेश किया गया। थानेदार का कहना है कि वरीय पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर इस मामले में चौकीदारों पर 37बी धारा के तहत कार्रवाई की गई थी, जिसके चलते कोर्ट से तुरंत जमानत मिल गई। थानेदार की माने तो मध निषेध अधिनियम की धारा सी शराब पीकर हो हंगामा करने वालों पर लगाया जाता है।
बहरहाल थानेदार चाहे जो तर्क दे दें, अमूमन ऐसा नहीं होता है कि जो लोग शराब के नशे में पकड़े जाते हैं, वे लोग हंगामा ही करते हैं। इसके बावजुद पुलिस उनके खिलाफ धारा 37सी लगाकर जेल भेज देती है। एक तरफ जहरीली शराब पीकर हो रही लोगों की मौत पर राजनीतिक बवाल मचा हुआ है। वहीं शराबबंदी अधिनियम का माखौल उड़ाने जैसा मामला शराबी चौकीदारों को कोर्ट से जमानत मिलने पर सामने आ रहा है। इतना ही नहीं, शराबबंदी की सफलता पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है। ऐसे में लोगों द्वारा शराबंदी की अफलता पर सवाल उठना लाजिमी है। लोग मानते हैं कि जिन पर शराबबंदी की सफलता का जिम्मा है, वे लोग ही शराब बंदी का माखौल उड़ा रहे हैं।

