January 28, 2026

नीतीश के बिना बिहार में सरकार चलाना असंभव, उनके लिए छोटा है नोबेल पुरस्कार : संजय झा

पटना। बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कद लगातार ऊंचा होता जा रहा है, और उनके विकास कार्यों की सराहना अब उनके सहयोगी नेता भी खुलकर कर रहे हैं। जनता दल (यूनाइटेड) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने रविवार को नीतीश कुमार की राजनीतिक और प्रशासनिक भूमिका की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने नीतीश कुमार की तुलना उस खंभे से की, जिसके बिना बिहार में कोई सरकार चल ही नहीं सकती। इस बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि जदयू नीतीश कुमार को लेकर आगामी चुनावों में एक मजबूत रणनीति तैयार कर रही है। संजय झा ने अपने बयान में नीतीश कुमार को बिहार की राजनीति का अटूट स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार न केवल राज्य की राजनीति के केंद्र में हैं, बल्कि उनके बिना कोई भी सरकार प्रभावी रूप से कार्य नहीं कर सकती। यह बयान नीतीश कुमार के प्रति संजय झा और जदयू के शीर्ष नेतृत्व की गहरी आस्था को दर्शाता है। उनका कहना था कि नीतीश कुमार ने पिछले कई वर्षों में बिहार के विकास के लिए जो काम किए हैं, वो किसी और ने नहीं किया। खासकर महिलाओं के लिए उनके कार्यों को झा ने विशेष रूप से सराहा। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के क्षेत्र में नीतीश कुमार का योगदान अद्वितीय है। महिलाओं के लिए किए गए आरक्षण, साइकिल योजना और पंचायत स्तर पर महिलाओं को सशक्त बनाने के उनके कदमों ने राज्य में सामाजिक और राजनीतिक बदलाव लाए हैं। संजय झा ने दावा किया कि नीतीश कुमार के इन कार्यों की जितनी तारीफ की जाए, वह कम होगी। यहां तक कि उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार के लिए “नोबेल पुरस्कार” भी छोटा है, क्योंकि उन्होंने समाज के सभी वर्गों के लिए जो काम किया है, वह बेमिसाल है। संजय झा ने 2025 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी अपने विचार साझा किए। उनका कहना था कि जदयू अगला विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में लड़ेगी। उनके नेतृत्व में पार्टी एक बार फिर जनता का विश्वास जीतने के लिए तैयार है। झा ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में जदयू 176 सीटों पर आगे रही थी, और इससे यह संकेत मिलता है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में जदयू और भी बेहतर प्रदर्शन करेगी। यह बयान जदयू की आत्मविश्वासपूर्ण स्थिति को दर्शाता है, जिसमें पार्टी नीतीश कुमार के विकास कार्यों को अपनी सबसे बड़ी ताकत मान रही है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में पार्टी ने कई ऐसे कदम उठाए हैं, जिनसे बिहार के विकास को नई दिशा मिली है। राज्य में सड़क, बिजली, शिक्षा, और स्वास्थ्य के क्षेत्र में जो सुधार हुए हैं, उनका प्रभाव जनता के जीवन पर साफ देखा जा सकता है। हालांकि, संजय झा का बयान पार्टी के भीतर और बाहर नीतीश कुमार की लोकप्रियता और प्रभाव को स्पष्ट करता है, लेकिन बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार के सामने चुनौतियों की कमी नहीं है। संजय झा का बयान केवल नीतीश कुमार की तारीफ नहीं, बल्कि यह बिहार की राजनीति में जदयू की एक स्पष्ट रणनीति का संकेत है। यह बयान उस संदेश को स्पष्ट करता है कि जदयू के लिए नीतीश कुमार का नेतृत्व अपरिहार्य है, और पार्टी उनसे जुड़े विकास कार्यों को लेकर चुनावी मैदान में उतरेगी। यह बयान उन आलोचनाओं का भी जवाब है, जो नीतीश कुमार के नेतृत्व को लेकर उठती रही हैं। बिहार की राजनीति में यह हमेशा कहा जाता रहा है कि नीतीश कुमार का राजनीतिक जीवन समाप्ति की ओर है, लेकिन संजय झा का यह बयान उन सभी अटकलों को नकारता है। बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार का कद और उनके विकास कार्यों की गूंज लगातार बढ़ रही है। संजय झा के बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि जदयू नीतीश कुमार के नेतृत्व को अगले विधानसभा चुनाव में अपनी सबसे बड़ी ताकत मानकर उतरेगी। महिलाओं के सशक्तिकरण और राज्य के विकास के लिए किए गए उनके कार्यों को पार्टी पूरी तरह से भुनाने की कोशिश करेगी। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नीतीश कुमार और जदयू की यह रणनीति भाजपा और अन्य विपक्षी दलों के खिलाफ कितना कारगर साबित होती है। संजय झा का यह बयान इस बात का प्रमाण है कि नीतीश कुमार अभी भी बिहार की राजनीति में एक अहम खिलाड़ी हैं, और उनके बिना राज्य की राजनीति की कल्पना करना मुश्किल है।

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