वोटिंग के बीच नीतीश ने नेताओं से लिया फीडबैक, ललन सिंह से की मुलाकात, चुनाव की ली जानकारी
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के दौरान राजनीति का माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। राज्य में मतदान चल रहा है, वहीं दूसरी ओर जनता दल यूनाइटेड के भीतर भी चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार मंगलवार सुबह केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह के पटना स्थित आवास पर पहुंचे। चुनाव के इस निर्णायक दौर में यह मुलाकात राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसमें चुनावी समीकरणों से लेकर एनडीए की आंतरिक स्थिति पर विस्तृत चर्चा हुई।
ललन सिंह से मुलाकात और रणनीतिक बातचीत
नीतीश कुमार और ललन सिंह की यह बैठक लगभग उसी समय हुई जब दूसरे चरण की वोटिंग चल रही थी। चुनाव विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी मुलाकातें आम तौर पर मतदान की प्रगति, बूथों के रुझान, पार्टी कैडर की सक्रियता और विपक्ष की रणनीति को समझने के लिए की जाती हैं। दोनों नेताओं के बीच यह बताया जा रहा है कि चुनाव के बाद संभावित राजनीतिक परिस्थितियों पर भी बात हुई। जेडीयू के अंदर यह माना जा रहा है कि ललन सिंह और नीतीश कुमार के बीच रिश्तों में हाल के दिनों में दूरी की खबरें भले सामने आती रही हों, लेकिन चुनावी समय में दोनों नेताओं का एक मंच पर आना संगठनात्मक मजबूती का संकेत देता है।
विजय कुमार चौधरी से मुलाकात
ललन सिंह के आवास से निकलने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जेडीयू से जुड़े एक अन्य वरिष्ठ नेता और मंत्री विजय कुमार चौधरी के आवास पर पहुंचे। यहाँ भी उन्होंने मतदान की स्थिति, मतदाताओं के रुझान और पार्टी कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट पर बातचीत की। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं ने एनडीए के अंदरूनी समन्वय, सीट-वार फीडबैक और दूसरे चरण में होने वाली वोटिंग की स्थिति पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।
पहले चरण की वोटिंग और मतदाताओं का उत्साह
पहले चरण का चुनाव 6 नवंबर को हुआ था, जिसमें 65 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया। यह आंकड़ा सामान्य चुनावों की तुलना में काफी अधिक माना जा रहा है। चुनाव आयोग के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में खासकर महिलाओं और युवाओं ने बड़ी संख्या में मतदान किया। इससे राजनीतिक दलों में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। दूसरे चरण की वोटिंग भी इसी रफ्तार से आगे बढ़ रही है। कई क्षेत्रों में मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिली हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उच्च मतदान कहीं न कहीं सत्ता-विरोध और सत्ता-समर्थन दोनों तरह के रुझानों को दिखाता है। इन स्थितियों को देखते हुए एनडीए के नेता दावा कर रहे हैं कि नीतीश सरकार की वापसी लगभग तय है।
विपक्ष के आरोप और नीतीश की सक्रियता
चुनाव प्रचार के दौरान विपक्ष लगातार यह आरोप लगाता रहा कि नीतीश कुमार अब उतने सक्रिय नहीं हैं और स्वस्थ्य संबंधी कारणों से वे राज्य की बागडोर संभालने की स्थिति में नहीं हैं। आरजेडी सहित पूरे महागठबंधन ने इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश की। लेकिन जैसे-जैसे चुनाव प्रचार आगे बढ़ा, नीतीश कुमार की सक्रियता और आक्रामक शैली ने विपक्ष के आरोपों को काफी हद तक कमजोर कर दिया। उन्होंने पहले चरण से लेकर दूसरे चरण तक लगातार कई जनसभाएं कीं, लंबी दूरी की यात्राएं कीं और प्रदेश के हर हिस्से में जाकर वोट मांगे। चुनावी मंचों पर उनकी तेज आवाज और सक्रियता ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वे अब भी पूरी मजबूती के साथ राज्य की जिम्मेदारी निभाने में सक्षम हैं।
एनडीए के भीतर समन्वय और चुनावी समीकरण
एनडीए के शीर्ष नेताओं का मानना है कि नीतीश कुमार की साख, संगठन की मजबूती और भाजपा-जेडीयू के संयुक्त अभियान का फायदा गठबंधन को मिल सकता है। वहीं विपक्ष का तर्क है कि इस बार जनता बदलाव की मूड में है। इसी टकराव के बीच नीतीश कुमार का वोटिंग के दौरान वरिष्ठ नेताओं से लगातार बैठकें करना यह दर्शाता है कि वे हर छोटे-बड़े इनपुट को गंभीरता से ले रहे हैं। दूसरे चरण की वोटिंग के बीच नीतीश कुमार की यह दौड़-धूप चुनावी राजनीति का एक महत्वपूर्ण संकेत है। उनकी वरिष्ठ नेताओं से लगातार मुलाकातें बताती हैं कि वे मतदान के हर पहलू पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। पहले चरण के रिकॉर्ड मतदान और दूसरे चरण में भी जारी भारी वोटिंग को देखते हुए यह चुनाव काफी दिलचस्प मोड़ पर खड़ा हो गया है और अंतिम परिणाम क्या होगा, यह तय करने में अभी कुछ और समय लगेगा।


